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एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल, मरीज हुए परेशान
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चक्का जाम के दौरान चुर्खी बाईपास पर खड़ी एंबुलेंस।
- फोटो : ORAI
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उरई। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) सेवा में तैनात कर्मचारियों को कंपनी बदले जाने पर हटाने और वेतन कटौती के विरोध में एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर एंबुलेंस कर्मचारियों ने सोमवार से चक्का जाम किया। उन्होंने शहर स्थित मेडिकल कालेज के पास स्थित तिराहे पर मांगों को लेकर नारेबाजी की। चेतावनी दी कि मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 108 व 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों के काम न करने से मरीजों को परेशानी हुई। मरीज प्राइवेट वाहनों से अस्पताल आए और घर गए।
संघ जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी में अग्रणी भूमिका निभाने वाले एंबुलेंस स्टाफ को परेशान किया जा रहा है। उनके वेतन में कटौती की जा रही है। एएलएस सेवा के लिए नई कंपनी को सरकार ने जिम्मेदारी दी है। नई कंपनी पुराने स्टाफ को हटा रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ सोमवार से बेमियादी चक्का जाम आंदोलन शुरू कर दिया
गया है। धीरसिंह, रोहित, मनीष, धर्मेंद्र, अंजू वर्मा, अजय, गौरव तिवारी, अनिल, रामजी, बलवीर, नीरज भी मौजूद रहे। बता दें कि 102 व 108 सेवा की जिले में 48 एंबुलेंस है। जो हड़ताल पर रहीं। एएलएस की चार एंबुलेंस सेवाएं देती रही। हालांकि यह एंबुलेंस गंभीर मरीजों को जिले से बाहर इलाज मुहैया कराने का काम करती है। महिला अस्पताल की नर्सिंग स्टाफ की इंचार्ज माया पाल का कहना है कि सोमवार को दस महिलाओं को डिस्चार्ज किया गया। एंबुलेंस न मिलने के कारण सभी यहीं बैठी है।
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प्राइवेट गाड़ी से इलाज कराने आए
सुरहती के रामबाबू बताते है कि उन्होंने बेटी के पेट का आपरेशन कराया था। दिक्कत होने पर एंबुलेंस को फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब परेशान होकर 12 सौ रुपये में प्राइवेट गाड़ी ली और बेटी को अस्पताल लेकर आए।
हड़ताल समाप्त होने का इंतजार
चुर्खी के नादई गांव निवासी राखी को प्रसव के बाद सोमवार को घर जाने की छुट्टी मिल गई। वह सुबह से बैठी रहीं, लेकिन घर जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल रही थी। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि शायद हड़ताल समाप्त हो जाए तो एंबुलेंस मिल जाएगी और सुरक्षित घर चले जाएंगे।
प्राइवेट गाड़ी वालों ने मनमाना किराया वसूला
औरेखी की मोहिनी को भी प्रसव के बाद छुट्टी मिल गई। उनका कहना है कि जब उन्हें पता चला कि एंबुलेंस स्टाफ हड़ताल पर है तो उन्होंने परिचित से किराये की गाड़ी के बारे में पूछा तो पता चला कि गाड़ी वाला 1500 रुपये मांग रहा है। उनके पास इतने पैसे का इंतजाम नहीं है। परेशान हैं।
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संघ जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी में अग्रणी भूमिका निभाने वाले एंबुलेंस स्टाफ को परेशान किया जा रहा है। उनके वेतन में कटौती की जा रही है। एएलएस सेवा के लिए नई कंपनी को सरकार ने जिम्मेदारी दी है। नई कंपनी पुराने स्टाफ को हटा रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ सोमवार से बेमियादी चक्का जाम आंदोलन शुरू कर दिया
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गया है। धीरसिंह, रोहित, मनीष, धर्मेंद्र, अंजू वर्मा, अजय, गौरव तिवारी, अनिल, रामजी, बलवीर, नीरज भी मौजूद रहे। बता दें कि 102 व 108 सेवा की जिले में 48 एंबुलेंस है। जो हड़ताल पर रहीं। एएलएस की चार एंबुलेंस सेवाएं देती रही। हालांकि यह एंबुलेंस गंभीर मरीजों को जिले से बाहर इलाज मुहैया कराने का काम करती है। महिला अस्पताल की नर्सिंग स्टाफ की इंचार्ज माया पाल का कहना है कि सोमवार को दस महिलाओं को डिस्चार्ज किया गया। एंबुलेंस न मिलने के कारण सभी यहीं बैठी है।
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प्राइवेट गाड़ी से इलाज कराने आए
सुरहती के रामबाबू बताते है कि उन्होंने बेटी के पेट का आपरेशन कराया था। दिक्कत होने पर एंबुलेंस को फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब परेशान होकर 12 सौ रुपये में प्राइवेट गाड़ी ली और बेटी को अस्पताल लेकर आए।
हड़ताल समाप्त होने का इंतजार
चुर्खी के नादई गांव निवासी राखी को प्रसव के बाद सोमवार को घर जाने की छुट्टी मिल गई। वह सुबह से बैठी रहीं, लेकिन घर जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल रही थी। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि शायद हड़ताल समाप्त हो जाए तो एंबुलेंस मिल जाएगी और सुरक्षित घर चले जाएंगे।
प्राइवेट गाड़ी वालों ने मनमाना किराया वसूला
औरेखी की मोहिनी को भी प्रसव के बाद छुट्टी मिल गई। उनका कहना है कि जब उन्हें पता चला कि एंबुलेंस स्टाफ हड़ताल पर है तो उन्होंने परिचित से किराये की गाड़ी के बारे में पूछा तो पता चला कि गाड़ी वाला 1500 रुपये मांग रहा है। उनके पास इतने पैसे का इंतजाम नहीं है। परेशान हैं।

ुर्खी बाईपास पर सड़क पर खड़े होकर नारेबाजी करते एंबुलेंस कर्मचारी।- फोटो : ORAI

ेडिकल कालेज तिराहे पर धरना देकर नारेबाजी करते एंबुलेंस कर्मचारी।- फोटो : ORAI