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मेहमानों को छोड़ कर लौट रहे युवक को डीसीएम ने रौंदा
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 09 Jul 2016 10:21 PM IST
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घटना के बाद रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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बाइक से रिश्तेदार को छोड़कर वापस अपने गांव आ रहे युवक की डीसीएम की चपेट में आने से मौत हो गई। युवक की सात जुलाई को शादी हुई थी। शादी के दूसरे दिन ही उसकी मौत से पूरा गांव स्तब्ध है।
कुठौंद थाना क्षेत्र के गांव टिकरी मुस्तकिल निवासी अमर सिंह के पुत्र राजवीर सिंह (28) की 7 जुलाई को शादी थी। वह शुक्रवार को अपनी पत्नी की विदा कराकर गांव आया था। अभी उसके हाथ का कंगन भी
नहीं छूटा था कि शनिवार को बाइक से रिश्तेदार को छोड़कर लौटते समय मदनेपुर गांव की पुलिया से जालौन-औरैया रोड पर डीसीएम ने कुचल दिया। राहगीराें ने उसे सीएचसी पहुंचाया। यहां हालत गंभीर देखते हुए डाक्टर ने उसे कानपुर रेफर कर दिया। परिजन उसे लेकर कानपुर जा रहे थे तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन शव को वापस लाए जहां पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने अज्ञात डीसीएम चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर कार्रवाई की बात कही है।
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एक दिन ही सुहागिन रह सकी पप्पी
जिसने अग्नि के सामने सात फे रे लेकर सात जन्मों का साथ निभाने का वादा किया वह केवल एक दिन साथ दे पाएगा ऐसा उसकी दुल्हन पप्पी ने कभी सोचा भी नहीं था। अभी देवी देवताओं का पूजन भी नहीं हुआ था कि दोनाें परिवाराें पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। इस समय हर कोई यही कह रहा है कि काश रिश्तेदार को छोड़ने न जाता तो राजवीर की जान बच जाती लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।
टिकरी मुस्तकिल निवासी राजवीर के घर में कई दिनाें से मंगल गीत गूंज रहे थे। सात तारीख को शादी और 8 को दुल्हन विदा होकर घर आई थी। घर में जश्न मन रहा था लेकिन परिजनों को क्या पता था कि यह खुशियां एक दिन की हैं। शनिवार को हादसे में राजवीर की मौत ने सबको झकझोर दिया है। पत्नी पप्पी का रो रोकर बुरा हाल है। वह अपनी सुधबुध खो चुकी है। वह कभी पति के शव से लिपटकर रोने लगती तो कभी वह आसमान की ओर निहारने लगती है। गांव की महिलाएं उसे ढाढ़स बंधा रही लेकिन उसके मुंह से यही निकल रहा था कि मेरे पति को कोई वापस दिला दे।
इकलौते चिराग की मौत से टूट गया परिवार
राजवीर अपने माता पिता की इकलौती संतान व बुढ़ापे का सहारा था। भगवान ने उनका वह भी सहारा छीन लिया। वर्षों इंतजार के बाद उनके इकलौते पुत्र ने सेहरा बंाधा और वह बहू को भी लेकर घर आ गया। फिर अचानक ऊपर वाला ऐसा रूठा कि बूढे़ मां-बाप का सहारा छीन लिया तो वही नवविवाहिता के सपने भी चकनाचूर हो गए। इस हादसे से पूरे गांव में मातम छाया है।
काश: लगाई होती हेलमेट तो बच जाती जान
हादसे में दूल्हे की मौत का तो सभी को मलाल है लेकिन अगर राजवीर ने हेलमेट लगाई होती तो शायद उसकी जान बच जाती। उसेक सिर में गंभीर चोट लगने के कारण ही मौत हुई है। राजवीर का हादसा जिस बाइक पर हुआ है वह उसे ससुराल से ही मिली थी लेकिन उसेक पास हेलमेट नहीं थी और वह हेलमेट हादसे के वक्त नहीं पहने था और उसे अपनी जान गवांनी पड़ी।
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कुठौंद थाना क्षेत्र के गांव टिकरी मुस्तकिल निवासी अमर सिंह के पुत्र राजवीर सिंह (28) की 7 जुलाई को शादी थी। वह शुक्रवार को अपनी पत्नी की विदा कराकर गांव आया था। अभी उसके हाथ का कंगन भी
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नहीं छूटा था कि शनिवार को बाइक से रिश्तेदार को छोड़कर लौटते समय मदनेपुर गांव की पुलिया से जालौन-औरैया रोड पर डीसीएम ने कुचल दिया। राहगीराें ने उसे सीएचसी पहुंचाया। यहां हालत गंभीर देखते हुए डाक्टर ने उसे कानपुर रेफर कर दिया। परिजन उसे लेकर कानपुर जा रहे थे तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन शव को वापस लाए जहां पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने अज्ञात डीसीएम चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर कार्रवाई की बात कही है।
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एक दिन ही सुहागिन रह सकी पप्पी
जिसने अग्नि के सामने सात फे रे लेकर सात जन्मों का साथ निभाने का वादा किया वह केवल एक दिन साथ दे पाएगा ऐसा उसकी दुल्हन पप्पी ने कभी सोचा भी नहीं था। अभी देवी देवताओं का पूजन भी नहीं हुआ था कि दोनाें परिवाराें पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। इस समय हर कोई यही कह रहा है कि काश रिश्तेदार को छोड़ने न जाता तो राजवीर की जान बच जाती लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।
टिकरी मुस्तकिल निवासी राजवीर के घर में कई दिनाें से मंगल गीत गूंज रहे थे। सात तारीख को शादी और 8 को दुल्हन विदा होकर घर आई थी। घर में जश्न मन रहा था लेकिन परिजनों को क्या पता था कि यह खुशियां एक दिन की हैं। शनिवार को हादसे में राजवीर की मौत ने सबको झकझोर दिया है। पत्नी पप्पी का रो रोकर बुरा हाल है। वह अपनी सुधबुध खो चुकी है। वह कभी पति के शव से लिपटकर रोने लगती तो कभी वह आसमान की ओर निहारने लगती है। गांव की महिलाएं उसे ढाढ़स बंधा रही लेकिन उसके मुंह से यही निकल रहा था कि मेरे पति को कोई वापस दिला दे।
इकलौते चिराग की मौत से टूट गया परिवार
राजवीर अपने माता पिता की इकलौती संतान व बुढ़ापे का सहारा था। भगवान ने उनका वह भी सहारा छीन लिया। वर्षों इंतजार के बाद उनके इकलौते पुत्र ने सेहरा बंाधा और वह बहू को भी लेकर घर आ गया। फिर अचानक ऊपर वाला ऐसा रूठा कि बूढे़ मां-बाप का सहारा छीन लिया तो वही नवविवाहिता के सपने भी चकनाचूर हो गए। इस हादसे से पूरे गांव में मातम छाया है।
काश: लगाई होती हेलमेट तो बच जाती जान
हादसे में दूल्हे की मौत का तो सभी को मलाल है लेकिन अगर राजवीर ने हेलमेट लगाई होती तो शायद उसकी जान बच जाती। उसेक सिर में गंभीर चोट लगने के कारण ही मौत हुई है। राजवीर का हादसा जिस बाइक पर हुआ है वह उसे ससुराल से ही मिली थी लेकिन उसेक पास हेलमेट नहीं थी और वह हेलमेट हादसे के वक्त नहीं पहने था और उसे अपनी जान गवांनी पड़ी।