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शुरू हुआ बीमार गोवंश का उपचार
Sat, 04 May 2019 12:22 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Sat, 04 May 2019 12:22 AM IST
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पराग डेयरी में बनी अस्थायी गोशाला में बीमार पशुओं का इलाज करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला
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सासनी। अस्थायी गोशाला में बंद लाचार पशुओं की व्यवस्था देखने के लिए जिले के चिकित्सकों की टीम ने शुक्रवार को पराग डेयरी परिसर में डेरा डाल दिया। लाचार पशुओं का बारी-बारी से उपचार किया। इस दौरान पराग डेयरी की व्यवस्था में जुटे अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। डीएम के निर्देश पर पशुओं की गिनती का काम भी शुरू करा दिया गया है। चिकित्सकों ने पराग डेयरी में बंद पशुओं की टैगिंग कराना भी शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अस्थायी गोशाला में कोई गोवंश मृत नहीं पाया गया।
दरअसल, डीएम ने अस्थायी गोशाला में मिल रही अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए गुरुवार की शाम को जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। डीएम ने संबंधित अधिकारियों से साफ कह दिया था कि गोशाला में चारे-पानी की कमी नहीं रहनी चाहिए। संबंधित अधिकारी का उतरदायित्व तय करते हुए गोशाला की व्यवस्थाओं के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए थे। छांव के लिए टिनशेड और चारे की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। गोशाला के संचालन के लिए नोडल अधिकारी भी नामित किए गए थे।
पीने के लिए पानी की व्यवस्था के लिए डेयरी परिसर में बड़ी बड़ी हौदी बनाए जाने एवं मृत पशुओं का नियमित पोस्टमार्टम कराए जाने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को जिले के सभी पशु चिकित्साधिकारियों ने पशुओं का उपचार किया है। गोशाला की व्यवस्थाओं के लिए डीएम ने दो दिन में रिपोर्ट तलब की है। इस मौके पर डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. हीरालाल, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. अरविंद शुक्ला, डॉ. सौरभ गुप्ता, मनोज राठी, आरके शर्मा, नरेंद्र सिंह चौहान, हरिवंश वशिष्ठ, रामबाबू शर्मा, दिनेश कुमार, नीलेश चंद, देवलाल, अशोक, विजय आदि मौजूद थे।
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दरअसल, डीएम ने अस्थायी गोशाला में मिल रही अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए गुरुवार की शाम को जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। डीएम ने संबंधित अधिकारियों से साफ कह दिया था कि गोशाला में चारे-पानी की कमी नहीं रहनी चाहिए। संबंधित अधिकारी का उतरदायित्व तय करते हुए गोशाला की व्यवस्थाओं के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए थे। छांव के लिए टिनशेड और चारे की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। गोशाला के संचालन के लिए नोडल अधिकारी भी नामित किए गए थे।
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पीने के लिए पानी की व्यवस्था के लिए डेयरी परिसर में बड़ी बड़ी हौदी बनाए जाने एवं मृत पशुओं का नियमित पोस्टमार्टम कराए जाने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को जिले के सभी पशु चिकित्साधिकारियों ने पशुओं का उपचार किया है। गोशाला की व्यवस्थाओं के लिए डीएम ने दो दिन में रिपोर्ट तलब की है। इस मौके पर डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. हीरालाल, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. अरविंद शुक्ला, डॉ. सौरभ गुप्ता, मनोज राठी, आरके शर्मा, नरेंद्र सिंह चौहान, हरिवंश वशिष्ठ, रामबाबू शर्मा, दिनेश कुमार, नीलेश चंद, देवलाल, अशोक, विजय आदि मौजूद थे।
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