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पढ़ाई के प्रति परिषदीय स्कूलों के छात्रों को बनाया जाएगा सक्रिय
Tue, 12 Mar 2019 12:16 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Tue, 12 Mar 2019 12:16 AM IST
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सादाबाद ब्लाक संसाधन केंद्र पर पढ़े भारत, बढ़े भारत के तहत दिए गए प्रशिक्षण में चार्ट प्रस्तुत करते शिक्षक।
- फोटो : अमर उजाला
सादाबाद। छात्र छात्राएं सक्रिय रूप से पढने लिखने की प्रक्रिया से जुड़ सकें, इसलिए ब्लाक संसाधन केंद्र पर सोमवार को शिक्षकों को पढ़े भारत बढ़े भारत के तहत लिखित समृद्ध वातावरण और पुस्तकालय प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षणकर्ता अनुज कुमार, रिंकी बंसल, कृष्ण गोपाल और निशांत कुमार ने प्रशिक्षण देते हुए समझाया कि लिखित सामग्री से समृद्ध वातावरण मूल रूप से बच्चोंके चारों ओर विभिन्न प्रकार की लिखित सामग्री तक पहुंच को सुनिश्चित करता है, जो आगे चलकर बच्चों में पढने के प्रति जिज्ञासा पैदा करता है। कक्षा के वातावरण में बहुत प्रकार की लिखित सामग्री होने से बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि बोली गई भाषा को विभिन्न एवं रोचक छवियों और प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।
लिखित समृद्ध वातावरण तभी सार्थक है, जब यह बच्चों के अनुभव और विचार दर्शाता है और उनकी रूचि और आकांक्षा के साथ जुड़ाव रखता है। ऐसा वातावरण जाने अनजाने में बच्चों को लिखित भाषा के नियमों को समझने में भी मदद करता है। उन्होने पठन का अर्थ समझाते हुए इनके दोषों का निवारण कैसे किया जाए, पर भी चर्चा की।
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शिक्षकों ने भाषा और गणित संक्रियाओं से संबंधित कहानी को चार्ट बनाकर प्रस्तुत किया। इस मौके पर एबीआरसी राकेश कुमार, रंधीर सिंह, ज्योति वाष्र्णेय आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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प्रशिक्षणकर्ता अनुज कुमार, रिंकी बंसल, कृष्ण गोपाल और निशांत कुमार ने प्रशिक्षण देते हुए समझाया कि लिखित सामग्री से समृद्ध वातावरण मूल रूप से बच्चोंके चारों ओर विभिन्न प्रकार की लिखित सामग्री तक पहुंच को सुनिश्चित करता है, जो आगे चलकर बच्चों में पढने के प्रति जिज्ञासा पैदा करता है। कक्षा के वातावरण में बहुत प्रकार की लिखित सामग्री होने से बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि बोली गई भाषा को विभिन्न एवं रोचक छवियों और प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।
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लिखित समृद्ध वातावरण तभी सार्थक है, जब यह बच्चों के अनुभव और विचार दर्शाता है और उनकी रूचि और आकांक्षा के साथ जुड़ाव रखता है। ऐसा वातावरण जाने अनजाने में बच्चों को लिखित भाषा के नियमों को समझने में भी मदद करता है। उन्होने पठन का अर्थ समझाते हुए इनके दोषों का निवारण कैसे किया जाए, पर भी चर्चा की।
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शिक्षकों ने भाषा और गणित संक्रियाओं से संबंधित कहानी को चार्ट बनाकर प्रस्तुत किया। इस मौके पर एबीआरसी राकेश कुमार, रंधीर सिंह, ज्योति वाष्र्णेय आदि का सहयोग सराहनीय रहा।