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चुनाव परिणाम से पहले ही अध्यक्ष पद के दावेदारों की रणनीति शुरू

Fri, 23 Apr 2021 11:32 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Apr 2021 11:32 PM IST
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The strategy of the candidates for the post of president started before the election results.
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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पंचायत चुनाव में मतगणना की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदारों ने ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर अपने खेमे में लेने की कोशिश करना शुरू कर दिया है, जिनके जीतने की संभावनाएं प्रबल लग रही हैं। उन पर अभी से डोरे डाले जा रहे हैं। इसके लिए रणनीति भी तैयार की जा रही है। जिले में 24 जिला पंचायत सदस्यों के लिए मतदान हो रहा है। ऐसे में अध्यक्ष पद पाने के लिए दावेदार को 13 का आंकड़ा जुटाना होगा।
पंचायत चुनाव के लिए जिले में मतदान हो चुका है और मतगणना दो मई को होगी। ऐसे में सबकी टकटकी परिणाम पर लगी है। पिछली बार की तरह भी इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित है। ऐसे में इस पद के लिए फिर कड़ा मुकाबला होगा। जिले में अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष के पद ज्यादातर पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार के पास ही रहा है।
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पिछली बार ओमवती यादव इस पद पर काबिज हुई थी। इस बार फिर रामवीर उपाध्याय परिवार के चार सदस्य जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव मैदान में उतरे। इसमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय का मुकाबला अपनी देवरानी व पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी रितु उपाध्याय से हुआ। इसके अलावा रामवीर के छोटे भाई व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय और विनोद उपाध्याय की पत्नी सरोज उपाध्याय भी चुनावी मैदान में उतरी।
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इसी तरह पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमवती यादव भी दो वार्डों से चुनाव मैदान में उतरी। हालांकि मतगणना के बाद यह तय होगा कि कौन सा उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य बना है। उसके बाद ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए स्थिति स्पष्ट हो सकेगी लेकिन फिर भी यह माना जा रहा है कि कुछ अध्यक्ष पद के लिए ही सदस्य का चुनाव लड़े हैं।
इसमें विनोद उपाध्याय, सीमा उपाध्याय, ओमवती यादव, रितु उपाध्याय शामिल हैं। कुछ अन्य राजनेता भी इसमें शामिल हैं। हालांकि सीमा उपाध्याय के बारे में नामांकन करते समय यह बात पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने कही थी कि उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय सदस्य पद के लिए ही चुनाव लड़ रही हैं और अध्यक्ष पद के लिए वह विनोद उपाध्याय को समर्थन देंगे लेकिन राजनीति में ऊंट किस करवट बैठ जाए, ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
ऐसे में अध्यक्ष पद के दावेदारों ने अभी से ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर उनकी टोह लेना और उन पर डोरे डालना शुरू कर दिया है, जोकि उन्हें जीतते हुए नजर आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि किसी भी पार्टी ने इस चुनाव को अपने चिन्ह पर नहीं लड़ाया है। इसलिए इस चुनाव में धनबल ही सबसे ज्यादा प्रभावी होता है।

अध्यक्ष पद के दावेदार अभी से इस कोशिश में लगे हैं कि पहले से ही ऐसे संभावित विजयी उम्मीदवार को अपने खेमे में शामिल कर लिया जाए, जिससे कि उनके अध्यक्ष पद की राह आसान हो जाए और ऐन वक्त पर उन्हें ज्यादा पसीना न बहाना पड़े। यह दावेदार क्षेत्र में अपने समर्थकों से इसकी टोह भी सदस्य पद का चुनाव लड़ने वाले किस प्रत्याशी की जीत पक्की है। उसे अपने खेमे में लेने की कोशिशें अभी से तेज कर दी गई हैं।
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