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Jalaun News: फसलों पर हुई अमृत वर्षा, किसानों के चेहरे मुस्कुराए

Fri, 01 Dec 2023 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Dec 2023 12:00 AM IST
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Amrit rain fell on the crops, farmers' faces smiled
उरई/कालपी/आटा/मोहम्मदाबाद। गुरुवार की बारिश फसलों के लिए अमृत वर्षा साबित हुई।
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उरई शहर में करीब 14 एमएम, जबकि पूरे जिले में अनुमानित 30 एमएम (मिलीमीटर) बारिश हुई। इस बारिश ने सबसे ज्यादा फायदा मटर और दलहनी की फसलों को पहुंचाया।
इल्ली के खतरों से बचाने के लिए बारिश सुरक्षा कवच बनकर आई तो वहीं सूखती दलहनी फसलों में बारिश से निखार आने की संभावना बढ़ी। यही नहीं जिन्होंने गेहूं की बुआई कर दी है, उनके लिए भी ये बारिश फायदेमंद साबित होगी।
जनपद में ढाई लाख से ज्यादा किसान हैं। सबसे ज्यादा मटर की फसल पर किसान काम करते हैं। कृषि विभाग के अनुसार करीब एक लाख हेक्टेअर में किसानों ने मटर की फसल की है। धूप तेज होने की वजह से इल्ली के हमलों से ये फसल असुरक्षित हो गई थी। कालपी और अन्य कई क्षेत्रों में किसानों की काफी फसल इल्ली (एक प्रकार का कीट) के कारण बर्बाद हो रही थी। यही नहीं कई क्षेत्रों में नलकूप की व्यवस्था नहीं है और जहां नहर हैं, उनके सूखे होने से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा था।
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ऐसे क्षेत्रों में दलहनी फसलों के सूखने का खतरा बन गया था। दलहनी फसलें करीब 80 हेक्टेअर में किसानों ने की हैं। इसके अलावा एक लाख हेक्टेअर से ज्यादा किसान सीधे गेहूं की बुआई करते हैं, जबकि 40 हजार के करीब किसान मटर उखाड़कर गेहूं की बुआई करते हैं। जिन्होंने बुआई कर ली, उनके लिए भी ये बारिश रामबाण साबित होगी।
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जिन किसानों ने अभी गेहूं की बुआई नहीं की है, उन्हें अब कम से कम आठ दिन और रुकना पड़ेगा। कृषि विभाग के अनुसार इस बारिश से उन्हें ये देरी होगी। जमीन सूखने के बाद ही वे गेहूं की बुआई कर सकेंगे। यदि फिर बारिश होती है तो बुआई का समय और बढ़ जाएगा।


मुहम्मदाबाद निवासी किसान ब्रगभान का कहना है कि फसलों में जिन्सवारा करने के लिए किसान प्राइवेट ट्यूबवेलों से 500 से 600 रुपए प्रति बीघा के हिसाब से पानी लेकर जिन्सवारा कर रहे थे, बुधवार रात से शुरू हुई बारिश ने किसानों के सिंचाई पर हो रहे हजारों रुपयों का खर्च बचा दिया है।
मुहम्मदाबाद निवासी किसान अजीज खां का कहना है कि पांच बीघा में अर्किल मटर लगाया है। हल्की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर वर्षा कराने के लिए तैयारी कर रहे थे। तीन दिनों से बादलों का रुख देख रुकना लाभदायक रहा। बुधवार की रात बारिश हो गई और सिंचाई खर्च बच गया है।


आटा निवासी किसान अखिल तिवारी ने बताया कि 40 बीघा खेत में मटर बोई थी, फसल उगकर तैयार है। उसमें स्प्रिंगलर वर्षा कराने की योजना बना रहे थे। करीब 30 से 35 हजार रुपये खर्च होते, लेकिन बरसात से राहत मिल गई।

आटा के किसान राजू पाल ने बताया कि रबी की फसलों को नुकसान हो रहा था। फसलें पहले फूल देने लगी थीं। बारिश होने से इन फसलों को कालपी। बुधवार की देर रात एक बजे झमाझम बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई। नगर के कई मोहल्ले जलमग्न हो गए। गलियों में बारिश का पानी भरने की बड़ी वजह, नालियों और नालों में फंसा कचरा रहा। पानी की निकासी न होने से गलियों में पानी भरा रहा। लोगों को असुविधा हुई। शहर में सबसे ज्यादा समस्या टरननगंज बाजार में दिक्कतें रहीं। पचपिंडा देवी मंदिर के पास प्रमुख नाला जाम हो गया। मनीगंज में भी गलियों का पानी गलियों में आ गया। टरननगंज सब्जी दुकानों के सामने तालाब जैसे नजारा हो गया। सफाई निरीक्षक सुनील कुमार राजपूत ने बताया नाले में गेस्टहाउस का कचरा आया, इससे दिक्कत हुई।

