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स्टेशन की दीवारं बताएंगी जिले का इतिहास
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उरई स्टेशन की बाहरी दीवारों पर की गई पेटिंग।
- फोटो : ORAI
उरई। गुटके की पीक से रंगी होने वाली रेलवे स्टेशनों की दीवारें अब नये रंगरूप में दिखाई देंगी। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर झांसी कानपुर रेल मार्ग के उरई, कालपी, पुखरायां और भीमसेन स्टेशन पर मधुबनी पेंटिंग बनाई जाएगी। इससे जहां रेलवे अच्छा होगा। साथ ही स्थानीय पुरातत्व स्थानों की भी पेंटिंग की जाएगी।
रेलवे स्टेशनों पर आने वाले यात्रियों और ट्रेनों से गुजरने वाले यात्रियों को स्टेशन की खासियत से परिचित करने और उस इलाके के प्राचीन धरोहरों के बारे में जानकारी देने के लिए सुंदरीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत स्टेशन की दीवारों को तरह-तरह की पेंटिंग से रंगा जाएगा। इसके लिए विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की जाएगी। शुरुआती दौर में मधुबनी पेंटिंग की कलाकृतियां स्टेशन के बाहरी दीवारों पर लगाई जाएगी। जबकि स्टेशन के अंदर की दीवारों में स्थानीय धरोहरों की पेंटिंग बनाने की योजना है। उरई स्टेशन पर काम भी शुरू हो गया है।
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प्राचीन धरोहरों की भी होगी पेंटिंग
उरई स्टेशन पर जिले के प्राचीन धरोहरों की पेंटिंग की जाएगी। इसके तहत रामपुरा का किला, जगम्मनपुर का किला, पचनदा स्थल, बैरागढ़ की शारदा माता, सैदनगर की मंदिर, सलाघाट और कोंच का बारहखंभा, नदीगांव का महल व स्थल पुरातत्व की पेंटिंग करने की योजना है। इसी तरह कालपी स्टेशन पर काली हवेली, बीरबल का महल, लंका मीनार, चौरासी गुंबद जैसे पुरातत्व स्थलों की पेटिंग होगी।
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प्रसिद्ध चित्रकार अजीत करेंगे मधुबनी पेंटिंग
स्टेशनों पर पेंटिंग बनाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता चित्रकार अजीत कुमार झा को दी गई है। चित्रकार अजीत को मधुबनी पेंटिंग के लिए 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अजीत बताते है कि उनकी टीम इन स्टेशनों पर मधुबनी पेंटिंग के साथ स्थानीय पेंटिंग भी करेंगी। यह काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल स्टेशन के बाहर की दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग की जा रही है। यह पेटिंग वाटरप्रूफ होगी।
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प्रयागराज और मेट्रो की तर्ज पर होगी पेटिंग
सीनियर सेक्शन इंजीनियर ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव बताते है कि प्रयागराज, वाराणसी जैसे बड़े स्टेशनों और मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर स्टेशनों को सजाने की योजना है। इसके लिए कई प्रकार की पेटिंग की जाएगी। इसमें मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों को लगाया गया है। इसके साथ उस स्टेशन के आसपास की प्राचीन धरोहरों को भी पेंटिंग के माध्यम से उकेरा जाएगा ताकि लोगों को धरोहरों की जानकारी हो सके।
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रेलवे स्टेशनों पर आने वाले यात्रियों और ट्रेनों से गुजरने वाले यात्रियों को स्टेशन की खासियत से परिचित करने और उस इलाके के प्राचीन धरोहरों के बारे में जानकारी देने के लिए सुंदरीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत स्टेशन की दीवारों को तरह-तरह की पेंटिंग से रंगा जाएगा। इसके लिए विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की जाएगी। शुरुआती दौर में मधुबनी पेंटिंग की कलाकृतियां स्टेशन के बाहरी दीवारों पर लगाई जाएगी। जबकि स्टेशन के अंदर की दीवारों में स्थानीय धरोहरों की पेंटिंग बनाने की योजना है। उरई स्टेशन पर काम भी शुरू हो गया है।
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प्राचीन धरोहरों की भी होगी पेंटिंग
उरई स्टेशन पर जिले के प्राचीन धरोहरों की पेंटिंग की जाएगी। इसके तहत रामपुरा का किला, जगम्मनपुर का किला, पचनदा स्थल, बैरागढ़ की शारदा माता, सैदनगर की मंदिर, सलाघाट और कोंच का बारहखंभा, नदीगांव का महल व स्थल पुरातत्व की पेंटिंग करने की योजना है। इसी तरह कालपी स्टेशन पर काली हवेली, बीरबल का महल, लंका मीनार, चौरासी गुंबद जैसे पुरातत्व स्थलों की पेटिंग होगी।
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प्रसिद्ध चित्रकार अजीत करेंगे मधुबनी पेंटिंग
स्टेशनों पर पेंटिंग बनाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता चित्रकार अजीत कुमार झा को दी गई है। चित्रकार अजीत को मधुबनी पेंटिंग के लिए 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अजीत बताते है कि उनकी टीम इन स्टेशनों पर मधुबनी पेंटिंग के साथ स्थानीय पेंटिंग भी करेंगी। यह काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल स्टेशन के बाहर की दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग की जा रही है। यह पेटिंग वाटरप्रूफ होगी।
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प्रयागराज और मेट्रो की तर्ज पर होगी पेटिंग
सीनियर सेक्शन इंजीनियर ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव बताते है कि प्रयागराज, वाराणसी जैसे बड़े स्टेशनों और मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर स्टेशनों को सजाने की योजना है। इसके लिए कई प्रकार की पेटिंग की जाएगी। इसमें मधुबनी पेंटिंग करने वाले कलाकारों को लगाया गया है। इसके साथ उस स्टेशन के आसपास की प्राचीन धरोहरों को भी पेंटिंग के माध्यम से उकेरा जाएगा ताकि लोगों को धरोहरों की जानकारी हो सके।