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सड़क बनवाने के लिखित आश्वासन पर अड़े ग्रामीण
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मुहम्मदाबाद (जालौन)। ऐर खरका टीकर का पंद्रह किलोमीटर का मार्ग बुरी तरह ध्वस्त पड़ा है। इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। एकल मार्ग होने के कारण दोपहिया वाहन चालक भी परेशान है। ग्रामीण बताते हैं कि एक जनप्रतिनिधि आए थे और सड़क बनवाने का वादा कर गए थे पर दोबारा लौटकर नहीं आए। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे उसी प्रत्याशी को लोकसभा चुनाव में वोट देंगे, जो सड़क बनवाने का लिखित आश्वासन देगा।
ऐर खरका टीकर का मार्ग करीब 15 किलोमीटर है। इस मार्ग में खरका, ददरी, कुरहना, धमनी, धरगुआ, करुई, रामनगर, इछौरा समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव है और टीकर, ददरी, कुरहना जैसे बालू घाट है। जहां बड़ी संख्या में ट्रक व ट्रैक्टरों की आवाजाही रहती है, यह मार्ग सिंगल है। इसे सात साल पहले बनाया गया है। वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क कुछ ही महीने में ध्वस्त हो गई है।
अब स्थिति यह है कि इस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल है। यहां से बड़ी संख्या में बच्चे उरई व डकोर, कुसमिलिया आदि में पढ़ने जाते है। उन्हें ज्यादा परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार व महिलाओं को होती है। इस सड़क को बनवाने के लिए कई बार अनुरोध किया जा चुका है पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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इलाके के छत्रपाल राजपूत, भरत राजपूत, केशव प्रसाद, सगीर, रतन, मनोज कुमार, कैलाश राजपूत, मुन्ना, विजय, कल्लू, लखन राजपूत, पुष्पेंद्र आदि का कहना है कि विधानसभा चुनाव के पहले कुछ नेता वोट मांगने आए थे और सड़क बनवाने का आश्वासन दे गए थे। इसके बाद एक जनप्रतिनिधि भी गांव आए थे और सड़क की ध्वस्त हालत पर टिप्पणी करते हुए जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दे गए थे लेकिन अब तक सड़क नहीं बनाई गई है। इन ग्रामीणों का कहना है कि अब लोकसभा चुनाव में हम लोग उसी प्रत्याशी को वोट देंगे, जो इस सड़क को बनवाने का लिखित में आश्वासन देगा।
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ऐर खरका टीकर का मार्ग करीब 15 किलोमीटर है। इस मार्ग में खरका, ददरी, कुरहना, धमनी, धरगुआ, करुई, रामनगर, इछौरा समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव है और टीकर, ददरी, कुरहना जैसे बालू घाट है। जहां बड़ी संख्या में ट्रक व ट्रैक्टरों की आवाजाही रहती है, यह मार्ग सिंगल है। इसे सात साल पहले बनाया गया है। वाहनों की आवाजाही के चलते सड़क कुछ ही महीने में ध्वस्त हो गई है।
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अब स्थिति यह है कि इस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल है। यहां से बड़ी संख्या में बच्चे उरई व डकोर, कुसमिलिया आदि में पढ़ने जाते है। उन्हें ज्यादा परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार व महिलाओं को होती है। इस सड़क को बनवाने के लिए कई बार अनुरोध किया जा चुका है पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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इलाके के छत्रपाल राजपूत, भरत राजपूत, केशव प्रसाद, सगीर, रतन, मनोज कुमार, कैलाश राजपूत, मुन्ना, विजय, कल्लू, लखन राजपूत, पुष्पेंद्र आदि का कहना है कि विधानसभा चुनाव के पहले कुछ नेता वोट मांगने आए थे और सड़क बनवाने का आश्वासन दे गए थे। इसके बाद एक जनप्रतिनिधि भी गांव आए थे और सड़क की ध्वस्त हालत पर टिप्पणी करते हुए जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दे गए थे लेकिन अब तक सड़क नहीं बनाई गई है। इन ग्रामीणों का कहना है कि अब लोकसभा चुनाव में हम लोग उसी प्रत्याशी को वोट देंगे, जो इस सड़क को बनवाने का लिखित में आश्वासन देगा।