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गर्मी के साथ ही बढ़ती जा रही पानी की किल्लत

Mon, 10 Jun 2019 12:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2019 12:13 AM IST
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गर्मी के साथ ही बढ़ती जा रही पानी की किल्लत
उरई। भीषण गर्मी के कारण पानी की समस्या दिन पर दिन कम होने के बजाए विकराल रुप लेती जा रही है। पेयजल संकट गली-मोहल्लों से निकलकर सरकारी नलों यहां तक कि रेलवे स्टेशन और अस्पतालों तक पहुंच रहा है। किसी सरकारी अस्पताल में वाटर कूलर और हैंडपंप दोनों खराब होने से पानी के लिए मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है तो सड़कों पर राहगीरों की सुविधा के लिए बने सरकारी नल भी शोपीस बने हुए हैं। सड़क चलते लोगों को प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदकर ही पीना पड़ता है। वहीं गांव-कस्बों में अभी भी घर तक पानी लाना किसी पहाड़ से कम नहीं है। कोई साइकिल से तो कोई रिक्शे से पानी की ढुलाई कर रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि थोड़ी बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने पर ही समस्या का समाधान संभव हो सकेगा।
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सीएचसी आएं तो घर से लाएं ठंडा पानी
कदौरा। सीएचसी, कदौरा में मरीजों और तीमारदारों के लिए तीन हैंडपंप लगाए गए थे। जिनमें से दो खराब पड़े हैं। अस्पताल में लगा वाटर कूलर भी गर्म पानी दे रहा है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को सिवाय भटकने के अलावा और कोई चारा नहीं रहता है। अस्पताल के डॉक्टर तो घरों से पानी की ठंडी बोतलें लेकर आते हैं लेकिन तीमारदारों व मरीजों को पानी खरीदकर ही पीना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि वाटरकूलर सही कराने के लिए उच्चाधिकारियों से कहा गया है, देखें कब तक ठंडा पानी मिल पाता है। वैसे सीएचसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार अपने रिश्तेदारों से कहते हैं कि अगर वह मरीज देखने आएं तो घर से ठंडा पानी भी लाए यहां नहीं मिलेगा।
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सफेद हाथी बनी निशुल्क पेयजल योजना
ऊमरी। नगर पंचायत में सड़क चलते लोगों के लिए मुख्य बाजार, नट की पुलिया, बलबीर ढाला के पास निशुल्क पेयजल योजना के अंतर्गत सरकारी नल लगे हैं लेकिन किसी में खौलता पानी तो किसी में वह भी नहीं आता है। इलाकाई लोगों का कहना है कि जिन टंकियों से पानी सप्लाई होता है, वही सही नहीं हैं तो नलों तक पानी कैसे पहुंचे। सड़क किनारे लगे हैंडपंप पहले ही जवाब दे चुके हैं। ऐसे में राह चलते लोगों के लिए भी पानी खरीदने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहता है। इसके अलावा टंकी से मोहल्लों को सप्लाई होना वाला पानी भी पाइप लाइनों के लीकेज होने से घरों तक नहीं पहुंच पाता है जिससे लोगों को दूरदराज से पानी भरकर लाने को मजबूर होना पड़ता है।
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पानी की ढुलाई छुड़ा रही पसीने
एट/आटा। एट में हैंडंपप की खराबी के कारण लोगों को दूरदराज से पानी भरना पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल की छुट्टियां भी पानी भरते ही बीत रही हैं। कोई साइकिल से तो ठेले पर पानी ढो-ढोकर घर लाने को मजबूर है। लोगों का कहना है नगर पंचायत बनने के बाद भी कोई सुविधा नहीं मिल रही है। वहीं भूगर्भ जलस्तर गिरने से आटा इलाके के अधिकांश हैंडपंप तो खराब हो ही चुके हैं। इसके अलावा जो एक दो कुएं पानी देते थे, अब वे भी सूख से गए हैं। जिस कारण लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण सुखदेव, उबैर और देवेंद्र का कहना है कि गांव में पानी की समस्या विकराल हो चुकी है लेकिन प्रधान हैं कि कोई सुनवाई ही नहीं करते हैं। एक-एक बूंद पानी को सहेज कर खर्च करते हैं।
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