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नहीं आए डॉक्टर, मां की गोद में मरा मासूम
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sat, 01 Oct 2016 11:40 PM IST
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बच्चे की मौत के बाद सीने से लगाकर विलाप करते उसकी मां।
- फोटो : amar ujala
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बुखार से मचे हाहाकार के बीच सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की पोल शनिवार की सुबह सासनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक बार फिर खुली। 20 दिन के नवजात शिशु ने इलाज के इंतजार में अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत से मां सदमे में आ गई। काफी करुण-क्रंदन करने के बाद घर लौट गई। इगलास रोड निवासी डौली अपने बच्चे को दिखाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर लाई थीं।
सासनी सीएचसी पर मरीजों के इलाज में एक नहीं, बल्कि ऐसे कई मामले शनिवार को सामने आए, जिनसे मरीजों में काफी गुस्सा दिखा। नाराज मरीजों और उनके तीमारदारों ने वहां हंगामा भी किया।
शनिवार को करीब 11 बजे तक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के चैंबर्स पर ताले लटके हुए थे। फार्मासिस्ट के अलावा कोई डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था।
मरीज पर्चा लेकर स्वास्थ्य केंद्र भवन और ग्राउंड में चक्कर काट रहे थे। 11 बजे के बाद एकमात्र डॉक्टर वहां आए। बीमार बच्चे को गोद में लेकर डॉक्टर का इंतजार कर रही महिला अनुराधा निवासी देदामई डॅाक्टर से भिड़ गईं। जमकर खरी-खोटी सुनाईं। बुखार से पीड़ित मोहन नामक एक मरीज डाक्टरों का इंतजार करते-करते बैंच पर ही अचेत हो गया, जबकि कई मरीज बेड पर पडे़ डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे।
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दिव्यांग मरीज टीटू और कविता भी स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के लिए गए थे। मरीजों की शिकायत सुनकर डॉक्टर बिफर गए। बोले, क्या आप लोगों के पीछे मैं अपना काम छोड़ दूं। सवाल यह है कि बुखार से मचे हाहाकार के बीच डॉक्टर्स के इस रवैये के चलते मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है।
जिस बच्चे की अस्पताल में मौत की बात कही जा रही है, उसके परिजन उसे मृत अवस्था में ही लेकर आए थे। अस्पताल में किसी भी मरीज से कोई अभद्रता नहीं की गई। डॉक्टर और स्टाफ भी सुबह सवा दस बजे तक अस्पताल पहुंच गया था। किसी द्वेष से प्रेरित होकर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनमें कोई दम नहीं है।
- डॉ. प्रदीप रावत, सीएचसी प्रभारी सासनी
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सासनी सीएचसी पर मरीजों के इलाज में एक नहीं, बल्कि ऐसे कई मामले शनिवार को सामने आए, जिनसे मरीजों में काफी गुस्सा दिखा। नाराज मरीजों और उनके तीमारदारों ने वहां हंगामा भी किया।
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शनिवार को करीब 11 बजे तक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के चैंबर्स पर ताले लटके हुए थे। फार्मासिस्ट के अलावा कोई डॉक्टर वहां मौजूद नहीं था।
मरीज पर्चा लेकर स्वास्थ्य केंद्र भवन और ग्राउंड में चक्कर काट रहे थे। 11 बजे के बाद एकमात्र डॉक्टर वहां आए। बीमार बच्चे को गोद में लेकर डॉक्टर का इंतजार कर रही महिला अनुराधा निवासी देदामई डॅाक्टर से भिड़ गईं। जमकर खरी-खोटी सुनाईं। बुखार से पीड़ित मोहन नामक एक मरीज डाक्टरों का इंतजार करते-करते बैंच पर ही अचेत हो गया, जबकि कई मरीज बेड पर पडे़ डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे।
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दिव्यांग मरीज टीटू और कविता भी स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के लिए गए थे। मरीजों की शिकायत सुनकर डॉक्टर बिफर गए। बोले, क्या आप लोगों के पीछे मैं अपना काम छोड़ दूं। सवाल यह है कि बुखार से मचे हाहाकार के बीच डॉक्टर्स के इस रवैये के चलते मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है।
जिस बच्चे की अस्पताल में मौत की बात कही जा रही है, उसके परिजन उसे मृत अवस्था में ही लेकर आए थे। अस्पताल में किसी भी मरीज से कोई अभद्रता नहीं की गई। डॉक्टर और स्टाफ भी सुबह सवा दस बजे तक अस्पताल पहुंच गया था। किसी द्वेष से प्रेरित होकर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनमें कोई दम नहीं है।
- डॉ. प्रदीप रावत, सीएचसी प्रभारी सासनी