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Jalaun News: लापरवाही की लीपापोती, पैचिंग के पांच दिन बाद गड्ढे-सरिया फिर उभरे
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उरई। हमीरपुर-जोल्हूपुर मोड़ के ओवरब्रिज पर एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही की लीपापोती सामने आई है। दरअसल, सात साल से निर्माणाधीन पुल की एक साल पहले खुली एक लेन पर गड्ढे और सरिया-एंगल उभरने की खबर अमर उजाला ने 12 अगस्त को प्रकाशित की। 13 अगस्त को हरकत में आए प्रशासन ने ओवरब्रिज पर जो सरिया, एंगल और गड्ढे सीमेंट और बालू से ढके थे। वह महज पांच दिन में उभर आए हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की यह खानापूरी बरसात की मार नहीं झेल सकी। मौके पर जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने निरीक्षण किया तो साफ दिखा कि जिन गड्ढों को भरवाया गया था, वह फिर से उखड़ चुके हैं और सरिया भी बाहर झांकने लगी हैं। इससे साफ है कि असल मरम्मत की जगह केवल औपचारिकता निभाई गई।
लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में ओवरब्रिज से गुजरना मुश्किल हो जाएगा। हर रोज हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं और गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
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बता दें कि जालौन, हमीरपुर और महोबा को जोड़ने वाला हमीरपुर-जोल्हूपुर मोड़ ओवरब्रिज सात साल बाद भी अधूरा है। 23 मार्च 2018 को 33 करोड़ चार लाख रुपये की लागत से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य था कि रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से निजात मिले और 100 से अधिक गांवों के लोग राहत महसूस करें। काम तीन साल में पूरा होना था, लेकिन सात साल बीत जाने पर भी अब तक केवल एक लेन ही चालू हो पाई है।
इसमें भी हैरानी की बात यह है कि यह लेन भी महज एक साल में जर्जर हो गई। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, लोहे की सरिया और किनारों के एंगल बाहर निकल आए हैं। यह स्थिति किसी 15 साल पुराने पुल जैसी लग रही है।
इलाकाई नागरिक भूपेंद्र, गजेंद्र, सप्पू, रविंद्र, भोले भगत और रमेश कढोरे आदि ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ। कई बार निरीक्षण में अधिकारियों ने फटकार भी लगाई, लेकिन सुधार नहीं हुआ। अब तक कई वाहन यहां से फिसलकर गिरे और बाइक सवार घायल चुके हैं।
एक लेन पूरी न होने के कारण दूसरी लेन पर दोनों ओर का ट्रैफिक चलता है। भारी वाहनों की आवाजाही से दिन में कई बार घंटों तक जाम लग जाता है। जिस सुविधा के लिए पुल का निर्माण हुआ, वह अभी भी सपना ही बनी हुई है। सेतु निगम ने छोटे वाहनों के लिए अंडरपास भी बनाया था लेकिन बरसात में उसमें 10-15 फीट पानी भर जाता है। निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण विभाग ने दोनों तरफ दीवार बनवाकर अंडरपास को बंद करा दिया।
रेलवे लाइन के नीचे से निकलने वाला वैकल्पिक मार्ग पहले से ही खराब है। बरसात में पूरी तरह डूब जाता है। ऐसे में लोगों के पास केवल यही अधूरा और जर्जर ओवरब्रिज बचता है। इससे रोजाना करीब एक लाख लोग मजबूरी में गुजरते हैं।
स्थानीय लोगों की बातचीत-
फोटो 3- दशरथ
स्थानीय निवासी दशरथ का कहना है कि जबसे यह ओवरब्रिज बना बना है, तभी से आधा गांव पानी से घिर जाता है। ओवरब्रिज बनने से बारिश का पानी कहीं निकल नहीं पाता है। गांव में बने हुए मकान के अगल-बगल पानी भरा रहता है। इससे मकानों में सीलन आ रही है।
फोटो 4- विवेक। संवाद
स्थानीय निवासी विवेक सिंह ने बताया कि अभी ओवरब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो सका है और जो एक लेन चालू की गई थी। उसमें भी जगह-जगह एंगल व सरिया निकल आए, जिसको स्थानीय प्रशासन द्वारा दो दिन पहले गड्ढे भरने और एंगल दबाने का काम किया गया था। अब वह दोबारा से निकल आए हैं, जिससे कभी भी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
