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साहब! एक-एक बूंद को कर रहे मशक्कत
Jalaun
Updated Mon, 26 May 2014 05:36 AM IST
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मुहम्मदाबाद(जालौन)। भीषण गर्मी में जहां लोगों को जीवन बचाने के लिए पानी की विशेष जरूरत होती है,वहीं डकोर ब्लाक क्षेत्र के गांव टिमरों के बाशिंदे एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान होते घूम रहे है। जहां गांव में लगे 40 हैंडपंप खराब हैं वहीं कुएं में लाइन लगती है। इस गंभीर समस्या पर ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। डीएम को प्रार्थनापत्र सौंप कर निराकरण की मांग की है।
डकोर ब्लाक के गांव टिमरों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे है। 3500 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट गहराता जा रहा है।इस भीषण गर्मी में भी प्रशासन ने यहां पेयजल के समुचित प्रबंध नहीं किए है जिससे समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गांव में करीब 40 हैंडपंप लगे हैं। 40 हैंडपंपों में से अधिकांश ने पानी देना बंद कर दिया है तो कुछ खारा पानी दे रहे है जिसे इंसान तो छोड़ो जानवर भी नहीं पी रहे है कुछ हैंडपंप तो ऐसे है जो दूषित पानी दे रहे है। जलसंस्थान ने पाइप लाइन के जरिए लोगों को पेयजल की उपलब्धता कराई थी, यह व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। आज पानी की टंकी लोगों को मुंह चिढ़ा रही है। पाइप लाइनें फटी हुई है। गांव में पुराने समय के जलश्रोतों में से एक कुओं का भी हाल भी बदतर है। 3500 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट गहराता जा रहा है। एक दो कुएं हैं उनमें सुबह से ही पानी के लिए लोगों की लाइन लग जाती है। नहरों में धूल उड़ रही है तो तालाबों का पानी भीषण गर्मी में सूख गया है। गांव के लोग सरकारी व्यवस्था पर खासे नाराज है। रामू पंडा, सतीश तिवारी, रामसिया, नाजिम, हीरा सिंह, रहीशा बेगम, कुलदीप, अरुण प्रताप आदि ग्रामीणों ने डीएम को प्रार्थनापत्र सौंप गांव की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग कर नहरें शीघ्र चालू कराने की मांग की। इसके अलावा बिजली की किल्लत को दूर करने की मांग की है।
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डकोर ब्लाक के गांव टिमरों में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे है। 3500 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट गहराता जा रहा है।इस भीषण गर्मी में भी प्रशासन ने यहां पेयजल के समुचित प्रबंध नहीं किए है जिससे समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गांव में करीब 40 हैंडपंप लगे हैं। 40 हैंडपंपों में से अधिकांश ने पानी देना बंद कर दिया है तो कुछ खारा पानी दे रहे है जिसे इंसान तो छोड़ो जानवर भी नहीं पी रहे है कुछ हैंडपंप तो ऐसे है जो दूषित पानी दे रहे है। जलसंस्थान ने पाइप लाइन के जरिए लोगों को पेयजल की उपलब्धता कराई थी, यह व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। आज पानी की टंकी लोगों को मुंह चिढ़ा रही है। पाइप लाइनें फटी हुई है। गांव में पुराने समय के जलश्रोतों में से एक कुओं का भी हाल भी बदतर है। 3500 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट गहराता जा रहा है। एक दो कुएं हैं उनमें सुबह से ही पानी के लिए लोगों की लाइन लग जाती है। नहरों में धूल उड़ रही है तो तालाबों का पानी भीषण गर्मी में सूख गया है। गांव के लोग सरकारी व्यवस्था पर खासे नाराज है। रामू पंडा, सतीश तिवारी, रामसिया, नाजिम, हीरा सिंह, रहीशा बेगम, कुलदीप, अरुण प्रताप आदि ग्रामीणों ने डीएम को प्रार्थनापत्र सौंप गांव की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग कर नहरें शीघ्र चालू कराने की मांग की। इसके अलावा बिजली की किल्लत को दूर करने की मांग की है।
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