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Hathras News: किसान-मजदूरों की हालत देख आंदोलन में कूदे थे मुंशी जी

Tue, 12 Aug 2025 12:28 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Tue, 12 Aug 2025 12:28 AM IST
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Seeing the condition of farmers and laborers, Munshi ji jumped into the movement
देश की आजादी, मजदूर और किसानों के जीवन स्तर में सुधार के लिए जीवन का त्याग करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की अपनी अलग पहचान है। ऐसा ही एक आदर्श व्यक्तित्व थे मुंशी गजाधर सिंह। वह ब्रिटिश शासन में किसान व मजदूरों की हालत देखकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए थे।
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मुंशी जी के परिवार के सदस्य संजीव कुमार विश्नावत ने बताया कि मुंशी जी का जन्म 25 दिसंबर 1895 को तहसील सिकंदराराऊ के गांव खुशहालगढ़ के एक किसान परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही किसान और मजदूरों की दुर्दशा पर चिंतित रहते थे।
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तत्कालीन व्यवस्था में गरीब, किसानों तथा मजदूरों का शोषण देखकर बाल्यावस्था में ही उनका संवेदनशील मन विचलित हो उठा था, लेकिन उस समय पूरे देश के सामने एक ही प्रश्न था कि भारत को ब्रिटिश सरकार से कैसे मुक्त कराया जाए। अपने ही देश में हम गुलामी की जिंदगी जीयें, यह बात मुंशी जी के मन को भी आंदोलित कर रही थी। 26 नवंबर 1973 को भारत मां का यह महान सपूत हम सब को अकेला छोड़कर परमपिता को प्यारा हो गया।
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अध्यापन कार्य छोड़कर कूद पड़े थे स्वतंत्रता आंदोलन में

मुंशी गजाधर सिंह ने वर्ष 1923-24 में गांव शेखूपुर अजीत में अध्यापन कार्य आरंभ किया था। अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ था कि स्वतंत्रता संग्राम की आंधी ने उनके मन को झकझोर दिया और फिर वह अपना अध्यापन कार्य छोड़कर पूर्ण रूप से आंदोलन में कूद पड़े। पहली जेल यात्रा में ही उनकी पत्नी का देहात हो गया। उनकी दो अबोध पुत्रियों ने भी इस संसार से विदा ले ली थी, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

शिक्षा के प्रति बेहद गंभीर थे मुंशीजी

बालक व बालिकाओं की सहशिक्षा के लिए जिले के गांव कौमरी में मुंशी जी द्वारा स्थापित मुंशी गजाधर सिंह जनता इंटर कॉलेज आज भी इस बात का प्रतीक है कि उनको भावी नागरिकों से कितना लगाव था। इस विद्यालय को जूनियर हाईस्कूल से इंटर कॉलेज तक पहुंचाने में मुंशी जी का विशेष योगदान रहा। उनकी अंतिम इच्छा इस स्कूल को डिग्री कॉलेज बनाने की थी, लेकिन असमय मृत्यु से उनका यह सपना अधूरा रह गया।


जिले में सबसे अधिक छह वर्ष तीन माह काटी थी जेल

मुंशीजी को 27 जुलाई 1942 को ही 34/38 डीआईआर में छह माह के कठोर कारावास की सजा दी गई। दो वर्ष बाद वह रिहा हुए। इसके अलावा भी वह कई बार जेल गए। स्वतंत्रता आंदोलन में मुंशीजी को जिले में सबसे अधिक छह वर्ष तीन माह का कारावास हुआ। इस कारण नागरिक परिषद अलीगढ़ के तत्वावधान में भारत सरकार के तत्कालीन जहाजरानी मंत्री राजबहादुर ने 22 अगस्त 1973 को अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज के प्रांगण में उनका नागरिक अभिनंदन किया।
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