वर्जन-
उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। सेतु विभाग के इंजीनियरों को भी तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। बहुत जल्द मरम्मत और शेष कार्य कराया जाएगा।
मनोज कुमार, एसडीएम, कालपी
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की यह खानापूरी बरसात की मार नहीं झेल सकी। मौके पर जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने निरीक्षण किया तो साफ दिखा कि जिन गड्ढों को भरवाया गया था, वह फिर से उखड़ चुके हैं और सरिया भी बाहर झांकने लगी हैं। इससे साफ है कि असल मरम्मत की जगह केवल औपचारिकता निभाई गई।
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लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में ओवरब्रिज से गुजरना मुश्किल हो जाएगा। हर रोज हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं और गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
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बता दें कि जालौन, हमीरपुर और महोबा को जोड़ने वाला हमीरपुर-जोल्हूपुर मोड़ ओवरब्रिज सात साल बाद भी अधूरा है। 23 मार्च 2018 को 33 करोड़ चार लाख रुपये की लागत से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य था कि रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से निजात मिले और 100 से अधिक गांवों के लोग राहत महसूस करें। काम तीन साल में पूरा होना था, लेकिन सात साल बीत जाने पर भी अब तक केवल एक लेन ही चालू हो पाई है।
इसमें भी हैरानी की बात यह है कि यह लेन भी महज एक साल में जर्जर हो गई। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, लोहे की सरिया और किनारों के एंगल बाहर निकल आए हैं। यह स्थिति किसी 15 साल पुराने पुल जैसी लग रही है।
इलाकाई नागरिक भूपेंद्र, गजेंद्र, सप्पू, रविंद्र, भोले भगत और रमेश कढोरे आदि ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ। कई बार निरीक्षण में अधिकारियों ने फटकार भी लगाई, लेकिन सुधार नहीं हुआ। अब तक कई वाहन यहां से फिसलकर गिरे और बाइक सवार घायल चुके हैं।
एक लेन पूरी न होने के कारण दूसरी लेन पर दोनों ओर का ट्रैफिक चलता है। भारी वाहनों की आवाजाही से दिन में कई बार घंटों तक जाम लग जाता है। जिस सुविधा के लिए पुल का निर्माण हुआ, वह अभी भी सपना ही बनी हुई है। सेतु निगम ने छोटे वाहनों के लिए अंडरपास भी बनाया था लेकिन बरसात में उसमें 10-15 फीट पानी भर जाता है। निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण विभाग ने दोनों तरफ दीवार बनवाकर अंडरपास को बंद करा दिया।
रेलवे लाइन के नीचे से निकलने वाला वैकल्पिक मार्ग पहले से ही खराब है। बरसात में पूरी तरह डूब जाता है। ऐसे में लोगों के पास केवल यही अधूरा और जर्जर ओवरब्रिज बचता है। इससे रोजाना करीब एक लाख लोग मजबूरी में गुजरते हैं।
स्थानीय लोगों की बातचीत-
फोटो 3- दशरथ
स्थानीय निवासी दशरथ का कहना है कि जबसे यह ओवरब्रिज बना बना है, तभी से आधा गांव पानी से घिर जाता है। ओवरब्रिज बनने से बारिश का पानी कहीं निकल नहीं पाता है। गांव में बने हुए मकान के अगल-बगल पानी भरा रहता है। इससे मकानों में सीलन आ रही है।
फोटो 4- विवेक। संवाद
स्थानीय निवासी विवेक सिंह ने बताया कि अभी ओवरब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो सका है और जो एक लेन चालू की गई थी। उसमें भी जगह-जगह एंगल व सरिया निकल आए, जिसको स्थानीय प्रशासन द्वारा दो दिन पहले गड्ढे भरने और एंगल दबाने का काम किया गया था। अब वह दोबारा से निकल आए हैं, जिससे कभी भी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
वर्जन-
उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। सेतु विभाग के इंजीनियरों को भी तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। बहुत जल्द मरम्मत और शेष कार्य कराया जाएगा।
मनोज कुमार, एसडीएम, कालपी