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Hathras News: नहीं हुए अल्ट्रासाउंड, सुरक्षित मातृत्व दिवस से मायूस लौटीं महिलाएं
Thu, 25 Sep 2025 05:28 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 25 Sep 2025 05:28 AM IST
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सीएचसी सहपऊ पर गर्भवती महिलाएं अपनी जांच के लिए पंजीकरण कराती हुई
- फोटो : samvad
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के नाम पर बुधवार को फिर लकीर पीटी गई। जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दूर-दराज से पहुंचीं 150 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल सकी। 2,600 महिलाएं पहले से ही कतार में हैं।
दरअसल, पीएम सुरक्षित मातृत्व दिवस में स्वास्थ्य परीक्षण कराने आने वाली महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जाती है। इसके लिए पहले सीएचसी पर स्पर्श पोर्टल पर महिलाओं के पंजीकरण किए जाते हैं। पोर्टल के जरिये ही ई-बाउचर जेनरेट होता है। इसका मेसेज महिलाओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर पहुंच जाता है, जिसे दिखाकर वह निर्धारित केंद्र पर जाकर अल्ट्रासाउंड करा लेती हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से इस पोर्टल में तकनीकी दिक्कत के चलते महिलाओं के पास ऑनलाइन मेसेज नहीं पहुंच पा रहे, जिसकी वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे।
बुधवार को जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए महिलाएं तो बड़ी संख्या में पहुंचीं। कुछ को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह भी दी गई, लेकिन मुफ्त अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची किसी को नहीं मिली।
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सासनी सीएचसी पर आईं 85 में से 40 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सहपऊ में 36 महिलाओं के पंजीकरण हुए। सीएचसी सादाबाद में 125 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ, जिनमें 40 को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। हसायन सीएचसी पर कुल 62 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इनमें से दो को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई, जबकि महौ सीएचसी पर 42 महिलाओं के पंजीकरण हुए। इनमें से 18 को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सिकंदराराऊ में 207 महिलाओें ने पंजीकरण कराया। किसी भी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची नहीं दी गई। पूछने पर कहा गया कि जब पोर्टल चालू हो जाएगा, तब मुफ्त अल्ट्रासाउंड कराए जाएंगे। सीएचसी पर थायराइड और हार्माेंस सहित कई अन्य जांचों की सुविधा भी नहीं है। इस कारण भी इन मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है
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आशा के साथ अपनी जांच एवं अल्ट्रासाउंड के लिए आई थी। पूर्व में डॉक्टर की तरफ से प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र के लिए पर्ची बनाकर दी जाती थी, लेकिन आज नहीं दी गई।
-भावना निवासी जिरौली (सासनी)
- अल्ट्रासाउंड की पर्ची नहीं मिली। अब प्राइवेट सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए खर्चा करना पड़ेगा। पिछले महीने भी बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौटा दिया गया था।
-निकिता निवासी जिरौली (सासनी)
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स्पर्श पोर्टल अभी तक चालू नहीं हुआ है। पोर्टल चालू होते ही निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
-डाॅ.राजीव गुप्ता, एसीएमओ
हेडिंग
जिला अस्पताल हो या सीएचसी, हर जगह संसाधनों और स्टाफ का संकट
हाथरस। प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय संभाल रहे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बृहस्पतिवार को जिले में आ रहे हैं। जाहिर है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा उनके सामने उठेगा। जनप्रतिनिधि भी उनके सामने जिले की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं का इलाज की मांग रखने की तैयारी कर चुके हैं।
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बागला जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों के पद हैं, लेकिन तैनाती महज 13 चिकित्सकों ही है। यानी जरूरत से आधे चिकित्सकों के भरोसे जिला अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं चल रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल में सर्जन, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन और पैथोलॉजिस्ट न होने के चलते मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है।
