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Hathras News: एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिलने से पढ़ाई लड़खड़ाई
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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जिले में एनसीईआरटी की किताबों की कमी के चलते वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बाजार में कक्षा एक से नौ तक की किताबें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे अधिक कमी हिंदी माध्यम की पुस्तकों में है। शासन द्वारा पहली बार बड़ी संख्या में स्कूलों में एनसीईआरटी की हिंदी माध्यम की किताबें लागू की गई हैं, लेकिन मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण स्थिति बिगड़ गई है। अभिभावक बच्चों की किताबें खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है, बिना किताबों के पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
वित्तविहीन शिक्षक महासंघ ने डीएम को पत्र भेजकर जल्द से जल्द पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो पढ़ाई पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। संघ के जिलाध्यक्ष आरपी शर्मा ने बताया कि पहले से ही हिंदी माध्यम की पुस्तकें नहीं है, वहीं प्रकाशक भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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प्रकाशकों को पहले से नहीं भेजी गई मांग
इस गंभीर समस्या के पीछे एक बड़ी वजह है। किताबों के कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि निजी विद्यालय अपने छात्र-छात्राओं की संख्या के आधार पर पुस्तक विक्रेताओं को मांग भेजते हैं। इसी हिसाब से प्रकाशक पुस्तकों का प्रकाशन करते हैं, लेकिन सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी स्कूलों की ओर से इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई, इसी वजह से एनसीईआरटी की किताबों की कमी हुई है। स्कूल प्रबंधनों को लग रहा था कि हर वर्ष की तरह वह निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवा देंगे, लेकिन बाद में सख्ती बढ़ी और एनसीईआरटी की किताबों की किल्लत हो गई।
मई के बाद आएंगी किताबें
अब प्रकाशकों की ओर से कक्षा एक से आठ तक की पुस्तकों के प्रकाशन को लेकर आंकलन किया जा रहा है। पुस्तक विक्रेताओं से डिमांड ली जा रही है, इसके बाद प्रकाशन किया जाएगा। ऐसे में मई के बाद ही पुस्तकें बाजारों तक आ पाएंगी।
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सबसे अधिक कमी हिंदी माध्यम की पुस्तकों में है। शासन द्वारा पहली बार बड़ी संख्या में स्कूलों में एनसीईआरटी की हिंदी माध्यम की किताबें लागू की गई हैं, लेकिन मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण स्थिति बिगड़ गई है। अभिभावक बच्चों की किताबें खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है, बिना किताबों के पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
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वित्तविहीन शिक्षक महासंघ ने डीएम को पत्र भेजकर जल्द से जल्द पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो पढ़ाई पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। संघ के जिलाध्यक्ष आरपी शर्मा ने बताया कि पहले से ही हिंदी माध्यम की पुस्तकें नहीं है, वहीं प्रकाशक भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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प्रकाशकों को पहले से नहीं भेजी गई मांग
इस गंभीर समस्या के पीछे एक बड़ी वजह है। किताबों के कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि निजी विद्यालय अपने छात्र-छात्राओं की संख्या के आधार पर पुस्तक विक्रेताओं को मांग भेजते हैं। इसी हिसाब से प्रकाशक पुस्तकों का प्रकाशन करते हैं, लेकिन सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी स्कूलों की ओर से इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई, इसी वजह से एनसीईआरटी की किताबों की कमी हुई है। स्कूल प्रबंधनों को लग रहा था कि हर वर्ष की तरह वह निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवा देंगे, लेकिन बाद में सख्ती बढ़ी और एनसीईआरटी की किताबों की किल्लत हो गई।
मई के बाद आएंगी किताबें
अब प्रकाशकों की ओर से कक्षा एक से आठ तक की पुस्तकों के प्रकाशन को लेकर आंकलन किया जा रहा है। पुस्तक विक्रेताओं से डिमांड ली जा रही है, इसके बाद प्रकाशन किया जाएगा। ऐसे में मई के बाद ही पुस्तकें बाजारों तक आ पाएंगी।