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परिवार के उत्पीड़न के खिलाफ उठाई थी बंदूक

Wed, 18 Jan 2017 11:39 PM IST
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस Updated Wed, 18 Jan 2017 11:39 PM IST
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The family had raised his gun against harassment
पत्रकार वार्ता करते डाकू से ब्रह्माकुमार बने पंचम सिंह। - फोटो : अमर उजाला
खतरनाक डाकू से ब्रह्माकुमार बने पंचम सिंह का कहना है कि परिस्थितियां मनुष्य को कहां से कहां तक पहुंचा देती हैं। एक क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के बाद जब मेरे परिवार का उत्पीड़न हुआ तो मैने बंदूक उठा ली। उन्होंने बंदूक उठा ली और छह लोगों को पहली दफा में ही ढेर कर दिया। बाद में इनके गिरोह पर दो करोड़ का इनाम घोषित किया गया।
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अलीगढ़ रोड पर ब्रह्माकुमारीज मार्ग स्थित केंद्र पर पत्रकारों से बातचीत में पंचम सिंह ने कहा कि उनका जन्म 15 अप्रैल 1923 को सींगपुरा, भिंड, मुरैना में हुआ था। मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह कर दिया गया। उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
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तत्कालीन समाज सुधारक और राजनीतिज्ञ जयप्रकाश नारायण को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से प्रेरणा मिली। तब 1972 में उन्होंने अपनी आठ शर्तें रखते हुए साढ़े पांच सौ डाकुओं के साथ सरेंडर किया था। हालांकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन प्रधानमंत्री एवं जयप्रकाश नारायण के प्रयास से राष्ट्रपति ने इनकी सजा को उम्र कैद में परिवर्तित किया, परंतु अपने अच्छे व्यवहार के कारण ये जल्द ही रिहा हो गए।
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भ्रष्टाचार को समाज का कोढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि एकता में वो शक्ति है, जिससे हमने अपनी शर्तों को सरकार से मनवा लिया तो क्या भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता है। उन्होंने कभी किसी गरीब को नहीं सताया। यदि भूलवश किसी गरीब को कष्ट हुआ हो उस पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी डाकू की किसी ने कोई जागीर देखी है।


हम अमीरों को लूटकर गरीबों में लुटा दिया करते थे। उनकी बहन-बेटियों के विवाह आदि में मदद करना हमारा उसूल था। किसी भी बहन-बेटी की तरफ  गिरोह का कोई भी सदस्य आंख नहीं उठा सकता था।  साधारण कुर्ता-पाजामा की वेषभूशा में बैठे हुए साढे़ 500 डाकुओं के सरदार और दो करोड़ के ईनामी डाकू पंचम सिंह को देखकर लगता ही नहीं था कि वह इतने खतरनाक भी हो सकते हैं। एक समय था जब उनके आतंक को देखते हुए सरकार को भी उनकी शर्त मानने को मजबूर होना पड़ा था।  इस दौरान आनंदपुरी केंद्र प्रभारी राजयोग शिक्षिका बीके शांता आदि मौजूद थे।
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