{"_id":"94215","slug":"Jalaun-94215-39","type":"story","status":"publish","title_hn":"सहकारिता आंदोलन से ही आगे बढ़े गुजरात, महाराष्ट्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहकारिता आंदोलन से ही आगे बढ़े गुजरात, महाराष्ट्र
Jalaun
Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कृभको के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा सपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डा.चंद्रपाल सिंह यादव ने बताया कि सहकारी संस्थाओं के चुनाव संबंधी बिल संसद में पास हो गया है। कानून बनते ही राज्य चुनाव आयोग पंचायतों तथा स्थानीय निकायों की तर्ज पर सहकारी संस्थाओं के चुनाव भी हर पांच साल में कराने लगेगा।
श्री यादव गुरुवार को अपने गृह ग्राम डकोर से लखनऊ जाते समय कुछ देर के लिए उरई के जिला पंचायत अध्यक्ष एवं अपने छोटे भाई शिशुपाल सिंह यादव के आवास पर रुके। वहीं अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों के खून में सहकारिता बसी हुई है। इन प्रदेशों में सहकारिता आंदोलन घर-घर पहुंचा है। इसी का परिणाम है कि इन राज्यों ने इतनी ज्यादा तरक्की की है। एक सवाल के जवाब में डा.यादव ने बताया कि गुजरात प्रदेश के सहकारी संस्थाओं के किसानों को एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज मिलता है। किसान समय पर कर्ज अदा भी करता है जिससे सहकारी संस्थाओं को ऋण देने में कोई दिक्कत नहीं होती।
एक सवाल के जवाब में डा.यादव ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के देश भर में कुल 20 संस्थान हैं। समस्त प्रदेशों के सहकारी संघों के अधिकारी कर्मचारियों को सहकारिता के संदर्भ में प्रशिक्षण देते हैं। किसानों को जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देते हैं। बाकी प्रदेश की सरकारों ने सहकारिता आंदोलन को बढ़ाने में कुछ खास नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सहकारी समितियों से लेकर गन्ना समितियों, तिलहन समिति, सहकारी बैंक, खाद्य समिति के निर्वाचित पदाधिकारी पांच वर्ष के लिए चुने जाया करेंगे। बीच में किसी भी राज्य सरकार को इन संस्थाओं के बोर्ड को भंग करने का अधिकार नहीं रह जाएगा।
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प्रमोशन में आरक्षण के सवाल पर सपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डा.चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि नौकरियों में पहली बार तो आरक्षण मिलना उचित है लेकिन एक बार नौकरी में आने के बाद चाहे दलित हो या पिछड़ा वर्ग, सर्वण हो या अल्पसंख्यक, इनमें भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण के कारण योग्य व्यक्ति विभाग की शुरुआती पोस्ट में ही रह जाता है जबकि उसके साथ का ही व्यक्ति उसका बास बन जाता है। इस प्रक्रिया से योग्य व्यक्तियों में कुंठा पैदा होती है। इसीलिए इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर रोक लगाई है। कांग्रेस इसका बिल राज्यसभा में लाई है। उसे पता है कि बिल पास नहीं होगा लेकिन दलितों का वोट खींचने के लिए कांग्रेस इस मुद्दे को अगले लोकसभा चुनाव तक जीवित रखना चाहती है। इसी तरह यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण बिल को भी राज्यसभा में पेश करने का नाटक किया था। समाजवादी पार्टी किसी कीमत पर यह बिल पास नहीं होने देंगी।
इस दौरान सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा, सपा नेता धर्मेंद्र सिंह, गिल्लू भिटारी, डीवी कालेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अतुल यादव, विजय सिंह राणा, शिवदास श्रीवास, अनिल यादव, गोविंद सिंह दाऊ, जाहर सिंह यादव आदि मौजूद थे।
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श्री यादव गुरुवार को अपने गृह ग्राम डकोर से लखनऊ जाते समय कुछ देर के लिए उरई के जिला पंचायत अध्यक्ष एवं अपने छोटे भाई शिशुपाल सिंह यादव के आवास पर रुके। वहीं अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों के खून में सहकारिता बसी हुई है। इन प्रदेशों में सहकारिता आंदोलन घर-घर पहुंचा है। इसी का परिणाम है कि इन राज्यों ने इतनी ज्यादा तरक्की की है। एक सवाल के जवाब में डा.यादव ने बताया कि गुजरात प्रदेश के सहकारी संस्थाओं के किसानों को एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज मिलता है। किसान समय पर कर्ज अदा भी करता है जिससे सहकारी संस्थाओं को ऋण देने में कोई दिक्कत नहीं होती।
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एक सवाल के जवाब में डा.यादव ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के देश भर में कुल 20 संस्थान हैं। समस्त प्रदेशों के सहकारी संघों के अधिकारी कर्मचारियों को सहकारिता के संदर्भ में प्रशिक्षण देते हैं। किसानों को जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देते हैं। बाकी प्रदेश की सरकारों ने सहकारिता आंदोलन को बढ़ाने में कुछ खास नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब सहकारी समितियों से लेकर गन्ना समितियों, तिलहन समिति, सहकारी बैंक, खाद्य समिति के निर्वाचित पदाधिकारी पांच वर्ष के लिए चुने जाया करेंगे। बीच में किसी भी राज्य सरकार को इन संस्थाओं के बोर्ड को भंग करने का अधिकार नहीं रह जाएगा।
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प्रमोशन में आरक्षण के सवाल पर सपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डा.चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि नौकरियों में पहली बार तो आरक्षण मिलना उचित है लेकिन एक बार नौकरी में आने के बाद चाहे दलित हो या पिछड़ा वर्ग, सर्वण हो या अल्पसंख्यक, इनमें भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण के कारण योग्य व्यक्ति विभाग की शुरुआती पोस्ट में ही रह जाता है जबकि उसके साथ का ही व्यक्ति उसका बास बन जाता है। इस प्रक्रिया से योग्य व्यक्तियों में कुंठा पैदा होती है। इसीलिए इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर रोक लगाई है। कांग्रेस इसका बिल राज्यसभा में लाई है। उसे पता है कि बिल पास नहीं होगा लेकिन दलितों का वोट खींचने के लिए कांग्रेस इस मुद्दे को अगले लोकसभा चुनाव तक जीवित रखना चाहती है। इसी तरह यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण बिल को भी राज्यसभा में पेश करने का नाटक किया था। समाजवादी पार्टी किसी कीमत पर यह बिल पास नहीं होने देंगी।
इस दौरान सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल सिंह यादव, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा, सपा नेता धर्मेंद्र सिंह, गिल्लू भिटारी, डीवी कालेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अतुल यादव, विजय सिंह राणा, शिवदास श्रीवास, अनिल यादव, गोविंद सिंह दाऊ, जाहर सिंह यादव आदि मौजूद थे।