कदौरा। ब्लॉक में 47 गोशालाएं हैं, लेकिन कई गोशालाएं ऐसी हैं, जहां इन बेजुबानों के लिए ठंड और बारिश से सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। बरसात को देखते हुए पड़ताल की तो यह सच्चाई कई गोशालाओं में सामने आईं।
पड़ताल में कुशमरा बावनी में गोवंश कीचड़ में खड़े नजर आए। केयर टेकर सहित कर्मी गायब थे। खुटमिली गोशाला में 52 गोवंश हैं, जो बारिश से भीग रहे थे। यहां पर भी केयर टेकर गायब थे। रैला गांव की गोशाला में 102 गोवंश संरक्षित हैं, लेकिन ठंड और बारिश से बचाव के इंतजाम नहीं मिले। यही हालत क्षेत्र की मरगांया, जमरेही, चतेला, पथरेहटा, मटरा, कुरहना आलमगीर सहित अन्य गांवों की गोशालाओं के हैं।
बीडीओ मानूलाल यादव ने बताया कि वह लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांच रहे हैं। इन गोशालाओं को लेकर जवाब लिया जाएगा।

उरई। शहरवासियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए जो डीसीसीसी यानि कंट्रोल सेंटर नगर पालिका में स्थापित किया गया, वह सिर्फ कागजों में समाधान कर रहा है। धरातल पर कोई निस्तारण नजर नहीं आ रहा है। इससे सरकार की इस योजना का लोगों को कोई सहूलियत या लाभ नहीं मिल रहा है।
पालिका में पानी, साफ-सफाई, प्रकाश की व्यवस्था के लिए पालिका में डेडिकेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (डीसीसीसी) संचालित है। निशुल्क नंबर पर कॉल करके समस्या दर्ज करवा सकते हैं। गुरुवार की सुबह हल्की बूंदाबांदी के साथ जमकर बारिश हुई। गंदगी, जलभराव, सड़कों पर नालियों का गंदा पानी आदि की समस्याएं हुईं। सबसे ज्यादा परेशानी पटेल नगर, जेल रोड, कादरी कॉलोनी, उमरारखेरा, पाठकपुरा, इंदिरा नगर, सुशील नगर सहित कई जगह पर ये दिक्कतें आईं। पीड़ित शहरियों ने जब कॉल की तो रिसीव नहीं हुई। काफी देर बाद जब रिसीव हुई तो शिकायत का समाधान नहीं हुआ। कुछ को समाधान हो जाने की बात कही, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं मिला।

नया पटेल नगर निवासी मिथुन ने बताया कि बारिश से प्लॉट के आसपास और सड़क पर कई जगह पर पानी भर गया था। पैदल भी नहीं निकल पा रहे हैं। समाधान के लिए डीसीसीसी पर कॉल की तो नहीं लगी।


रामकुंड निवासी इसरार बेग ने बताया कि नाला गंदगी से पटा पड़ा है। बारिश से गंदगी उनके घर के पास आ गई। शिकायत के लिए पालिका में लिखित शिकायत की। समाधान नहीं हुआ। कॉल की तो रिसीव नहीं की गई।

ईओ विमलापति ने बताया कि जिसकी शिकायत आती है। उसका समाधान होता है। अगर कहीं समस्या है तो उसका समाधान होगा। जांच करवाएंगे।

उरई। गुरुवार को हुई बारिश और ठंडी हवा चलने से तापमान लुढ़ककर 24 और रात में 16 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। रेलवे स्टेशन के बाहर यात्रियों को गरम कपड़ों से ठंड से बचाव करना पड़ा।
स्टेशन के बाहर लोग ठिठुरते दिखे। बुधवार की देर रात करीब एक बजे से बारिश हुई और फिर रुक-रुक कर कई बार झमाझम बारिश से मौसम ठंडा हो गया। रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर लोग ठंड से बचाव करते दिखे। बस और ट्रेन में बैठे यात्रियों ने सफर शीशा बंद कर किया। कई बसों में साइड शीशे ठीक नहीं होने से दिक्कतें हुईं।

उरई। बारिश के साथ बढ़ी ठंड ने लोगों को बीमार कर दिया। सबसे ज्यादा दिक्कतें बच्चों और बुजुर्गों को हुईं। जिला अस्पताल की ओपीडी का आंकड़ा 1,200 के करीब पहुंचा। इसमें 25 फीसदी से ज्यादा मरीज सर्दी के कारण बीमार हुए आए।



गुरुवार को बारिश की वजह से मौसम ठंडा रहा। ठंडी हवाएं चलने से स्थिति पहले के मुकाबले ज्यादा परेशान करने वाली रही। जिला अस्पताल में गुरुवार को 1,166 मरीज पहुंचे। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन की ओपीडी में 336 मरीजों ने चेकअप कराया। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा था। बच्चों को जुकाम और खांसी की समस्या रही।

वहीं, बुजुर्गों को भी इस समस्या के साथ शरीर में दर्द की दिक्कत रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि मौसम बदल गया है। जरूरी है कि बच्चों को ऊनी टोपी लगाएं, कान ढकें। स्वेटर जैकेट पहनाएं। छोटे बच्चों की मालिस जरूर करें। उन्हें ठंडी हवा से बचाएं। डॉ. कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि बुजुर्ग ठंडी हवा से बचें।
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