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फायर झोंकते रहे बदमाश, हाथ मलते रहे ग्रामीण

Wed, 25 Jan 2017 10:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Wed, 25 Jan 2017 10:25 PM IST
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 fire are crooks
Firing
जिस वक्त हथियारों से लैस बदमाश शिक्षक अनिल के घर उपद्रव कर रहे थे, उस वक्त गांव के कई लोग उनके घर के बाहर खड़े तमाशबीन बने रहे। भीड़ बढ़ती देख जब बदमाश फायर करते हुए भागे, तो ग्रामीणों के पास सिवाय हाथ मलने के कोई रास्ता नहीं था। ग्रामीणों की मानें यदि आचार संहिता के चलते गांव के हथियार थाने में जमा कराए जा चुके हैं। इस
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कारण वे प्रत्युत्तर में मूकदर्शक बने रहे। ग्रामीणों में इस बात का भी आक्रोश है कि चुनाव के दौरान पुलिस आम आदमी पर तो सख्ती करती है, लेकिन इन बदमाशों को देखने वाला कोई
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नहीं है। बदमाश कट्टे, तमंचे और बंदूक लेकर पुलिस की नाक के नीचे ही न सिर्फ घूम रहे हैं, बल्कि वारदातें भी कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक थाने के इतने पास होने पर भी गांव में रात गश्त की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में चुनाव के दौरान होने वाले रूट मार्च का मतलब रह जाता है।  
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दो बदमाशों पर भारी पड़ी निधि
अनिल  की बेटी निधि के मुताबिक गोली की आवाज से उसकी नींद टूटी तो देखा कि सामने मम्मी फर्श पर लहूलुहान पड़ी थी। भाई निशंक के दोनों हाथों से भी खून बह रहा था। इस पर उसका खून खौल उठा और उसने दोनों हाथों से दो अलग-अलग बदमाशों के कालर पकड़कर उन्हें गिरा दिया। इससे पहले कि वह दोनों पर आक्रामक होती, पीछे से आए किसी तीसरे बदमाश ने उसके सिर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। बस फिर वह बेहोश होकर गिर पड़ी।

 नहीं लगा यूपी 100 का फोन
पीड़ित अनिल ने बताया कि जिस वक्त बदमाश घर पर मौजूद थे, उस वक्त  गांववालों ने कई मर्तबा यूपी 100 का फोन मिलाया लेकिन फोन ही नहीं लगा। इसके बाद सीधे थाना प्रभारी बृजनेश को फोन मिलाया गया। इसके कुछ देर बाद पुलिस पहुंची।

परेड से हो सकती है शिनाख्त
निधि और अनिल का कहना है कि उन्होंने दो एक बदमाशों के चेहरे देखे हैं, यदि उन्हें सामने लाया गया तो वे उनको पहचान भी सकते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिनाख्त के लिए पीड़ितों के सामने संदिग्धों की परेड कराई जाएगी।

अस्पताल में सोता मिला चौकीदार
अनिल और उनके परिवार के घायलों को लेकर जब ग्रामीण पास के सीएचसी पहुंचे तो वहां न तो डॉक्टर थे और न स्टाफ। सिर्फ चौकीदार ही सो रहा था। आनन फानन में घायलों को माधौगढ़ से जिला अस्पताल रेफर किया गया। प्रधान राजीव करसेना, प्रीप गौरव, जानी गुप्ता आदि का कहना है कि महीनों से अस्पताल का ऐसा ही बुरा हाल है।

टूटा भरोसा, रतजगा करेंगे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के वक्त घरों में डाके पड़ रहे हैं, अब पुलिस का क्या भरसा किया जाए, अब वे ही गांव की सुरक्षा के लिए रतजगा करने की रणनीति बनाएंगे।  


सवालों के घेरे में पुलिस की रिपोर्ट
पुलिस के हत्या के प्रयास में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद सवाल यह है कि यदि बदमाशों को शिक्षक की हत्या ही करनी थी तो पैर में गोली क्यों मारी और फिर पूरे परिवार पर जानलेवा हमला क्यों किया। अनिल की पत्नी विभा के बाले क्यों छीने और अलमारी का लाकर व बक्से क्यों तोड़े। कोतवाल का कहना है कि फिलहाल कैश और जेवर घर में सुरक्षित मिला है, हो सकता है कि बदमाश ग्रामीणों के जागने पर भागे हों। मामले की गंभीरता पूर्वक जांच की जाएगी।
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