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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Some returned to finish the journey , some still trapped

कुछ यात्रा खत्म कर लौटे, कुछ अभी भी फंसे

Mon, 11 Jul 2016 11:48 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 11 Jul 2016 11:48 PM IST
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हाथरस। आतंकी बुरहान की मौत पर जम्मू-कश्मीर में हुई हिंसा के बाद अमरनाथ यात्रा रोके जाने से हाथरस के भी काफी तीर्थ यात्री वहां फंसे हुए हैं। हालांकि जिन तीर्थ यात्रियों ने पहले चरण में पंजीकरण करा लिए थे, वह रविवार को यात्रा खत्म करके सकुशल लौट आए, जबकि दूसरे चरण में रवाना होने वाले यात्रियों को जम्मू-कश्मीर के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और दूसरे सुरक्षित ठिकानों पर रोक दिया गया है। वापस लौटे यात्रियों ने बताया कि करीब ढाई लाख तीर्थ यात्री अमरनाथ यात्रा में फंसे हुए हैं, जबकि बड़ी संख्या में यात्री हिंसा के डर से बिना अमरनाथ दर्शन के ही वापस लौट रहे हैं।
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जिले से अमरनाथ यात्रा के लिए पहले चरण में तकरीबन 422 पंजीकरण हुए थे, जिनमें से 119 लोगों ने फॉर्म जमा किए थे। माना जा रहा है कि पहले राउंड में तकरीबन इतने यात्री हाथरस से अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुए हैं। इनमें से ज्यादातर यात्रियों के यात्रा खत्म करके वापस लौटने की जानकारी मिल रही है, जबकि कुछ यात्रियों के फंसे होने की भी जानकारी मिल रही है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वहां फंसे हुए यात्रियों की संख्या कितनी है और वह किस हालात में हैं। रविवार को यात्रा खत्म करके लौटे शहर निवासी गौरव भारद्वाज ने बताया कि उनकी टीम में करीब 10 यात्री अमरनाथ यात्रा पर गए थे। जब वह यात्रा खत्म करके लौट रहे थे। तभी वहां हिंसा के मद्देनजर सेना का मूवमेंट शुरू हुआ था। वहां यात्रियों की सघन तलाशी ली जा रही थी। 
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उन्होंने बताया कि लाखों यात्री जम्मू-कश्मीर, पहलगाम, बालटाल और अन्य ठिकानों पर फंसे हुए हैं। कुछ यात्रियों को उन्होंने बिना दर्शन किए ही लौटते हुए देखा है। हिंसा के बाद वहां यात्रियों में काफी दहशत है और अब उनके सामने एक ही सवाल है कि किसी भी तरह घाटी से बाहर निकल जाएं। हालांकि अभी 10 अगस्त तक अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण होने हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर नहीं लगता कि यात्री इसमें और ज्यादा रुचि दिखाएंगे। फिलहाल तो जिन लोगों के परिजन या रिश्तेदार जम्मू-कश्मीर में फंसे हुए हैं, वह उनकी सकुशल घर वापसी की दुआ कर रहे हैं। घाटी में फोन और इंटरनेट सेवाएं ठप होने से उनका वहां संपर्क भी नहीं हो पा रहा है, जिससे यह लोग अपने परिजन व रिश्तेदारों की सलामती को लेकर चिंतित हैं।
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