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जिला पंचायत में बसपा की बादशाहत का अंत
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस/ विकास शर्मा
Updated Tue, 22 Aug 2017 11:47 PM IST
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जिला पंचायत
- फोटो : Amar Ujala
जिला पंचायत में 20 साल से चल रही बसपा की बादशाहत का आखिरकार अंत हो गया। एक साल पहले जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए बसपा के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जीतने के बाद संयुक्त विरोधी दल उपचुनाव में भी बसपा को मात देने में कामयाब रहा।
उपचुनाव के नतीजे से न केवल जिले में बसपा का सियासी कद घटा है, बल्कि पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के एकतरफा सियासी रसूख के लिए भी यह बड़ा झटका है।
यह पहला मौका नहीं है, जब बसपा विरोधी सभी दल मिलकर पूर्व मंत्री परिवार के खिलाफ कोई चुनाव लड़े हाें। वर्ष 1997 में हाथरस के जिला बनने के बाद से अब तक इस पद के लिए हुए चुनाव में बसपा विरोधियों ने हर बार मिलकर ही रामवीर परिवार या उनके प्रत्याशी के खिलाफ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा है, लेकिन हर बार संयुक्त विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी।
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वर्ष 2016 में भी सपा, भाजपा और रालोद के सदस्यों ने मिलकर पूर्व मंत्री रामवीर के भाई विनोद उपाध्याय के खिलाफ सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव को पूरे दमखम से चुनाव लड़वाया था, लेकिन यहां भी पूर्व मंत्री विपक्षी एकता को मात देने में कामयाब रहे। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी रामवीर उपाध्याय ने सादाबाद सीट को 26 हजार से भी ज्यादा वोटों के बडे़ अंतर से जीतकर सियासी साख बनाए रखी थी।
तीन महीने पहले सत्ताधारी भाजपा की मदद से जिस तरह विरोधी दलों ने मिलकर उनके परिवार की घेराबंदी की, उसमें पूर्व मंत्री का परिवार उलझकर रह गया। पहले अविश्वास प्रस्ताव में पूर्व मंत्री के भाई विनोद उपाध्याय को करारी हार का सामना करना पड़ा। सियासी साख बचाए रखने के लिए इस परिवार के सामने जिला पंचायत अध्यक्ष का उपचुनाव जीतने की कड़ी चुनौती थी। इस चुनौती से पार पाने के लिए पूर्व मंत्री परिवार ने पूरी ताकत झोंक दी। ऐनवक्त तक विपक्षी एकता को बिखरने की पूरी कोशिश की गई। बावजूद इसके पूर्व मंत्री के छोटे भाई रामेश्वर उपाध्याय को जीत नसीब नहीं हो सकी।
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उपचुनाव के नतीजे से न केवल जिले में बसपा का सियासी कद घटा है, बल्कि पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के एकतरफा सियासी रसूख के लिए भी यह बड़ा झटका है।
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यह पहला मौका नहीं है, जब बसपा विरोधी सभी दल मिलकर पूर्व मंत्री परिवार के खिलाफ कोई चुनाव लड़े हाें। वर्ष 1997 में हाथरस के जिला बनने के बाद से अब तक इस पद के लिए हुए चुनाव में बसपा विरोधियों ने हर बार मिलकर ही रामवीर परिवार या उनके प्रत्याशी के खिलाफ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा है, लेकिन हर बार संयुक्त विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी।
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वर्ष 2016 में भी सपा, भाजपा और रालोद के सदस्यों ने मिलकर पूर्व मंत्री रामवीर के भाई विनोद उपाध्याय के खिलाफ सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव को पूरे दमखम से चुनाव लड़वाया था, लेकिन यहां भी पूर्व मंत्री विपक्षी एकता को मात देने में कामयाब रहे। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी रामवीर उपाध्याय ने सादाबाद सीट को 26 हजार से भी ज्यादा वोटों के बडे़ अंतर से जीतकर सियासी साख बनाए रखी थी।
तीन महीने पहले सत्ताधारी भाजपा की मदद से जिस तरह विरोधी दलों ने मिलकर उनके परिवार की घेराबंदी की, उसमें पूर्व मंत्री का परिवार उलझकर रह गया। पहले अविश्वास प्रस्ताव में पूर्व मंत्री के भाई विनोद उपाध्याय को करारी हार का सामना करना पड़ा। सियासी साख बचाए रखने के लिए इस परिवार के सामने जिला पंचायत अध्यक्ष का उपचुनाव जीतने की कड़ी चुनौती थी। इस चुनौती से पार पाने के लिए पूर्व मंत्री परिवार ने पूरी ताकत झोंक दी। ऐनवक्त तक विपक्षी एकता को बिखरने की पूरी कोशिश की गई। बावजूद इसके पूर्व मंत्री के छोटे भाई रामेश्वर उपाध्याय को जीत नसीब नहीं हो सकी।