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चूड़ी की खनक के साथ इत्र की खुशबू भी पड़ गई फीकी
Fri, 12 Apr 2019 12:06 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:06 AM IST
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एक कारखाने में चूड़ी तैयार करते कारीगर।
- फोटो : अमर उजाला
हसायन। सरकार और जिला प्रशासन की उपेक्षाओं के कारण कस्बा के उद्योग-धंधे दम तोड़ते जा रहे हैं। कस्बा के दो प्रमुख उद्योग (चूड़ी और इत्र) का हाल भी बुरा हो गया है। चूड़ी उद्योग से जुड़े फैक्टरी मालिक, कारीगर और मजदूरों के सामने भूखमरी की स्थिति आ गई है। वहीं इत्र उद्योग की भी हालत खस्ता हो गई है।
अब इस उद्योग से जुड़े मालिक, कारीगर और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही जनप्रतिनिधि क्षेत्र का दौरा शुरू कर देते हैं लेकिन, चुनाव जीतने के बाद वे कभी दर्शन नहीं देते। जब हमलोग अपनी समस्याएं उनके सामने रखते हैं बदले में सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
दो दशक पूर्व कस्बा में दो दर्जन सें ज्यादा चूड़ी की मिनी फैक्ट्रियां थी। वर्तमान में यह कारोबार अब गिने चुने जगहों पर ही रह गया है। यहां की इत्र की खुश्बू काफी दूर-दूर तक जाती थी। दूर-दराज के व्यापारी यहां गुलाब के फूलों से गुलाब रूह, गुलाब जल तैयार करवा कर ले जाते थे जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिलता था। लेकिन, सरकारी सहायता नहीं मिलने और और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण अब यहां उद्योग धंधा चौपट हो गया है।
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अब इस उद्योग से जुड़े मालिक, कारीगर और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही जनप्रतिनिधि क्षेत्र का दौरा शुरू कर देते हैं लेकिन, चुनाव जीतने के बाद वे कभी दर्शन नहीं देते। जब हमलोग अपनी समस्याएं उनके सामने रखते हैं बदले में सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
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दो दशक पूर्व कस्बा में दो दर्जन सें ज्यादा चूड़ी की मिनी फैक्ट्रियां थी। वर्तमान में यह कारोबार अब गिने चुने जगहों पर ही रह गया है। यहां की इत्र की खुश्बू काफी दूर-दूर तक जाती थी। दूर-दराज के व्यापारी यहां गुलाब के फूलों से गुलाब रूह, गुलाब जल तैयार करवा कर ले जाते थे जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिलता था। लेकिन, सरकारी सहायता नहीं मिलने और और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण अब यहां उद्योग धंधा चौपट हो गया है।
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