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17 की उम्र में रसिया की दुनिया में रखा कदम, 77 में ली अंतिम सांस
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रसिया की दुनिया में बजता था बिजेंद्र का डंका
17 साल की उम्र में रसिया की दुनिया में रखा कदम, 77 की उम्र में दुनिया से विदाई ली
रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा का निधन, श्रोताओं में दौड़ी शोक की लहर
कई भजन और नाटक भी रचे बिजेंद्र शर्मा ने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। शहर के नाई पाड़ा के रहने वाले रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा का गुरुवार को निधन हो गया। 17 वर्ष की उम्र में रसिया गायिकी की दुनिया में कदम रखा और 77 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा के निधन से उनके लाखों श्रोताओं में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने काफी भजन और नाटकों के वह रचनाकार भी रहे।
बृज की द्वार देहरी हाथरस का मल्ल विद्या और रसिया दंगल से खासा नाता है। रसिया दंगल में भी जिले के कलाकारों ने अन्य प्रांतों में हाथरस का नाम रोशन किया है। बिजेंद्र शर्मा इन्हीं कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने रसिया की विधा को दूर-दूर तक फैलाया। माहौल को देखकर रसिया पढ़ना बिजेंद्र शर्मा की कला थी।
हरदुआगंज में मिली थी रसिया सम्राट की उपाधि
बिजेंद्र शर्मा पुत्र कन्हैयालाल शर्मा ने अपने नाना बद्री प्रसाद के साथ 17 साल की उम्र में रसिया दंगल की दुनिया में कदम रखा। उसके बाद लाला खिच्चोमल आटे वालों के अखाड़े में शामिल हुए। इसके बाद वह रसिया गायिकी में अपनी छाप छोड़ते चले गए। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा यूपी मेें भी अच्छी खासी पहचान बनाई। जानकार बताते हैं कि हरदुआगंज के बनवारीलाल शर्मा रसिया शिरोमणी के रूप में जाने जाते थे। जब एक बार हरदुआगंज में कार्यक्रम हो रहा था। तब बीके मधुआ राया को बृज केसरी और बिजेंद्र शर्मा को वर्ष 1982 में रसिया सम्राट की उपाधि बनवारी लाल शर्मा ने प्रदान की। पत्थर की राधा प्यारी पत्थर के कृष्ण मुरारी आदि भजनों के अलावा वीर अभिमन्यु, भक्त प्रहलाद, मोरध्वज नाटक आदि में भी सहभागिता निभाई। श्यामसुंदर शर्मा मांट, चौधरी अजीत सिंह, पूर्व ऊर्जामंत्री रामवीर उपाध्याय, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव ने उन्हें कार्यक्रम के जरिए मंचों पर सम्मानित किया।
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दो साल से था स्वास्थ्य खराब
रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा की दो साल से तबियत खराब चल रही थी। उन्हें पैरालाइसिस हो गया था। गुरुवार की सुबह साढ़े नौ बजे आगरा के पारस अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से रसिया प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।
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17 साल की उम्र में रसिया की दुनिया में रखा कदम, 77 की उम्र में दुनिया से विदाई ली
रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा का निधन, श्रोताओं में दौड़ी शोक की लहर
कई भजन और नाटक भी रचे बिजेंद्र शर्मा ने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। शहर के नाई पाड़ा के रहने वाले रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा का गुरुवार को निधन हो गया। 17 वर्ष की उम्र में रसिया गायिकी की दुनिया में कदम रखा और 77 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा के निधन से उनके लाखों श्रोताओं में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने काफी भजन और नाटकों के वह रचनाकार भी रहे।
बृज की द्वार देहरी हाथरस का मल्ल विद्या और रसिया दंगल से खासा नाता है। रसिया दंगल में भी जिले के कलाकारों ने अन्य प्रांतों में हाथरस का नाम रोशन किया है। बिजेंद्र शर्मा इन्हीं कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने रसिया की विधा को दूर-दूर तक फैलाया। माहौल को देखकर रसिया पढ़ना बिजेंद्र शर्मा की कला थी।
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हरदुआगंज में मिली थी रसिया सम्राट की उपाधि
बिजेंद्र शर्मा पुत्र कन्हैयालाल शर्मा ने अपने नाना बद्री प्रसाद के साथ 17 साल की उम्र में रसिया दंगल की दुनिया में कदम रखा। उसके बाद लाला खिच्चोमल आटे वालों के अखाड़े में शामिल हुए। इसके बाद वह रसिया गायिकी में अपनी छाप छोड़ते चले गए। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा यूपी मेें भी अच्छी खासी पहचान बनाई। जानकार बताते हैं कि हरदुआगंज के बनवारीलाल शर्मा रसिया शिरोमणी के रूप में जाने जाते थे। जब एक बार हरदुआगंज में कार्यक्रम हो रहा था। तब बीके मधुआ राया को बृज केसरी और बिजेंद्र शर्मा को वर्ष 1982 में रसिया सम्राट की उपाधि बनवारी लाल शर्मा ने प्रदान की। पत्थर की राधा प्यारी पत्थर के कृष्ण मुरारी आदि भजनों के अलावा वीर अभिमन्यु, भक्त प्रहलाद, मोरध्वज नाटक आदि में भी सहभागिता निभाई। श्यामसुंदर शर्मा मांट, चौधरी अजीत सिंह, पूर्व ऊर्जामंत्री रामवीर उपाध्याय, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव ने उन्हें कार्यक्रम के जरिए मंचों पर सम्मानित किया।
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दो साल से था स्वास्थ्य खराब
रसिया सम्राट बिजेंद्र शर्मा की दो साल से तबियत खराब चल रही थी। उन्हें पैरालाइसिस हो गया था। गुरुवार की सुबह साढ़े नौ बजे आगरा के पारस अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से रसिया प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।