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Jalaun News: 30 डिग्री तापमान से झुलसने लगी गेहूं की फसल, पैदावार पर पड़ेगा असर

Mon, 23 Feb 2026 11:56 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:56 PM IST
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30 degree temperature scorches wheat crop, will affect yield
उरई। फरवरी अभी खत्म भी नहीं हुई है कि पारा 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने लगा है। इससे गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। फसल पीली पड़ने लगी है। खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। फसल में दो बार पानी लगा चुके किसानों को तीसरे पानी लगाने की स्थिति खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि अगर स्थिति यही रही तो उपज पर खासा असर पड़ेगा।
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जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की जाती है। अधिकतर किसान गेहूं की फसल को ही प्राथमिकता देते हैं। फरवरी अंतिम सप्ताह में गेहूं की फसल दाना भरने की अवस्था में है। लेकिन स्थिति यह है कि तापमान अधिक होने से जो फसल दो सिंचाई में संभल जाती थी उसे तीसरा पानी देना पड़ रहा है।
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ग्राम अंचल के किसान रामनारायण ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर में बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हुई थी। जैसे-तैसे संभाली। अब जब फसल तैयार होने की ओर है तो गर्मी ने चिंता बढ़ा दी है। तीसरी बार पानी लगाना पड़ा है, आगे और देना पड़ा तो खर्च संभालना मुश्किल हो जाएगा।
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किसान शिवकुमार का कहना है तीन पानी में फसल अच्छी हो जाती थी, लेकिन इस बार खेत सूख रहे हैं। बालियां पूरी तरह नहीं भर रहीं। डर है कि दाना पतला रह जाएगा और पैदावार कम हो जाएगी। किसानों का कहना है कि डीजल, खाद और मजदूरी की लागत पहले ही बढ़ चुकी है। ऐसे में अतिरिक्त सिंचाई से आर्थिक दबाव और बढ़ेगा।



दाना भराव पर पड़ सकता है सीधा असर

कृषि विशेषज्ञ विस्टर जोशी के अनुसार, 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पहुंचते ही गेहूं की फसल में दाना भराव की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। यदि इस अवस्था में खेत में पर्याप्त नमी नहीं रहती तो दाना पतला और हल्का रह जाता है, जिससे उपज में कमी आना तय है।





वैज्ञानिकों की सलाह

समय पर हल्की सिंचाई करें, सुबह या शाम के समय पानी दें, ताकि वाष्पीकरण कम हो।

नमी बनाए रखें, खेत में दरारें न पड़ने दें, आवश्यकता हो तो हल्की गुड़ाई करें।

संतुलित उर्वरक प्रयोग, पोटाश की उचित मात्रा दाना भराव में सहायक होती है।

पानी का ठहराव न होने दें, ज्यादा जलभराव से जड़ों को नुकसान हो सकता है।

कीट व रोग निगरानी, गर्म मौसम में माहू व अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, समय पर नियंत्रण करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में और वृद्धि हुई तो उपज पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम की निगरानी करते हुए वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करना होगा। फिलहाल बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दो लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल की सेहत अब मौसम के मिजाज पर टिकी है।
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