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Hathras News: सुबह से कतार में लगते हैं, शाम को लौट जाते हैं खाली हाथ
Thu, 21 Aug 2025 02:54 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 21 Aug 2025 02:54 AM IST
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सिकंदराराऊ में किसान सेवा केंद्र पर खाद लेने के लिए बैठीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : Samvad
जिले के सिकंदराराऊ, सहपऊ और हसायन क्षेत्र में इन दिनों में यूरिया न मिलने से धान बोने वाले किसान खासे परेशान हैं। आलम यह है कि यूरिया लेने के लिए सुबह से ही सहकारी समितियों और किसान सेवा केंद्रों के आगे किसान खुद ही कतार लगाकर बैठ जाते हैं और दिन भर इंतजार करने के बाद निराश होकर लौट जाते हैं।
जिले में इन दिनों किसानों को धान की फसल में यूरिया लगाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। आलम यह है कि सिकंदराराऊ क्षेत्र में यूरिया न होने की वजह से कृषक भारती सेवा केंद्र पर बुधवार को ताला लटका रहा। सहकारी समितियों पर पहुंचने वाले किसानों को भी यूरिया की उपलब्धता न होने से मायूस होकर लौटना पड़ा।
कृषक भारती सेवा केंद्र पर यूरिया लेने के लिए सुबह से ही किसान बंद केंद्र के आगे कतार लगाकर बैठ गए। किसान इस आस में रहे कि यूरिया आने पर केंद्र खुलेगा, लेकिन शाम तक यूरिया नहीं आई। हसायन क्षेत्र की सहकारी समितियों पर भी यूरिया के लिए पहुंचने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ा। ऐसा ही हाल सहपऊ की गुतहरा सहकारी समिति का है। यहां भी यूरिया न होने की वजह से पिछले पांच दिनों से किसान बैरंग लौट रहे हैं।
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किसान केंद्रों व सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत बनी हुई है। सुबह से यूरिया के लिए कतार में लग जाते हैं और शाम को बिना यूरिया के ही वापस लौट जाते हैं।
-भीकम सिंह निवासी गांव मानिकपुर
हमारे क्षेत्र में धान की पैदावार होती है। इन दिनों धान की फसल के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। यूरिया न होने से धान की फसल खराब होने की आशंका बनी हुई है।
कमल किशोर निवासी गांव महमूदपुर नगला ढक
समिति पर खाद का वितरण टोकन सिस्टम से न करके कतार लगाकर किया जाता है। ऐसे में 80 साल के वृद्ध किसानों को कतार में खड़े होकर परेशानी उठानी पड़ती है। सचिव से टोकन देने के लिए कहा जाता है, लेकिन वह ऐसा नहीं करते हैं।
-रेनू देवी, अध्यक्ष साधन सहकारी समिति मऊ चिरायल।
जिले में सभी जगह पर पर्याप्त यूरिया की उपलब्धता है। छह हजार मीट्रिक टन यूरिया जिले में वर्तमान में उपलब्ध है। डीएपी की 2600 एमटी की रैक लग गई है। अगर कहीं यूरिया नहीं है तो दूसरी दुकान से यूरिया ली जा सकती है।
-निखिल देव, जिला कृषि अधिकारी
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जिले में इन दिनों किसानों को धान की फसल में यूरिया लगाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। आलम यह है कि सिकंदराराऊ क्षेत्र में यूरिया न होने की वजह से कृषक भारती सेवा केंद्र पर बुधवार को ताला लटका रहा। सहकारी समितियों पर पहुंचने वाले किसानों को भी यूरिया की उपलब्धता न होने से मायूस होकर लौटना पड़ा।
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कृषक भारती सेवा केंद्र पर यूरिया लेने के लिए सुबह से ही किसान बंद केंद्र के आगे कतार लगाकर बैठ गए। किसान इस आस में रहे कि यूरिया आने पर केंद्र खुलेगा, लेकिन शाम तक यूरिया नहीं आई। हसायन क्षेत्र की सहकारी समितियों पर भी यूरिया के लिए पहुंचने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ा। ऐसा ही हाल सहपऊ की गुतहरा सहकारी समिति का है। यहां भी यूरिया न होने की वजह से पिछले पांच दिनों से किसान बैरंग लौट रहे हैं।
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किसान केंद्रों व सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत बनी हुई है। सुबह से यूरिया के लिए कतार में लग जाते हैं और शाम को बिना यूरिया के ही वापस लौट जाते हैं।
-भीकम सिंह निवासी गांव मानिकपुर
हमारे क्षेत्र में धान की पैदावार होती है। इन दिनों धान की फसल के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। यूरिया न होने से धान की फसल खराब होने की आशंका बनी हुई है।
कमल किशोर निवासी गांव महमूदपुर नगला ढक
समिति पर खाद का वितरण टोकन सिस्टम से न करके कतार लगाकर किया जाता है। ऐसे में 80 साल के वृद्ध किसानों को कतार में खड़े होकर परेशानी उठानी पड़ती है। सचिव से टोकन देने के लिए कहा जाता है, लेकिन वह ऐसा नहीं करते हैं।
-रेनू देवी, अध्यक्ष साधन सहकारी समिति मऊ चिरायल।
जिले में सभी जगह पर पर्याप्त यूरिया की उपलब्धता है। छह हजार मीट्रिक टन यूरिया जिले में वर्तमान में उपलब्ध है। डीएपी की 2600 एमटी की रैक लग गई है। अगर कहीं यूरिया नहीं है तो दूसरी दुकान से यूरिया ली जा सकती है।
-निखिल देव, जिला कृषि अधिकारी