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बिजली के पोल तक लगे नहीं और भेज दिया बिल
Jalaun
Updated Tue, 16 Sep 2014 05:31 AM IST
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जालौन। गांव के बच्चे सूरज ढलने से पहले ही अपना होमवर्क पूरा कर लेते हैं। महिलाएं रसोई का ज्यादातर काम भी निबटा लेती हैं। ताकि सूरज ढलने के बाद लालटेन की रोशनी में ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े। करें भी क्या, जो गांव में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। लोग ढिबरी और लालटेन के सहारे जिंदगी बिता रहे हैं। तरक्की का ढोल पीटने वालों के लिए यह वाक्य अजीब लग सकता है, लेकिन सौ फीसदी सच है। हम बात कर रहे हैं जालौन जिले के विकास का बट्टा लगाने वाले कुंदनपुरा गांव की। जिले में चलने वाली विकास की योजनाओं से यह गांव अभी तक अधूता है। इतना ही नहीं इस गांव को लालफीताशाही का दंश भी झेलना पड़ता है। बिना कनेक्शन के बिजली के बिल भी थामने की मजबूरी भी हैं।
तकरीबन पांच सौ की आबादी वाले गांव कुंदनपुरा के बाशिंदे इस बाबत पूछने पर दो टूक जवाब देते हैं कि ‘उन्हें उम्मीद ही नहीं है कि बिजली के दर्शन होंगे।’ साथ ही यह भी कहते हैं कि आजादी के बाद सूबे में इतनी सरकारें आई-गईं, पर किसी के कार्यकाल में ध्यान नहीं दिया गया। बिजली पहुंचना तो दूर, खंभे तक नहीं लगाए गए हैं। बिजली न होने से किसानों को फसलों की सिंचाई करने की समस्या झेलनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को होती है, बिजली न होने से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। हाल यह है कि स्कूल से लौटने पर बच्चे सबसे पहले स्कूल से मिला होमवर्क पूरा करते हैं, बाद में कुछ खाते-पीते हैं। इसकी वजह साफ है कि अंधेरा हो जाने पर उन्हें लालटेन या ढिबरी की रोशनी में स्कूल का काम करना पड़ेगा। बोर्ड परीक्षा के दौरान हाईस्कूल व इंटर के छात्रों की तैयारी ठीक से नहीं हो पाती है।
गांव के जसवंत सिंह, कृष्ण बिहारी, राम सिंह, सुदामा प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, करन सिंह का कहना है कि सांसद, विधायक, जिलाधिकारी समेत संबंधित विभाग के अफसरों को कई मर्तबा अवगत कराया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। किशन मूर्ति, सोना देवी आदि का कहना है कि पड़ोस के गांव में बिजली की रोशनी देखकर वे लोग अपने को उपेक्षित महसूस करती हैं। वैसे ज्यादातर लोग कहते हैं कि गांव में बिजली आने की वह उम्मीद ही छोड़ चुके हैं।
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बिना कनेक्शन भेज दिया 35 हजार का बिल
गांव कुंदनपुरा में स्थित प्राथमिक विद्यालय का हाल सुनिए। गांव में बिजली है नहीं, विद्यालय ने आज तक बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन विद्युत विभाग ने दो किश्तों में 35 हजार रुपये का बिल भेज दिया है। विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द भुगतान करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय के शिक्षक साधना सिंह व शिक्षामित्र महेंद्र सिंह कहते हैं कि यह तो हास्यास्पद है कि बिना कनेक्शन के बिल भेजा जा रहा है। वैसे इस बाबत विभाग के बड़े अफसरों को अवगत करा दिया गया है।
उधर, बिजली विभाग के एसडीओ भगवंत सिंह का कहना है कि गांव में बिजली आपूर्ति चालू करने की कार्ययोजना लंबे समय से लंबित पड़ी हुई है। हालांकि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रही बात स्कूल में बिजली का बिल आने की तो उसे निरस्त कराया जाएगा।
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तकरीबन पांच सौ की आबादी वाले गांव कुंदनपुरा के बाशिंदे इस बाबत पूछने पर दो टूक जवाब देते हैं कि ‘उन्हें उम्मीद ही नहीं है कि बिजली के दर्शन होंगे।’ साथ ही यह भी कहते हैं कि आजादी के बाद सूबे में इतनी सरकारें आई-गईं, पर किसी के कार्यकाल में ध्यान नहीं दिया गया। बिजली पहुंचना तो दूर, खंभे तक नहीं लगाए गए हैं। बिजली न होने से किसानों को फसलों की सिंचाई करने की समस्या झेलनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को होती है, बिजली न होने से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। हाल यह है कि स्कूल से लौटने पर बच्चे सबसे पहले स्कूल से मिला होमवर्क पूरा करते हैं, बाद में कुछ खाते-पीते हैं। इसकी वजह साफ है कि अंधेरा हो जाने पर उन्हें लालटेन या ढिबरी की रोशनी में स्कूल का काम करना पड़ेगा। बोर्ड परीक्षा के दौरान हाईस्कूल व इंटर के छात्रों की तैयारी ठीक से नहीं हो पाती है।
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गांव के जसवंत सिंह, कृष्ण बिहारी, राम सिंह, सुदामा प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, राजेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, करन सिंह का कहना है कि सांसद, विधायक, जिलाधिकारी समेत संबंधित विभाग के अफसरों को कई मर्तबा अवगत कराया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। किशन मूर्ति, सोना देवी आदि का कहना है कि पड़ोस के गांव में बिजली की रोशनी देखकर वे लोग अपने को उपेक्षित महसूस करती हैं। वैसे ज्यादातर लोग कहते हैं कि गांव में बिजली आने की वह उम्मीद ही छोड़ चुके हैं।
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बिना कनेक्शन भेज दिया 35 हजार का बिल
गांव कुंदनपुरा में स्थित प्राथमिक विद्यालय का हाल सुनिए। गांव में बिजली है नहीं, विद्यालय ने आज तक बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन विद्युत विभाग ने दो किश्तों में 35 हजार रुपये का बिल भेज दिया है। विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द भुगतान करें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय के शिक्षक साधना सिंह व शिक्षामित्र महेंद्र सिंह कहते हैं कि यह तो हास्यास्पद है कि बिना कनेक्शन के बिल भेजा जा रहा है। वैसे इस बाबत विभाग के बड़े अफसरों को अवगत करा दिया गया है।
उधर, बिजली विभाग के एसडीओ भगवंत सिंह का कहना है कि गांव में बिजली आपूर्ति चालू करने की कार्ययोजना लंबे समय से लंबित पड़ी हुई है। हालांकि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रही बात स्कूल में बिजली का बिल आने की तो उसे निरस्त कराया जाएगा।