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भाजपा जिलाध्यक्ष का फैसला प्रदेश नेतृत्व करेगा
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Sun, 27 Dec 2015 11:14 PM IST
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भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष पद को लेकर मचा घमासान रविवार को नामांकन
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प्रक्रिया और पार्टी के जिम्मेदारों की ओर से प्रस्तुत की गई राय के साथ
थम गया। अब सभी की निगाहें पार्टी प्रदेश नेतृत्व के निर्णय पर आकर टिक गई
है। पार्टी जो फरमान सुनाएगी उसी पर यहां अमल किया जाएगा। चुनाव की
प्रक्रिया तो निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन के
मुताबिक ही शुरू हुई लेकिन नामांकन तक ही सिमट कर रह गई। जिलाध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। इन दावेदारों के बीच आम सहमति भी नहीं बन पाई और न मतदान कराया गया। इसके बाद तो कार्यकर्ता ही कहने लगे जब मनोनीत ही किया जाना है तो फिर चुनाव कराने की बात बेमानी सी है। भाजपा जिलाध्यक्ष पद लिए
रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर में दावेदारों ने नामांकन दाखिल किए। सबसे पहले कार्यकारी जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल, जिला महामंत्री नागेंद्र गुप्ता, पूर्व युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष दिलीप दुबे, पूर्व महामंत्री अनिल बहुगुणा, पूर्व उपाध्यक्ष अवध शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद चौहान, पूर्व उपाध्यक्ष कैलाश स्वरूप बाजपेयी, सोनपाल शर्मा, पूर्व जिला महामंत्री रामेंद्र सिंह, बृजभूषण
कुशवाहा ने नामांकन पत्र खरीदे। इसके बाद आम सहमति को लेकर पार्टी के वरिष्ठ जनों की ओर से प्रयास किया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हालांकि नामांकन खरीदने वाले 10 दावेदारों में से चार ने नामांकन जमा किए। जिला चुनाव अधिकारी बृजेंद्र राय के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 11:30 बजे से शुरू हुई। सबसे पहले फार्मों की बिक्री हुई इसके बाद दोपहर
बाद एक बजे तक नामांकन जमा किए गए। इस दौरान प्रत्याशियों ने चुनाव अधिकारी के समक्ष समर्थक व प्रस्तावक के साथ नामांकन किया। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया कराई जानी थी लेकिन इसमें सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ व अधिकृत लोगों से राय ही ली गई। एक-एक कर सभी ने अपने चहेते उम्मीदवार के नाम पर राय दी तो, इसमें कुछ ने तो एक ही नाम
लिया तो वहीं कुछ ने दो और तीन नामों पर अपना पक्ष रखा। इस दौरान गहमा गहमी का माहौल रहा। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह जादौन, जगदीश तिवारी, पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर, पूर्व महामंत्री भगवान दास त्रिपाठी, जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह सेंगर, प्रदेश मंत्री जेपी गौतम, जिला प्रतिनिधि हरेंद्र विक्रम सिंह, अभय द्विेदी, क्रमांक शुक्ला, सुशील पारासर, अजय नायक, राजा गधेला, धर्मेद्र शिवहरे, अमित निरंजन, रामजी राजपूत, सुधीर त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
आखिर किसके सिर सजेगा ताज
भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी, ये चर्चा चुनाव के दौरान पूरे समय रही। कोई एक राय नहीं था। युवाओं की पहली पंसद उदयन पालीवाल और नागेंदर गुप्ता थे तो वहीं पर कुछ वरिष्ठों की राय अनिल बहुगुणा व दिलीप दुबे के नाम की रही। ज्यादातर ने कहा कि पार्टी को संगठित कर चलाने वाला नेतृत्व चाहिए। चुनाव कराया जाता तो यह स्पष्ट