बागला जिला अस्पताल में बना इमरजेंसी वार्ड सिर्फ रेफरल सेंटर बन रह गया है। यहां इमरजेंसी में आने वाले सड़क हादसों में घायल हुए 10 से 12 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण यहां आकस्मिक चिकित्सा के लिए लगे उपकरण भी धूल फांक रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में जरूरत 89 की, तैनाती सिर्फ 43 डाॅक्टरों की
देहात में 89 के सापेक्ष 43 चिकित्सक ही तैनात हैं। इन चिकित्सकों के सहारे जिले के आठ सीएचसी और 27 पीएचसी का संचालन हो रहा है। प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीज आते हैं।
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टीबी अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाते मरीज
जिला क्षय चिकित्सालय का हाल यह है कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी की वजह से यहां मरीजों को भर्ती कर उपचार नहीं दिया जाता है। परामर्श व दवा देने के बाद मरीज को घर भेज दिया जाता है।
यह है बागला जिला अस्पताल का हाल
चिकित्सकों के स्वीकृत पद-- 25
तैनात चिकित्सक-- 12
महिला चिकित्सकों के स्वीकृत पद-- 14
महिला चिकित्सकों की तैनाती-- 2
एक्स-रे टेक्नीशियन के स्वीकृत पद -2
एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती - 1
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ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
चिकित्सक-- स्वीकृत पद -- तैनाती -- रिक्त पद
लेवल-1 चिकित्सक - 62-- 25 -- 35
लेवल-2 चिकित्सक - 12-- 8 -- 4
लेवल -3 चिकित्सक- 15-- 10 -- 5
कुल स्थिति-- 89 -- 43 -- 46
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सीएचसी पर तैनात चिकित्सकों की स्थिति
सीएचसी-- स्वीकृत पद-- तैनाती
सहपऊ-- 6 - 2
सादाबाद- 8- 3
मुरसान-- 6- 2
महौ-- 5- 2
हसायन-- 6 - 3
सासनी-- 7-- 5
सिकंदराराऊ-- 7 -- 1
कुरसंडा-- 5 -- 1
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उपमुख्यमंत्री जिला अस्पताल का निरीक्षण करेंगे, जो भी कमियां होंंगी, उनसे उन्हें अवगत कराया जाएगा, जिससे जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
-शरद माहेश्वरी, जिलाध्यक्ष भाजपा।
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चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की यहां तैनाती नहीं है। कई बार इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है।
डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ
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यहां आगमन के दौरान उपमुख्यमंत्री को स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को गंभीरता से देखना चाहिए। कम से कम चिकित्सकों व संसाधनों की कमी दूर करने के संबंध में ठोस आश्वासन मिलना चाहिए।
-प्रमोद निवासी चक्की बाजार
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जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लकीर पीटी जा रही है। शहर हो या देहात, सब जगह चिकित्सकों की कमी है। अल्ट्रासाउंड सहित कई जांचों की सुविधा नहीं है। हार्ट का कोई चिकित्सक जिला अस्पताल में नहीं है।
-रिंका निवासी घंटाघर
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दरअसल, पीएम सुरक्षित मातृत्व दिवस में स्वास्थ्य परीक्षण कराने आने वाली महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जाती है। इसके लिए पहले सीएचसी पर स्पर्श पोर्टल पर महिलाओं के पंजीकरण किए जाते हैं। पोर्टल के जरिये ही ई-बाउचर जेनरेट होता है। इसका मेसेज महिलाओं के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर पहुंच जाता है, जिसे दिखाकर वह निर्धारित केंद्र पर जाकर अल्ट्रासाउंड करा लेती हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से इस पोर्टल में तकनीकी दिक्कत के चलते महिलाओं के पास ऑनलाइन मेसेज नहीं पहुंच पा रहे, जिसकी वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे।
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बुधवार को जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए महिलाएं तो बड़ी संख्या में पहुंचीं। कुछ को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह भी दी गई, लेकिन मुफ्त अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची किसी को नहीं मिली।
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सासनी सीएचसी पर आईं 85 में से 40 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सहपऊ में 36 महिलाओं के पंजीकरण हुए। सीएचसी सादाबाद में 125 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ, जिनमें 40 को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। हसायन सीएचसी पर कुल 62 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इनमें से दो को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई, जबकि महौ सीएचसी पर 42 महिलाओं के पंजीकरण हुए। इनमें से 18 को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सिकंदराराऊ में 207 महिलाओें ने पंजीकरण कराया। किसी भी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची नहीं दी गई। पूछने पर कहा गया कि जब पोर्टल चालू हो जाएगा, तब मुफ्त अल्ट्रासाउंड कराए जाएंगे। सीएचसी पर थायराइड और हार्माेंस सहित कई अन्य जांचों की सुविधा भी नहीं है। इस कारण भी इन मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है
