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लोक अदालत में धन व समय दोनों की होती है बचत
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जनपद न्यायाधीश व अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुनील कुमार सिंह प्रथम की अध्यक्षता में 10 जुलाई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से न्यायिक अधिकारियों की एक बैठक हुई।
बैठक में जनपद न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों को राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए पक्षकारों को अधिक से अधिक संख्या में नोटिस भेजने व नोटिसों के तामील की मॉनीटरिंग करने के अलावा सिविल वादों में अधिवक्ता द्वारा पक्षकारों को उत्प्रेरित करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे वाद जिनका निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के माध्यम से किया जा सकता है की पत्रावलियों की सूची तैयार करें। सभी पत्रावलियों के पक्षकारों को न्यायालय द्वारा नियमानुसार सूचना प्रेषित की जाए। जिससे पक्षकारगण अपने वाद का शीघ्र निस्तारण कराकर लाभान्वित हों।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित वादों में समय व धन दोनों की बचत होती है और इससे दोनों पक्षकारों की विजय होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से प्रिलिटीगेशन स्तर के बैंक के मामलों को निस्तारित कराने में बैंक द्वारा ब्याज में छूट प्रदान की जाती है।
इसलिए पक्षकार अपने बैंक मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित कराकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बैठक में अपर जनपद न्यायाधीश/नोडल अधिकारी अनुराग पवार, शिव कुमारी राष्ट्रीय लोक अदालत, नम्रता शर्मा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज, सुशील कुमार सिंह अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, योगेश जैन सिविल जज (कप्र.), साक्षी सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट, दीपिका अत्री अपर सिविल जज (कप्र.), मोहम्मद आरिफ, जीशान मेहंदी, नेगी चौधरी, अम्रतांशु राज मौजूद थे।
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जनपद न्यायाधीश व अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुनील कुमार सिंह प्रथम की अध्यक्षता में 10 जुलाई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के उद्देश्य से न्यायिक अधिकारियों की एक बैठक हुई।
बैठक में जनपद न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों को राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों के निस्तारण के लिए पक्षकारों को अधिक से अधिक संख्या में नोटिस भेजने व नोटिसों के तामील की मॉनीटरिंग करने के अलावा सिविल वादों में अधिवक्ता द्वारा पक्षकारों को उत्प्रेरित करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।
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उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे वाद जिनका निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के माध्यम से किया जा सकता है की पत्रावलियों की सूची तैयार करें। सभी पत्रावलियों के पक्षकारों को न्यायालय द्वारा नियमानुसार सूचना प्रेषित की जाए। जिससे पक्षकारगण अपने वाद का शीघ्र निस्तारण कराकर लाभान्वित हों।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित वादों में समय व धन दोनों की बचत होती है और इससे दोनों पक्षकारों की विजय होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से प्रिलिटीगेशन स्तर के बैंक के मामलों को निस्तारित कराने में बैंक द्वारा ब्याज में छूट प्रदान की जाती है।
इसलिए पक्षकार अपने बैंक मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित कराकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। बैठक में अपर जनपद न्यायाधीश/नोडल अधिकारी अनुराग पवार, शिव कुमारी राष्ट्रीय लोक अदालत, नम्रता शर्मा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज, सुशील कुमार सिंह अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, योगेश जैन सिविल जज (कप्र.), साक्षी सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट, दीपिका अत्री अपर सिविल जज (कप्र.), मोहम्मद आरिफ, जीशान मेहंदी, नेगी चौधरी, अम्रतांशु राज मौजूद थे।