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मिर्जा साबिर बेग एवं डा. शगुफ्ता मिर्जा की गायकी ने समा बांधा
Jalaun
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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उरई (जालौन)। प्रख्यात गायक मिर्जा साबिर बेग एवं डा. शगुफ्ता मिर्जा ने अपने गीतों गजलों से अतिथियों, शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं का मनमोह लिया।
प्रखर बुद्धि पुरस्कार कार्यक्रम में डा. शगुफ्ता मिर्जा ने सरस्वती वंदना शारदे मां विद्यादायिनी सकल गुण खानी गीत के माध्यम से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद-सत्यम शिवम सुंदरम, एक राधा एक मीरा जैसे गीत गाकर वाहवाही लूटी। इसके बाद गीत गजल गायक मिर्जा साबिर बेग ने- है प्रीत जहां की रीति सदा गीत सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो, आया रे खिलाने वाला खेले खिलौने लेके आया रे, जिंदगी मौत न बन जाए संभालों यारों, तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, प्रस्तुत किए। श्रद्धांजलि गीत चिट्ठी न कोई संदेश तथा अंत में जब यह गीत दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहां, को सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। आर्गन पर हबीब खान, पैड पर नईम हाशमी, ढोलक पर अनिल कुमार, तबला पर संतोष रावत ने गायक गायिकाओं को साथ बेहतरीन संगत दी। संचालन कर रहे कवि श्रवण कुमार सविता ने चुटकुलों से तथा गीतों से बच्चों खूब मनोरंजन किया।
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प्रखर बुद्धि पुरस्कार कार्यक्रम में डा. शगुफ्ता मिर्जा ने सरस्वती वंदना शारदे मां विद्यादायिनी सकल गुण खानी गीत के माध्यम से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद-सत्यम शिवम सुंदरम, एक राधा एक मीरा जैसे गीत गाकर वाहवाही लूटी। इसके बाद गीत गजल गायक मिर्जा साबिर बेग ने- है प्रीत जहां की रीति सदा गीत सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो, आया रे खिलाने वाला खेले खिलौने लेके आया रे, जिंदगी मौत न बन जाए संभालों यारों, तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, प्रस्तुत किए। श्रद्धांजलि गीत चिट्ठी न कोई संदेश तथा अंत में जब यह गीत दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहां, को सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ गए। आर्गन पर हबीब खान, पैड पर नईम हाशमी, ढोलक पर अनिल कुमार, तबला पर संतोष रावत ने गायक गायिकाओं को साथ बेहतरीन संगत दी। संचालन कर रहे कवि श्रवण कुमार सविता ने चुटकुलों से तथा गीतों से बच्चों खूब मनोरंजन किया।