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मनरेगा में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए कैग टीम आई
Jalaun
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। मनरेगा के तहत वर्ष 2007 से 2009 के बीच हुए कार्यों एवं केंद्रीकृत खरीद में अनियमितताओं की जांच के लिए महालेखाकार नियंत्रक (कैग) की आठ सदस्यीय टीम सोमवार की शाम को यहां पहुंच गई। टीम मंगलवार से कोंच एवं जालौन ब्लाक में मिली गड़बड़ियों की जांच करेगी। दो साल की उक्त अवधि में मनरेगा के तहत कराए गए कामों एवं खरीद में 50 करोड़ से अधिक घोटाला किए जाने की शिकायत हुई है।
कैग की टीम की अगुआई मुख्य लेखा परीक्षक एसएन सिंह कर रहे हैं। टीम कल से कोंच व जालौन ब्लाकों में जाकर नमूने के तौर पर दस दस ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायतों के कार्यों की जांच करेंगी। मालूम हो कि मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों विशेषकर तालाब निर्माण, सड़क निर्माण आदि में एक ही काम के लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और विकास खंड स्तर पर बनाने का अलग-अलग दावा करके भुगतान लिया गया। इस मामले में तब कई अधिकारियों को चार्जशीट भी दी गई थी।
इसी तरह केंद्रीकृत खरीद के तहत ग्राम्य विकास अभिकरण में काली पालीथिन, मेडिकल किट, जेनरेटर, टेंट फावड़ा, गोती, डलिया, खिलौना समेत कई सामग्रियों की खरीद हुई थी। इसमें भी बाजार मूल्य से कई गुना अधिक पर सामान खरीदने की शिकायत हुई। इसके अलावा मनरेगा में स्थानीय स्तर से खरीदने का प्राविधान है, लेकिन उसमें नियमों को दरकिनार कर जिला मुख्यालय से करोड़ों का सामान खरीदा गया था।
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कैग की टीम की अगुआई मुख्य लेखा परीक्षक एसएन सिंह कर रहे हैं। टीम कल से कोंच व जालौन ब्लाकों में जाकर नमूने के तौर पर दस दस ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायतों के कार्यों की जांच करेंगी। मालूम हो कि मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों विशेषकर तालाब निर्माण, सड़क निर्माण आदि में एक ही काम के लिए ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और विकास खंड स्तर पर बनाने का अलग-अलग दावा करके भुगतान लिया गया। इस मामले में तब कई अधिकारियों को चार्जशीट भी दी गई थी।
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इसी तरह केंद्रीकृत खरीद के तहत ग्राम्य विकास अभिकरण में काली पालीथिन, मेडिकल किट, जेनरेटर, टेंट फावड़ा, गोती, डलिया, खिलौना समेत कई सामग्रियों की खरीद हुई थी। इसमें भी बाजार मूल्य से कई गुना अधिक पर सामान खरीदने की शिकायत हुई। इसके अलावा मनरेगा में स्थानीय स्तर से खरीदने का प्राविधान है, लेकिन उसमें नियमों को दरकिनार कर जिला मुख्यालय से करोड़ों का सामान खरीदा गया था।
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