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कोटेदारों का पता नहीं, अन्न के लिए भटक रहे कार्डधारक
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जालौन। अन्न घोटाले में नगर में अधिकांश कोटेदारों के फंसने के बाद उनके कोटों को निरस्त कर उनके कोटों को ग्रामीण क्षेत्र के कोटेदारों के पास अटैच कर दिया गया था। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के कोटेदार मोहल्ले में सरकारी राशन न बांटकर अन्यत्र स्थानों से राशन सामग्री बांट रहे हैं। जिसके चलते कार्डधारक राशन सामग्री लेने के लिए परेशान हो रहे हैं।
मोहल्ला चौधरयाना निवासी प्रेमी देवी का कहना है कि अभी तक राशन सामग्री का वितरण नहीं किया गया है। कोटेदार कभी देवनगर चौराहा तो कभी चुर्खी रोड पर राशन सामग्री का वितरण करते हैं। 40 से 50 रुपये की राशन सामग्री लेने के लिए उन्हें 40 से 50 रुपये ही रिक्शे आदि पर खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है।
रीना देवी का कहना है कि कई चक्कर लगाने के बावजूद कोटेदार का पता नहीं चलता है। इतनी दूर कोटा अटैच कर दिया गया है राशन लेने आने में ही परेशानी होती है। राशन के चक्कर में घर के दूसरे काम भी समय से नहीं कर पाते है।
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तहसील के पूर्ति निरीक्षक अमोल सिंह चौहान का कहना है कि कई कोटेदारों का निलंबन होने के कारण अटैचमेंट व्यवस्था की गई है। इसके चलते राशनकार्ड धारकों को परेशानी हो रही है। कोटेदारों को हिदायत दी जा रही है कि एक निर्धारित समय पर बैठकर राशन वितरण सुनिश्चित करें।
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मोहल्ला चौधरयाना निवासी प्रेमी देवी का कहना है कि अभी तक राशन सामग्री का वितरण नहीं किया गया है। कोटेदार कभी देवनगर चौराहा तो कभी चुर्खी रोड पर राशन सामग्री का वितरण करते हैं। 40 से 50 रुपये की राशन सामग्री लेने के लिए उन्हें 40 से 50 रुपये ही रिक्शे आदि पर खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है।
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रीना देवी का कहना है कि कई चक्कर लगाने के बावजूद कोटेदार का पता नहीं चलता है। इतनी दूर कोटा अटैच कर दिया गया है राशन लेने आने में ही परेशानी होती है। राशन के चक्कर में घर के दूसरे काम भी समय से नहीं कर पाते है।
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तहसील के पूर्ति निरीक्षक अमोल सिंह चौहान का कहना है कि कई कोटेदारों का निलंबन होने के कारण अटैचमेंट व्यवस्था की गई है। इसके चलते राशनकार्ड धारकों को परेशानी हो रही है। कोटेदारों को हिदायत दी जा रही है कि एक निर्धारित समय पर बैठकर राशन वितरण सुनिश्चित करें।