आशा के साथ अपनी जांच एवं अल्ट्रासाउंड के लिए आई थी। पूर्व में डॉक्टर की तरफ से प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्र के लिए पर्ची बनाकर दी जाती थी, लेकिन आज नहीं दी गई।
-भावना निवासी जिरौली (सासनी)
- अल्ट्रासाउंड की पर्ची नहीं मिली। अब प्राइवेट सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए खर्चा करना पड़ेगा। पिछले महीने भी बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही लौटा दिया गया था।
-निकिता निवासी जिरौली (सासनी)
स्पर्श पोर्टल अभी तक चालू नहीं हुआ है। पोर्टल चालू होते ही निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
-डाॅ.राजीव गुप्ता, एसीएमओ
हेडिंग
जिला अस्पताल हो या सीएचसी, हर जगह संसाधनों और स्टाफ का संकट
हाथरस। प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय संभाल रहे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बृहस्पतिवार को जिले में आ रहे हैं। जाहिर है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा उनके सामने उठेगा। जनप्रतिनिधि भी उनके सामने जिले की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं का इलाज की मांग रखने की तैयारी कर चुके हैं।
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बागला जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों के पद हैं, लेकिन तैनाती महज 13 चिकित्सकों ही है। यानी जरूरत से आधे चिकित्सकों के भरोसे जिला अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं चल रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। जिला अस्पताल में सर्जन, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन और पैथोलॉजिस्ट न होने के चलते मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है।
बागला जिला अस्पताल में बना इमरजेंसी वार्ड सिर्फ रेफरल सेंटर बन रह गया है। यहां इमरजेंसी में आने वाले सड़क हादसों में घायल हुए 10 से 12 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण यहां आकस्मिक चिकित्सा के लिए लगे उपकरण भी धूल फांक रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में जरूरत 89 की, तैनाती सिर्फ 43 डाॅक्टरों की
देहात में 89 के सापेक्ष 43 चिकित्सक ही तैनात हैं। इन चिकित्सकों के सहारे जिले के आठ सीएचसी और 27 पीएचसी का संचालन हो रहा है। प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीज आते हैं।
टीबी अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाते मरीज
जिला क्षय चिकित्सालय का हाल यह है कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी की वजह से यहां मरीजों को भर्ती कर उपचार नहीं दिया जाता है। परामर्श व दवा देने के बाद मरीज को घर भेज दिया जाता है।
यह है बागला जिला अस्पताल का हाल
चिकित्सकों के स्वीकृत पद
तैनात चिकित्सक
महिला चिकित्सकों के स्वीकृत पद
महिला चिकित्सकों की तैनाती
एक्स-रे टेक्नीशियन के स्वीकृत पद -2
एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती - 1
ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
चिकित्सक
लेवल-1 चिकित्सक - 62
लेवल-2 चिकित्सक - 12
लेवल -3 चिकित्सक- 15
कुल स्थिति
सीएचसी पर तैनात चिकित्सकों की स्थिति
सीएचसी
सहपऊ
सादाबाद- 8- 3
मुरसान
महौ
हसायन
सासनी
सिकंदराराऊ
कुरसंडा
उपमुख्यमंत्री जिला अस्पताल का निरीक्षण करेंगे, जो भी कमियां होंंगी, उनसे उन्हें अवगत कराया जाएगा, जिससे जिले को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
-शरद माहेश्वरी, जिलाध्यक्ष भाजपा।
चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की यहां तैनाती नहीं है। कई बार इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है।
डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ
यहां आगमन के दौरान उपमुख्यमंत्री को स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को गंभीरता से देखना चाहिए। कम से कम चिकित्सकों व संसाधनों की कमी दूर करने के संबंध में ठोस आश्वासन मिलना चाहिए।
-प्रमोद निवासी चक्की बाजार
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लकीर पीटी जा रही है। शहर हो या देहात, सब जगह चिकित्सकों की कमी है। अल्ट्रासाउंड सहित कई जांचों की सुविधा नहीं है। हार्ट का कोई चिकित्सक जिला अस्पताल में नहीं है।
-रिंका निवासी घंटाघर