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एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा महिला अस्पताल
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एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में नजर आईं मात्र एक डॉक्टर
ओपीडी में महिला रोगियों को करना पड़ा कई घंटे इंतजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। कागजों में भले ही जिला महिला अस्पताल में करीब आठ डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन यह अस्पताल एक ही डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। इसका नजारा मंगलवार को साफतौर पर देखने को मिला। एक ही डॉक्टर इमरजेंसी और ओपीडी का जिम्मा संभाले हुए थीं।
मंगलवार को जिला महिला अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आईं महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि यहां पर मात्र एक महिला चिकित्सक (डॉ. वंदना पांडेय) थीं और उन पर इमरजेंसी, भर्ती वार्ड, सीजर और ओपीडी सभी का जिम्मा था, ऐसे में वह किस ड्यूटी को निभाएं, यह बात वह खुद नहीं समझ पा रहीं थीं, क्योंकि इमरजेंसी में भी उनके पास रोगियों की भीड़ लगी हुई थी।
प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को भी वह देख रहीं थीं। ऐसे में ओपीडी की महिला रोगियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। 11 बजे के बाद ओपीडी में एक फार्मासिस्ट को बिठाया गया। तब कहीं जाकर महिला रोगियों को देखने की प्रक्रिया शुरू हुई। बताया जा रहा है कि यहां पर तैनात एक डॉक्टर को एडी ने अलीगढ़ अटैच कर रखा है। यहां पर तैनात एक डॉक्टर पर प्राइवेट अस्पतालों में जाकर प्रैक्टिस करने का भी आरोप है। यह बात विभागीय अधिकारियों की नजर में भी है, लेकिन इस बात को लेकर सभी चुप्पी साधे हुए हैं।
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सुबह आठ बजे के अस्पताल आई हूं, लेकिन यहां पर कोई डॉक्टर नहीं बैठी हैं। 11 बज गए लाइन में खड़े होते हुए। पता नहीं कब तक डॉक्टर आएंगी।
-खुशबू, महिला रोगी।
घर से यह सोचकर जल्दी आए थे कि अस्पताल में जल्द नंबर आ जाएगा, लेकिन यहां तो ओपीडी में डॉक्टर ही नहीं बैठी हैं। दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं।
-विनीता, महिला रोगी।
अलीगढ़ में अटैच डॉक्टर की वापसी के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं। रही बात एक डॉक्टर द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने की तो यह गलत है। उन डॉक्टर को भी ओपीडी में बैठकर मरीजों को देखना चाहिए। इस बारे में मैं जानकारी करूंगा और अगर ऐसा हो रहा है तो जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. बृजेश राठौर, सीएमओ।
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जिला महिला अस्पताल में नजर आईं मात्र एक डॉक्टर
ओपीडी में महिला रोगियों को करना पड़ा कई घंटे इंतजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। कागजों में भले ही जिला महिला अस्पताल में करीब आठ डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन यह अस्पताल एक ही डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। इसका नजारा मंगलवार को साफतौर पर देखने को मिला। एक ही डॉक्टर इमरजेंसी और ओपीडी का जिम्मा संभाले हुए थीं।
मंगलवार को जिला महिला अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आईं महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि यहां पर मात्र एक महिला चिकित्सक (डॉ. वंदना पांडेय) थीं और उन पर इमरजेंसी, भर्ती वार्ड, सीजर और ओपीडी सभी का जिम्मा था, ऐसे में वह किस ड्यूटी को निभाएं, यह बात वह खुद नहीं समझ पा रहीं थीं, क्योंकि इमरजेंसी में भी उनके पास रोगियों की भीड़ लगी हुई थी।
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प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को भी वह देख रहीं थीं। ऐसे में ओपीडी की महिला रोगियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। 11 बजे के बाद ओपीडी में एक फार्मासिस्ट को बिठाया गया। तब कहीं जाकर महिला रोगियों को देखने की प्रक्रिया शुरू हुई। बताया जा रहा है कि यहां पर तैनात एक डॉक्टर को एडी ने अलीगढ़ अटैच कर रखा है। यहां पर तैनात एक डॉक्टर पर प्राइवेट अस्पतालों में जाकर प्रैक्टिस करने का भी आरोप है। यह बात विभागीय अधिकारियों की नजर में भी है, लेकिन इस बात को लेकर सभी चुप्पी साधे हुए हैं।
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सुबह आठ बजे के अस्पताल आई हूं, लेकिन यहां पर कोई डॉक्टर नहीं बैठी हैं। 11 बज गए लाइन में खड़े होते हुए। पता नहीं कब तक डॉक्टर आएंगी।
-खुशबू, महिला रोगी।
घर से यह सोचकर जल्दी आए थे कि अस्पताल में जल्द नंबर आ जाएगा, लेकिन यहां तो ओपीडी में डॉक्टर ही नहीं बैठी हैं। दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं।
-विनीता, महिला रोगी।
अलीगढ़ में अटैच डॉक्टर की वापसी के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं। रही बात एक डॉक्टर द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने की तो यह गलत है। उन डॉक्टर को भी ओपीडी में बैठकर मरीजों को देखना चाहिए। इस बारे में मैं जानकारी करूंगा और अगर ऐसा हो रहा है तो जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. बृजेश राठौर, सीएमओ।