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कोरोना काल में परीक्षाएं न कराना ठीक निर्णय

Fri, 26 Jun 2020 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 12:36 AM IST
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Correct decision not to conduct examinations during Corona period
कुसुम। - फोटो : ORAI
उरई। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीएससी बोर्ड की एक जुलाई से लेकर 15 जुलाई के बीच होने वाली इंटरमीडिएट व हाईस्कूल परीक्षा को रद्द करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस फैसलों को लेकर जहां अभिभावक खुश है, तो वहीं स्कूल प्रबंधकों ने भी राहत की सांस ली है। प्रबंधकों का कहना है कि कोरोना महामारी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा न कराने का फैसला सुनाकर एकदम ठीक किया है। बच्चों के साथ साथ स्कूल स्टाफ को भी संक्रमण से बचाया जा सकेगा। वहीं अभिभावकों का कहना है कि अब ऐसी व्यवस्था और हो जाए कि किसी परीक्षार्थी के साथ नंबरों में अन्याय न हो, इसके लिए स्कूल प्रबंधन को भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बता दें कि कोर्ट ने परीक्षार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन की भी बात कही है। प्रस्तुत है, प्रबंधकों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया पर आधारित खबर
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फैसले से कम हुआ कोरोना का खतरा
अभिभावक कुसुम का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है। इस विषम परिस्थिति में लाखों बच्चों का एक साथ एक जगह एकत्रित होना भी ठीक नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले से परीक्षर्थियों को संक्रमण से बचाने का काम किया है।
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वाकई डराती है अनलॉक में भीड़
अभिभावक विवेक सक्सेना कहते हैं कि जुलाई में होने वाली परीक्षाओं को लेकर अभी से तैयारी शुरू करनी पड़ती है, ऐसे में परीक्षार्थियों को भी घरों से बाहर निकलना पड़ता। अनलाक में भीड़ की स्थिति देखकर ही संक्रमण फैलने का डर सा लगता है।
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किसी परीक्षार्थी के साथ गलत न होगा
उरई कालपी रोड स्थित गुरुकुलम स्कूल की डायरेक्टर श्रुति माहेश्वरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला वाकई परीक्षार्थियों और स्कूल प्रबंधन के हित में हैं। यदि आंतरिक मूल्यांकन स्कूलों पर छोड़ा गया तो किसी बच्चे के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

परीक्षाएं कराना आसान भी नहीं था
विनायक एकेडमी के संचालक दीपक कहते हैं कि शहर में तो नहीं लेकिन दिल्ली में तो कई बोर्ड के स्कूल ही क्वारंटीन सेंटर बने हैं, ऐसे वहां परीक्षार्थियों को बैठाना ठीक नहीं था। वैसे हर स्कूल में सामाजिक दूरी और सैनिटाइज के साथ परीक्षाएं सपन्न कराना भी आसान नहीं था। लिहाजा कोर्ट ने ठीक फैसला किया है।

श्रुति माहेश्वरी।

श्रुति माहेश्वरी।- फोटो : ORAI

दीपक सिंह।

दीपक सिंह।- फोटो : ORAI

डा.विवेक सक्सेना।

डा.विवेक सक्सेना।- फोटो : ORAI

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