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भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत महत्व दिया गया है : जिला जज
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जिला न्यायालय पर महिला दिवस के कार्यक्रम में उपस्थित न्याययिक अधिकारी व समाज सेवी।
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर परिवार न्यायालय, हाथरस के प्रांगण में महिला पखवारा/विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन महिलाओं के सशक्तीकरण व अधिकारों के प्रति जागरूकता पर सुनील कुमार सिंह-प्रथम जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की अध्यक्षता में किया गया।
इस मौके पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं को वेदों-शास्त्रों में महिला शक्ति माना गया है। स्त्री से बड़ा इस धरती पर कोई नहीं है। धन संग्रह में भी स्त्री का बहुत बड़ा योगदान होता है। भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर आजकल की लड़कियों/महिलाओं पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां/महिलाएं आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है, जैसे जल सेना, थल सेना, आर्मी, न्यायिक सेवा, डॉक्टर, अध्यापक, अधिवक्ता आदि में हर स्थान पर आगे बढ़ रही हैं।
विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों का सही प्रयोग करना चाहिए। कभी भी अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को अधिवक्ता की जरूरत हो तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विधिक, हाथरस में सहायता के संबंध में प्रार्थना पत्र देने पर प्राधिकरण द्वारा जांच के उपरांत नि:शुल्क अधिवक्ता दिया जाता है।
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अखिलेश दुबे, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय हाथरस ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे जानकारी के साथ-साथ संस्कार की भी जानकारी होनी जरूरी है। मुकद्दमेे बाजी में एक ही पक्ष दोषी नहीं होता है, दूसरे पक्ष की थोड़ी कमी होती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दहेज प्रतिशोध अधिनियम धारा 125 भरण पोषण अधिनियम के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दहेज देना अथवा दहेज लेना दोनों ही अपराध हैं।
वीना चौधरी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधीश, हाथरस ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सशक्त होना चाहिए। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योगेंद्र राम गुप्ता अपर जनपद न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-प्रथम हाथरस ने कहा कि प्राचीन समय में महिलाओं की स्थिति दयनीय थी। मध्यकाल में दहेज प्रथा व भ्रूण हत्या एवं अन्य प्रथा का प्रचलन था, जिससे महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी। आज महिलाओं को उनके हक मिल रहे हैं।
वीरेश कुमार श्रोती, अध्यक्ष, जिला बार ऐसोसिएशन ने कहा कि महिलाएं किसी भी मायने में कम नहीं हैं। जिस प्रकार एक मां अपने बेटे का पालन-पोषण करती है उसी प्रकार बेटी का भी पालन-पोषण करना चाहिए। महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इस मौके पर शिवकुमारी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस ने अपने वक्तव्य में कहा कि कि वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है।
उसे ’भोग की वस्तु’ समझकर आदमी ’अपने तरीके’ से ’इस्तेमाल’ कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है, लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किया जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है। नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है।
उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है। इस मौके पर चेतना सिंह, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस, नेगी चौधरी, अपर सिविल जज भावना शर्मा, अपर सिविल जज मिक्की सिंह, कन्या गुरुकुल सासनी की मुख्य संरक्षिका पवित्रा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सुशील कुमार सिंह, सिविल जज (वप्र) ने किया।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर परिवार न्यायालय, हाथरस के प्रांगण में महिला पखवारा/विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन महिलाओं के सशक्तीकरण व अधिकारों के प्रति जागरूकता पर सुनील कुमार सिंह-प्रथम जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस की अध्यक्षता में किया गया।
इस मौके पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं को वेदों-शास्त्रों में महिला शक्ति माना गया है। स्त्री से बड़ा इस धरती पर कोई नहीं है। धन संग्रह में भी स्त्री का बहुत बड़ा योगदान होता है। भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर आजकल की लड़कियों/महिलाओं पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां/महिलाएं आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है, जैसे जल सेना, थल सेना, आर्मी, न्यायिक सेवा, डॉक्टर, अध्यापक, अधिवक्ता आदि में हर स्थान पर आगे बढ़ रही हैं।
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विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों का सही प्रयोग करना चाहिए। कभी भी अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को अधिवक्ता की जरूरत हो तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विधिक, हाथरस में सहायता के संबंध में प्रार्थना पत्र देने पर प्राधिकरण द्वारा जांच के उपरांत नि:शुल्क अधिवक्ता दिया जाता है।
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अखिलेश दुबे, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय हाथरस ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे जानकारी के साथ-साथ संस्कार की भी जानकारी होनी जरूरी है। मुकद्दमेे बाजी में एक ही पक्ष दोषी नहीं होता है, दूसरे पक्ष की थोड़ी कमी होती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दहेज प्रतिशोध अधिनियम धारा 125 भरण पोषण अधिनियम के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि दहेज देना अथवा दहेज लेना दोनों ही अपराध हैं।
वीना चौधरी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधीश, हाथरस ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सशक्त होना चाहिए। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योगेंद्र राम गुप्ता अपर जनपद न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-प्रथम हाथरस ने कहा कि प्राचीन समय में महिलाओं की स्थिति दयनीय थी। मध्यकाल में दहेज प्रथा व भ्रूण हत्या एवं अन्य प्रथा का प्रचलन था, जिससे महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी। आज महिलाओं को उनके हक मिल रहे हैं।
वीरेश कुमार श्रोती, अध्यक्ष, जिला बार ऐसोसिएशन ने कहा कि महिलाएं किसी भी मायने में कम नहीं हैं। जिस प्रकार एक मां अपने बेटे का पालन-पोषण करती है उसी प्रकार बेटी का भी पालन-पोषण करना चाहिए। महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इस मौके पर शिवकुमारी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस ने अपने वक्तव्य में कहा कि कि वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है।
उसे ’भोग की वस्तु’ समझकर आदमी ’अपने तरीके’ से ’इस्तेमाल’ कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक बात है, लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किया जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है। नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है। पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बीतता है। पिता के घर में भी उसे घर का कामकाज करना होता है तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है।
उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है। इस मौके पर चेतना सिंह, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस, नेगी चौधरी, अपर सिविल जज भावना शर्मा, अपर सिविल जज मिक्की सिंह, कन्या गुरुकुल सासनी की मुख्य संरक्षिका पवित्रा आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन सुशील कुमार सिंह, सिविल जज (वप्र) ने किया।

महिला दिवस पर जिला न्यायालय में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन न्याययिक अधिकारी।- फोटो : HATHRAS