Hathras News: बिजली विभाग में कर्मियों की कमी, घर बैठे हो रहा शिकायतों का निस्तारण
बिजली विभाग में जिस हिसाब से उपभोक्ता हैं। उस हिसाब से बिजली विभाग में नियमित कर्मियों की कमी है। विभाग में लाइनमैन तो न के बराबर है। सभी सबस्टेशनों पर चार चार कर्मियों की दो शिफ्ट चलती है। उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से मरम्मत करने वाले कर्मियों की कमी है।
विस्तार
गर्मी में शहर से लेकर देहात तक बिजली कटौती हो रही है। इसे लेकर लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। उपभोक्ताओं के द्वारा बेहतर आपूर्ति के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर सहारा लिया जा रहा है तो वहां समस्याओं का बैठे-बैठे निस्तारण किया जा रहा है। धरातल पर समस्या बरकरार है। इसे लेकर लोगों में गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि बिजली विभाग द्वारा शहर से देहात तक 64 बिजलीघरों के जरिए दो लाख 64 हजार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। जिस हिसाब से जिला बना है। उस हिसाब से सबस्टेशन पर्याप्त है, लेकिन इन सबस्टेशनों पर लगे ट्रांसफार्मरों की क्षमता कम है। इसके अलावा शहर में 165 व कुल जिले में पांच सौ 65 किलोमीटर लाइन जर्जर हालत में है। इस कारण गर्मी के मौसम में ये लाइनें लोड सहन नहीं कर पा रही हैं। जरा सा लोड पड़ने पर लाइन में फॉल्ट हो जाते हैं। इस कारण कई कई घंटे बिजली गुल हो जाती है।
नियमित कर्मियों की कमी संविदा के भरोसे सिस्टम
बिजली विभाग में जिस हिसाब से उपभोक्ता हैं। उस हिसाब से बिजली विभाग में नियमित कर्मियों की कमी है। विभाग में लाइनमैन तो न के बराबर है। सभी सबस्टेशनों पर चार चार कर्मियों की दो शिफ्ट चलती है। उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से मरम्मत करने वाले कर्मियों की कमी है। इस कारण फॉल्ट दूर होने में समय भी लगता है। साथ ही इन कर्मियों के हर इलाके में फॉल्ट को दूर करने के लिए बार बार शटडाउन लिया जाता है। इस कारण भी बिजली संकट बढ़ रहा है। कर्मियों के काम करने की सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। इस कारण भी देरी से फॉल्ट दूर होते हैं।
एक लाइन पर कई सबस्टेशन
जिले में सबसे खास बात यह है कि एक लाइन पर कई कई बिजलीघर चल रहे हैं। जैसे महौ, सलेमपुर, नगला रति, चंदपा आदि सबस्टेशन एक लाइन पर चल रहे हैं। जब कोई फॉल्ट हो जाता है तो 11 केवीए की लाइन पूरी बंद की जाती है। इस कारण अन्य बिजलीघर से जुड़े उपभोक्ताओं को भी बिजली संकट का सामना करना पड़ता है। हालांकि विभाग द्वारा अब सबस्टेशनों को अलग करने की कार्य योजना रिवेंप में तैयार की गई है।
जोड़-गांठ कर चला रहे लाइन को, सामान की कमी
बिजली विभाग में नई बंच कंडक्टर लाइन नहीं है। इसके अलावा लोहे के नए खंभों की कमी है। बंच कंडक्टर लाइन की हालत यह है कि यदि कही खराब हो जाए तो उसे पोल से नीचे उतारने पर उसकी पीवीसी चटक जाती है। जर्जर लाइन के जरिए लोगों को बिजली की आपूर्ति की जा रही है। विभाग में सामान की कमी है। इस कारण भी सिस्टम सही तरीके से नहीं चल पा रहा है।
शुक्रवार को पांच से छह घंटे गहराया बिजली संकट
शुक्रवार को नवीपुर सबस्टेशन से जुड़े इलाके में दो घंटे, गिजरौली सबस्टेशन से जुड़े इलाके में एक से दो घंटे, कांशीराम टाउनशिप सबस्टेशन से जुड़े इलाके में दो से तीन घंटे, ओढ़पुरा सबस्टेशन से जुड़े इलाके में लाइन में फॉल्ट के चलते करीब पांच से छह घंटे बिजली गुल रही। इसके अलावा देहात के चंदपा, मुरसान, सासनी, हसायन, आदि सबस्टेशनों से निकलने वाले फीडरों की लाइनों में फॉल्ट के चलते चार से पांच घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही। विभागीय कर्मी लाइनों में फॉल्ट को दूर करने में जुटे रहे।
ऑनलाइन सिस्टम पर भी नही भरोसे, शिकायत दूर
ओढ़पुरा सबस्टेश से जुड़े इलाके में शाम छह बजे बिजली गुल हो गई। इसके बाद क्षेत्रीय लोगों ने रात 11 बजकर पंद्रह मिनट पर ऑनलाइन शिकायत की। शुक्रवार की सुबह उपभोक्ता के पास फोन आता है कि आपकी आपूर्ति सुचारू कर दी गई है। हकीकत यह है कि धरातल पर कुछ नहीं हुआ। आपूर्ति चालू नहीं हुई। विभाग की कार्यशैली को लेकर लोगों में गुस्सा है। इस मामले में अधीक्षण अभियंता एमपी सिंह का कहना है कि गर्मी में फॉल्ट बढ़ गए हैं। इस कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अन्य जिलों से हमारे यहां तो भी सी चल रही है। ऑनलाइन शिकायत का निस्तारण के बारे में मामला संज्ञान में नहीं है।
ओढ़पुरा क्षेत्र में शाम छह बजे से बिजली गुल होने के कारण काफी परेशानी हुई है। बिजली व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। कभी रात में कभी दिन में बिजली गुल होना आम बात हो गई है। बिना बिजली के दिनचर्या प्रभावित हो रही है। -सुनील कुमार उपभोक्ता
गर्मी में विभाग पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। गर्मी के मारे हाल बेहाल हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ बिजली ज्यादा जा रही है। इस ओर विभागीय अधिकारियों को ध्यान देने की जरुरत है। -चौ. बिजेंद्र सिंह उपभोक्ता
गर्मी शुरू होने के साथ विभाग ने लाइनों को दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दिया। इसका खामियादजा अब भुगतना पड़ रहा है। पर्याप्त बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। -राजकुमार उपभोक्ता