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हाथरस से भी गुजरी हाईस्पीड टेलगो ट्रेन
ब्यूूूराे अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:10 AM IST
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Talgo train
- फोटो : amar ujala
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हाथरस। स्पेन की हाईस्पीड टेलगो ट्रेन के कोच और भारतीय इंजन वाली ट्रेन बीते बुधवार को सिटी स्टेशन से गुजरी और आगरा रामनगर एक्सप्रेस ट्रेन से क्रॉसिंग के कारण 14 मिनट तक रुकी भी रही। इस दौरान ट्रेन को देखने के लिए लोगों में होड़ मची रही।
रेलवे के इज्जतनगर मंडल के एसएसआई आलोक शर्मा ने बताया कि मथुरा और पलवल के बीच टेलगो ट्रेन के कोचों का दूसरा ट्रायल होना है। बरेली और मुरादाबाद के बीच पहले ट्रायल के बाद कोचों को बुधवार को इज्जतनगर से मथुरा ले जाया जा रहा था, ताकि दूसरा ट्रायल हो सके। हाथरस तक यह ट्रेन नौ कोचों के साथ 115 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पहुंची। इस ट्रेन की क्षमता पुराने ट्रैक पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की है।
टेलगो ट्रेन को भारतीय इंजन से ही खींचा जाएगा
स्पेन से आए इसके कोच 30 साल पुराने हैं, लेकिन सही रखरखाव के कारण नए दिखाई पड़ते हैं। स्पेन की टेलगो कंपनी ने निशुल्क यह कोच भारत में ट्रायल के लिए भेजे हैं। ट्रायल सफल होने के बाद इस कंपनी के नए कोच भारतीय रेल के साथ जुड़ जाएंगे। हाथरस सिटी स्टेशन पर ट्रेन देखने के बाद यह कोच भारतीय रेल के डिब्बों से ज्यादा बेहतर नजर आएं। प्रत्येक कोच में केवल दो पहिए होते हैं। दो पहियों के बीच कमानी और सामान्य शॉकर नहीं होते बल्कि शॉकर में हाइड्रोलिक पावर होने के कारण हाईस्पीड में यात्रा के दौरान न तो झटके लगते हैं और न ही कंपन होता है। बड़े साइज की खिड़की और वैक्यूम टॉयलेट से यह ट्रेन ज्यादा सुविधाजनक है। सीटों के बीच ज्यादा दूरी से यह ज्यादा आरामदायक भी है।
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रेलवे के इज्जतनगर मंडल के एसएसआई आलोक शर्मा ने बताया कि मथुरा और पलवल के बीच टेलगो ट्रेन के कोचों का दूसरा ट्रायल होना है। बरेली और मुरादाबाद के बीच पहले ट्रायल के बाद कोचों को बुधवार को इज्जतनगर से मथुरा ले जाया जा रहा था, ताकि दूसरा ट्रायल हो सके। हाथरस तक यह ट्रेन नौ कोचों के साथ 115 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पहुंची। इस ट्रेन की क्षमता पुराने ट्रैक पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की है।
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टेलगो ट्रेन को भारतीय इंजन से ही खींचा जाएगा
स्पेन से आए इसके कोच 30 साल पुराने हैं, लेकिन सही रखरखाव के कारण नए दिखाई पड़ते हैं। स्पेन की टेलगो कंपनी ने निशुल्क यह कोच भारत में ट्रायल के लिए भेजे हैं। ट्रायल सफल होने के बाद इस कंपनी के नए कोच भारतीय रेल के साथ जुड़ जाएंगे। हाथरस सिटी स्टेशन पर ट्रेन देखने के बाद यह कोच भारतीय रेल के डिब्बों से ज्यादा बेहतर नजर आएं। प्रत्येक कोच में केवल दो पहिए होते हैं। दो पहियों के बीच कमानी और सामान्य शॉकर नहीं होते बल्कि शॉकर में हाइड्रोलिक पावर होने के कारण हाईस्पीड में यात्रा के दौरान न तो झटके लगते हैं और न ही कंपन होता है। बड़े साइज की खिड़की और वैक्यूम टॉयलेट से यह ट्रेन ज्यादा सुविधाजनक है। सीटों के बीच ज्यादा दूरी से यह ज्यादा आरामदायक भी है।
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