भी हो जाता लेकिन अब निर्णय तो प्रदेश नेतृत्व को लेना है। हालांकि राय के मुताबिक निर्णय लिया गया तो फिर इस बार वरिष्ठ नहीं युवा के कंधे पर पार्टी का बोझ आ जाएगा। चर्चाओं की माने तो उदयन पालीवाल व नागेंद्र गुप्ता को ही कमान मिलने की संभावना है। हालांकि इसमें एक का नामांकन खारिज होने की संभावना भी जताई जा रही है। माना जा रहा है
कि एक प्रत्याशी का समर्थक समय पर नहीं पहुंच सका। जिला चुनाव अधिकारी पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखे रहे। वह अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेंगे।
निर्णय से खुश नहीं हैं कार्यकर्ता
जिला चुनाव अधिकारी बृजेंद्र राय के कई निर्णयों का पार्टी कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान में विरोध किया। कुठौंद में तो कार्यकर्ता इस विषय को लेकर बैठक भी कर चुके है। मंडल अध्यक्ष व नगर अध्यक्ष के नामों के चयन को लेकर भी कार्यकर्ता खुश नहीं है।
विरोध करने वाले बने पदाधिकारी
भाजपा को अनुशासित पार्टी के रूप में पहचाना जाता है लेकिन संगठन के इस चुनाव में उन लोगों के सिर भी जिम्मेदारी दी गई जो हाल में ही हुए जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में पार्टी के निर्णय की खिलाफत कर चुके है। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे पद दे दिए जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जिला चुनाव अधिकारी बृजेंदर राय ने इस बात को स्वीकार भी किया कि कुछ निर्णय न चाहते हुए भी लेने पड़ते हैं।
रमेश उपाध्याय की मौजूदगी की चर्चा
भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए हुए नामांकन और फिर कार्यकर्ताओं की राय के समय पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रमेश उपाध्याय का मौजूद रहना चर्चा का विषय रहा। वह जिलाध्यक्ष पद प्रत्याशी दिलीप दुबे के साथ बैठे रहे। कहा गया कि रमेश उपाध्याय लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विजय चौधरी के चुनाव प्रंबधन टीम के प्रमुख सदस्य रहे। इसके पहले वह
कालपी क्षेत्र में बसपा के विधायक छोटे सिंह के करीबी रहे और चुनाव में भी साथ रहे थे। आज पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें यहां पर देखा तो असमंजस में पड़ गए। कुछ वरिष्ठों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी में सर्वदलीय नेताओं की टीम खड़ी हो रही है।
मुताबिक ही शुरू हुई लेकिन नामांकन तक ही सिमट कर रह गई। जिलाध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। इन दावेदारों के बीच आम सहमति भी नहीं बन पाई और न मतदान कराया गया। इसके बाद तो कार्यकर्ता ही कहने लगे जब मनोनीत ही किया जाना है तो फिर चुनाव कराने की बात बेमानी सी है। भाजपा जिलाध्यक्ष पद लिए
रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर में दावेदारों ने नामांकन दाखिल किए। सबसे पहले कार्यकारी जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल, जिला महामंत्री नागेंद्र गुप्ता, पूर्व युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष दिलीप दुबे, पूर्व महामंत्री अनिल बहुगुणा, पूर्व उपाध्यक्ष अवध शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद चौहान, पूर्व उपाध्यक्ष कैलाश स्वरूप बाजपेयी, सोनपाल शर्मा, पूर्व जिला महामंत्री रामेंद्र सिंह, बृजभूषण
कुशवाहा ने नामांकन पत्र खरीदे। इसके बाद आम सहमति को लेकर पार्टी के वरिष्ठ जनों की ओर से प्रयास किया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हालांकि नामांकन खरीदने वाले 10 दावेदारों में से चार ने नामांकन जमा किए। जिला चुनाव अधिकारी बृजेंद्र राय के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 11:30 बजे से शुरू हुई। सबसे पहले फार्मों की बिक्री हुई इसके बाद दोपहर
