फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   After struggling for three hours, they finally reached the counter and returned with only half of the medicines.

Jalaun News: तीन घंटे की जद्दोजहद कर काउंटर पर पहुंचे और आधी दवाएं लेकर लौटे

Sat, 20 Dec 2025 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Dec 2025 12:18 AM IST
विज्ञापन
After struggling for three hours, they finally reached the counter and returned with only half of the medicines.
उरई। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को काउंटर पर पर्याप्त दवाएं नहीं मिल रही हैं। हर पर्चे में एक-दो दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों का कहना है कि मुफ्त इलाज के लिए यहां आते हैं, लेकिन यहां तो प्राइवेट जैसा हाल है। तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद जब काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां दवाएं नहीं मिलती है, मजबूरी में बाहर से खरीदनी पड़ रही है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि उनके पास सभी दवाएं उपलब्ध हैं।
विज्ञापन


कालपी रोड स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब दो हजार मरीज अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं। मरीज घर से सोचकर आते हैं कि एक रुपये का पर्चा बनवाकर वह इलाज करवा लेंगे और घर चले जाएंगे, लेकिन डॉक्टर को दिखवाने के बाद जब वह दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें पर्याप्त दवाएं नहीं मिलती हैं। हालत यह है कि पांच दवाओं में दो से तीन दवाएं नहीं मिल रहीं हैं।
विज्ञापन

राजेंद्र नगर निवासी शिवपाल ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में पत्नी को पेट संबंधी समस्या होने पर दिखवाने आए थे, यहां वह नौ बजे पहुंच गए और करीब एक घंटे बाद उनका पर्चा बन पाया। इसके बाद डॉक्टर के पास पहुंचे तो वहां भी लाइन लगानी पड़ी है। तीन घंटे बाद जब वह लाइन में लगकर पहुंचे तो पांच दवाओं में दो नहीं मिलीं। इससे उन्हें मजबूरी में बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेगी


दादी को समस्या होने पर वह उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज आए थे। काउंटर पर पहुंचे तो दो दवाएं नहीं मिली हैं। उन्हें बाहर से लेना पड़ रहा है। जनऔषधि केंद्र पर भी गए थे, लेकिन वहां भी यह दवाएं नहीं मिली हैं।

- संतोष, कालपी





बेटी अमायरा के बीमार होने पर उसे लेकर मेडिकल कॉलेज आए थे। डॉक्टर ने बेटी को देखने के बाद चार दवाएं लिखीं, लेकिन अंदर केवल दो मिली हैं। मजबूरी में बाहर से दवाएं लेनी पड़ेगी। वह कर भी क्या सकते हैं। - राहुल, आटा



वर्जन


मेडिकल कॉलेज में करीब 300 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। सभी को दवाएं दी भी जा रहीं हैं। अगर दवा नहीं मिल रही है, तो मरीज उन्हें बता सकते हैं।

डॉ. अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed