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खेल को जुनून बनाकर पाई सफलता

Sun, 30 Aug 2020 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 12:36 AM IST
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Achieved success by making sports a passion
कमलदीप। - फोटो : ORAI
उरई। कहते हैं कि जीवन कोई खेल नहीं है पर यदि खेल को ही हुनर बना लिया जाए तो जीवन संवर जरूर सकता है। खेल दिवस के मौके पर बताते हैं कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में जिनके लिए खेल ही उनका जुनून था और खेलते खेलते ही वे सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचते चले गए, भले ही अब वे लोग खेल के मैदान से काफी दूर हो, फिर भी उन्हें यह अहसास है कि आज वे जहां हैं अपने खेल की बदौलत ही है। ऐसे सभी पूर्व खिलाड़ी युवाओं को प्रेरित करते हैं कि जिस किसी भी खेल चाहे किक्रेट, फुटबाल, हाकी या फिक एथलेक्टिस क्यो न हो, दिल से और जी जान लगाकर खेल एक न एक दिन सफलता जरुर मिलती है। प्रस्तुत है खेल दिवस के मौके पर ऐसे ही कुछ खिलाडियों के बारे में तैयार रिपोर्ट-
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190 किमी.प्रति घंटा थी पावर किक
कालपी निवासी अखिल जेतली फुटबाल के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने स्पोर्ट्स कालेज लखनऊ में पढ़ाई के दौरान जूनियर एवं सब जूनियर प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग किया। उनकी पावर किक की स्पीड 190 किलोमीटर प्रति घंटा नापी गई थी। जेतली यूनीवर्सिटी टीम के कैप्टन रहने के अलावा 1983 से 1987 तक पांच बार इंटर यूनीवर्सिटी टीम का हिस्सा भी रहे। वर्ष 1991 में वह कालपी कालेज, कालपी में समाजशास्त्र विषय में प्रवक्ता पद पर कार्यरत हुए। इसके बाद भी वे यूनिवर्सिटी की ओर से फुटबाल खेलते रहे।
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कभी क्रिकेट था हुनर, अब जीएम बन गए
शहर के पटेल स्पोर्ट्स क्लब के बल्लेबाज रहे सतीश पालीवाल ने उरई शहर का नाम रोशन किया। साल 2002 में जब उनका बल्ला रन उगल रहा था, तभी उन्होंने एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया तो एजूकेशन कम उनके खेल को अधिक महत्व देते हुए उन्हें पहली नौकरी मिली। इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा और इस वक्त वह मेट्रो पोलिस हेल्थ केयर लिमिटेड गुजरात एवं राजस्थान में जनरल मैनेजर के रुप में काम कर रहे हैं।
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प्राइवेट ही सही क्रिकेट ने दिलाई जाब
जिले के होनहार क्रिकेटर कमलदीप ने वर्ष 2005 में जब उरई से लखनऊ शिफ्ट किया तो उनकी किस्मत ने उनका खूब साथ दिया। खेल के कारण ही इस समय वह एयर ट्रेवल एजेंसी मेक माई ट्रिप में इंडिया हैड बनकर कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कमलदीप जिले के आलराउंडर खिलाड़ी रहे है। उन्होंने बैटिंग, फील्डिंग और बोलिंग में अपने बलबूते पर कई बार टीम को जीत दिलाई। उनके मैच देखने को खेलप्रेमियों में उत्सुकता रहती थी।

टीम की कमान संभाली, पाया सीएम से सम्मान
रामपुरा के बीहड़ क्षेत्र महूटा निवासी विपिन द्विवेदी राष्ट्रीय खेलों में यूपी एथलेटिक्स टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एनसीसी की पढ़ाई के दौरान वर्ष 2015-16 में मुख्यमंत्री पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। विपिन बताते है कि वर्ष 2017 में आर्मी में उसका चयन हो गया था लेकिन सिविल की जाब के चलते उन्होंने सेना की नौकरी नहीं की। आल इंडिया यूनीवर्सिटी चैंपयिनशिप में उसने गोल्ड मेडल जीता है। उसका कहना है कि वह पढ़ाई समाप्त करने के बाद कोच बन जाएंगे। वह जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना चाहते हैं।

विपिन द्विवेदी।

विपिन द्विवेदी।- फोटो : ORAI

अखिल जेतली।

अखिल जेतली।- फोटो : ORAI

सतीश पालीवाल।

सतीश पालीवाल।- फोटो : ORAI

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