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Jalaun News: एक हादसे ने छीन ली तीन परिवारों की दुनिया

Fri, 26 Jun 2026 11:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 11:58 PM IST
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A single accident shattered the worlds of three families.
फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन। - फोटो : 1
उरई। कोटरा कस्बे में शुक्रवार की सुबह सूरज तो रोज की तरह निकला, लेकिन तीन घरों में अंधेरा छोड़ गया। जिन बेटों के लौटने का इंतजार मांएं रातभर करती रहीं, उनकी मौत की खबर घर पहुंची। देखते ही देखते खुशियों से भरे आंगन चीख-पुकार से गूंज उठे। मुहर्रम का जलसा देखने गए तीन युवक घर तो लौटे, लेकिन कफन में लिपटकर।
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एट से ताजिया और छड़ देखकर लौट रहे अरबाज शाह, सोराब खान और बरकत शाह उर्फ अनीस को क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा। रात करीब दो बजे कोटरा पहुंचने से कुछ ही पहले तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को रौंद दिया। सड़क पर बिखरे खून के निशान और टूटी बाइक इस बात की गवाही दे रहे थे कि मौत कितनी बेरहमी से आई थी।
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सबसे दर्दनाक दृश्य उन घरों में था, जहां मांएं रातभर दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठी थीं। किसी को उम्मीद थी कि बेटा आते ही खाना मांगेगा, कोई सोच रही थी कि सुबह उठकर काम पर जाएगा। लेकिन कुछ ही देर बाद घरों में पुलिस पहुंची और फिर जो हुआ, उसे देखकर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो जाएं।
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अरबाज शाह दो भाई थे। वह बाइक मिस्त्री था और मेहनत करके अपने परिवार के सपनों को पूरा करना चाहता था। उसके हाथों में हुनर था और आंखों में भविष्य के सपने। लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।

सोराब खान भी बाइक मिस्त्री था। कस्बे में लोग दोनों दोस्तों की मिसाल देते थे। अरबाज और सोराब की दोस्ती ऐसी थी कि अक्सर दोनों साथ दिखाई देते थे। बरकात शाह उर्फ अनीस ट्रक चलाता था। घर की जिम्मेदारियों का बोझ उसके कंधों पर था। वह कमाकर परिवार का सहारा बन रहा था। बरकात और सोराब फुफेरे भाई थे। रिश्ते की डोर इतनी मजबूत थी कि मौत भी दोनों को अलग नहीं कर सकी।

सोराब की मां मुन्नी देवी बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर बार-बार बेसुध हो रही थीं। बरकात की मां नफीसा की आंखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे। परिजनों की जुबान पर बस एक ही सवाल था। आखिर हमारे बच्चों का कसूर क्या था?

कस्बे के बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने वर्षों में ऐसा दर्दनाक मंजर नहीं देखा। एक साथ तीन जनाजे उठे तो पूरे कोटरा की आंखें नम हो गईं। हर कोई खामोश था, हर चेहरा गम में डूबा था। ऐसा लग रहा था मानो पूरे कस्बे ने अपने बेटे खो दिए हों।

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।- फोटो : 1

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।- फोटो : 1

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।

फोटो - 10 घर में रोते बिलखते परिजन।- फोटो : 1

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