{"_id":"5c9252dcbdec2214355662d6","slug":"51553093340-jalaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"होलिका दहन के साथ शुरु हुआ रंगोत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होलिका दहन के साथ शुरु हुआ रंगोत्सव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
होलिकादहन बुधवार को जिले में परंपरागत तरीके से मनाया गया। शहर सहित जिले के सभी नगरों व गांवों में चिह्नित कई स्थानों पर होलिका दहन किया गया। इसमें लोगों ने पहुंचकर पूजा अर्चना की।
वही जिले में होलिका दहन के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम पूर्ण कर लिए थे, इससे शहर के सभी चौराहों पर शांतिपूर्ण तरीके से होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद प्रथा अनुसार लोग दहन से सुलगती आग को अपने घरों में ले गए और पूजन अर्चन किया।
भारतीय संस्कृति में होली को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाते है। मान्यता है कि भक्त प्रहलाद को मारने के लिए उसकी बुआ होलिका ने उन्हें गोद में बैठाकर आग में बैठ गई थी,
विज्ञापन
लेकिन प्रभु की कृपा से भक्त प्रहलाद को तो कुछ नहीं हुआ लेकिन उनकी बुआ आग में जलकर भस्म हो गई। बस तब से लेकर सनातन धर्म ने यह प्रथा बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर होली के पर्व के एक दिन पर्व मनाई जाती है।
प्रथा अनुसार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कई दिनों से चयनित चौराहों पर होलिका दहन के लिए लोग लकड़ियां एकत्रित कर रहे थे। बुधवार को विधि विधान के साथ इन सभी चौराहों पर होलिका दहन किया गया। जहां पर सैकड़ों ने लोगों ने होलिका की पूजा अर्चन कर उसमें गेहूं की बाली को भी जलाया और आग को अपने घरों में लेकर घरों का भी पूजा की।
विज्ञापन
वही जिले में होलिका दहन के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम पूर्ण कर लिए थे, इससे शहर के सभी चौराहों पर शांतिपूर्ण तरीके से होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद प्रथा अनुसार लोग दहन से सुलगती आग को अपने घरों में ले गए और पूजन अर्चन किया।
विज्ञापन
भारतीय संस्कृति में होली को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाते है। मान्यता है कि भक्त प्रहलाद को मारने के लिए उसकी बुआ होलिका ने उन्हें गोद में बैठाकर आग में बैठ गई थी,
विज्ञापन
लेकिन प्रभु की कृपा से भक्त प्रहलाद को तो कुछ नहीं हुआ लेकिन उनकी बुआ आग में जलकर भस्म हो गई। बस तब से लेकर सनातन धर्म ने यह प्रथा बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर होली के पर्व के एक दिन पर्व मनाई जाती है।
प्रथा अनुसार शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कई दिनों से चयनित चौराहों पर होलिका दहन के लिए लोग लकड़ियां एकत्रित कर रहे थे। बुधवार को विधि विधान के साथ इन सभी चौराहों पर होलिका दहन किया गया। जहां पर सैकड़ों ने लोगों ने होलिका की पूजा अर्चन कर उसमें गेहूं की बाली को भी जलाया और आग को अपने घरों में लेकर घरों का भी पूजा की।