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दबंग की पिटाई से क्षुब्ध पूर्व फौजी ने लगाई फांसी

Wed, 17 Sep 2014 05:31 AM IST
Jalaun
Jalaun Updated Wed, 17 Sep 2014 05:31 AM IST
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सरावन (जालौन)। गोहन थाना क्षेत्र के गांव गोरा भूपका में दबंग की पिटाई से क्षुब्ध पूर्व फौजी ने अपने घर की दीवार पर सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मंगलवार को सुबह उसकी पत्नी ने शव फांसी पर लटका देखा। जानकारी मिलते ही आसपास के तमाम लोग वहां एकत्र हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पूर्व फौजी के पुत्र ने पूर्व प्रधान के पुत्र वीर सिंह के अलावा दयाराम व एक अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। तहरीर में पिता की हत्या का आरोप लगाया है। वहीं, थानाध्यक्ष रामराज का कहना है कि मामले की जांचकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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गांव गोरा भूपका निवासी पूर्व फौजी सीताराम प्रजापति (60) पुत्र कमल प्रसाद सोमवार को गांव में ही एक परचून की पर बैठा लोगों से बातचीत कर रहा था। तभी वहां पूर्व प्रधान का पुत्र वीर सिंह शराब के नशे में धुत्त होकर पहुंचा और अकारण उसकी जूतों से पिटाई शुरू कर दी। वहां मौजूद गांव वालों ने उसे किसी तरह बचाया। इसके बाद पूर्व फौजी ने गोहन थाने जाकर पुलिस से लिखित शिकायत की। कोबरा सिपाही गांव पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था। इस अपमान से क्षुब्ध होकर पूर्व फौजी सीताराम ने सोमवार की रात अपने कमरे में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले उसने कमरे की दीवार पर वीर सिंह व दो अन्य लोगों के भी नाम लिखे। मंगलवार की सुबह जब सीताराम की बीमार पत्नी बैकुंठी देवी ने पति का शव फांसी पर लटका देखा तो पड़ोसियों को सूचना दी। सूचना पाकर गोहन थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक फौजी के पुत्र श्रीराम ने आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। उधर, गांव वालों में पुलिस के तुरंत कार्रवाई न करने पर रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस ने सोमवार की रात ही आरोपियों को पकड़ लेती तो पूर्व फौजी की जान बच सकती थी। वहीं, थानाध्यक्ष रामराज का इस बाबत कहना है कि आरोपियों की धर पकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। उधर, फौजी ने कमरे की दीवार पर लिखे सुसाइड नोट में लिखा है कि हमलावर वीर सिंह ने दयाराम के कहने पर पीटा था आखिर फौजी की दयाराम से क्या विवाद था। पुलिस इसकी भी जांचकर रही है। सीताराम अपनी पत्नी के साथ अकेला गांव में रहता था। उसके दो पुत्र श्रीराम व जयराम ग्वालियर में रहकर व्यापार करते है। दोनों पुत्रों को जैसे ही पिता की मौत की सूचना मिली दोनों भाई गांव आए और पिता की हत्या का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी हत्या कर शव को फांसी पर लटकाया गया है।
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