बाद एक बजे तक नामांकन जमा किए गए। इस दौरान प्रत्याशियों ने चुनाव अधिकारी के समक्ष समर्थक व प्रस्तावक के साथ नामांकन किया। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया कराई जानी थी लेकिन इसमें सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ व अधिकृत लोगों से राय ही ली गई। एक-एक कर सभी ने अपने चहेते उम्मीदवार के नाम पर राय दी तो, इसमें कुछ ने तो एक ही नाम
लिया तो वहीं कुछ ने दो और तीन नामों पर अपना पक्ष रखा। इस दौरान गहमा गहमी का माहौल रहा। पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह जादौन, जगदीश तिवारी, पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर, पूर्व महामंत्री भगवान दास त्रिपाठी, जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह सेंगर, प्रदेश मंत्री जेपी गौतम, जिला प्रतिनिधि हरेंद्र विक्रम सिंह, अभय द्विेदी, क्रमांक शुक्ला, सुशील पारासर, अजय नायक, राजा गधेला, धर्मेद्र शिवहरे, अमित निरंजन, रामजी राजपूत, सुधीर त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
आखिर किसके सिर सजेगा ताज
भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी, ये चर्चा चुनाव के दौरान पूरे समय रही। कोई एक राय नहीं था। युवाओं की पहली पंसद उदयन पालीवाल और नागेंदर गुप्ता थे तो वहीं पर कुछ वरिष्ठों की राय अनिल बहुगुणा व दिलीप दुबे के नाम की रही। ज्यादातर ने कहा कि पार्टी को संगठित कर चलाने वाला नेतृत्व चाहिए। चुनाव कराया जाता तो यह स्पष्ट
भी हो जाता लेकिन अब निर्णय तो प्रदेश नेतृत्व को लेना है। हालांकि राय के मुताबिक निर्णय लिया गया तो फिर इस बार वरिष्ठ नहीं युवा के कंधे पर पार्टी का बोझ आ जाएगा। चर्चाओं की माने तो उदयन पालीवाल व नागेंद्र गुप्ता को ही कमान मिलने की संभावना है। हालांकि इसमें एक का नामांकन खारिज होने की संभावना भी जताई जा रही है। माना जा रहा है
कि एक प्रत्याशी का समर्थक समय पर नहीं पहुंच सका। जिला चुनाव अधिकारी पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखे रहे। वह अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेंगे।
निर्णय से खुश नहीं हैं कार्यकर्ता
जिला चुनाव अधिकारी बृजेंद्र राय के कई निर्णयों का पार्टी कार्यकर्ताओं ने दबी जुबान में विरोध किया। कुठौंद में तो कार्यकर्ता इस विषय को लेकर बैठक भी कर चुके है। मंडल अध्यक्ष व नगर अध्यक्ष के नामों के चयन को लेकर भी कार्यकर्ता खुश नहीं है।
विरोध करने वाले बने पदाधिकारी
भाजपा को अनुशासित पार्टी के रूप में पहचाना जाता है लेकिन संगठन के इस चुनाव में उन लोगों के सिर भी जिम्मेदारी दी गई जो हाल में ही हुए जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में पार्टी के निर्णय की खिलाफत कर चुके है। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे पद दे दिए जाने से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जिला चुनाव अधिकारी बृजेंदर राय ने इस बात को स्वीकार भी किया कि कुछ निर्णय न चाहते हुए भी लेने पड़ते हैं।
रमेश उपाध्याय की मौजूदगी की चर्चा
भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए हुए नामांकन और फिर कार्यकर्ताओं की राय के समय पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रमेश उपाध्याय का मौजूद रहना चर्चा का विषय रहा। वह जिलाध्यक्ष पद प्रत्याशी दिलीप दुबे के साथ बैठे रहे। कहा गया कि रमेश उपाध्याय लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विजय चौधरी के चुनाव प्रंबधन टीम के प्रमुख सदस्य रहे। इसके पहले वह
कालपी क्षेत्र में बसपा के विधायक छोटे सिंह के करीबी रहे और चुनाव में भी साथ रहे थे। आज पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें यहां पर देखा तो असमंजस में पड़ गए। कुछ वरिष्ठों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी में सर्वदलीय नेताओं की टीम खड़ी हो रही है।