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हाथरस में रिटायर्ड फौजी ने कुख्यात विनोद जाट को पकड़ा

Mon, 27 Nov 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Mon, 27 Nov 2017 01:54 AM IST
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Retired fighter caught the infamous Vinod Jat in Hathras
विनोद जाट को पकड़ कर लूट की घटनाओं का खुलासा करते एसपी सुशील घुले। - फोटो : अमर उजाला
शहर के रुई की मंडी इलाके में शनिवार शाम को रिटायर्ड फौजी लोकेंद्र गौतम ने जान पर खेलकर जिस कार को पकड़ा था, उसमें मौजूद बदमाश की पहचान50 हजार के इनामी कुख्यात विनोद जाट के रूप में हुई।
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विनोद ने जब पुलिस को अपना नाम बताया तो पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। विनोद जाट पर कई राज्यों में लूट, डकैती और फिरौती के कई मामले दर्ज हैं। झांसी के दो कारोबारियों का अपहरण कर 25 करोड़ की फिरौती मांगे जाने में नाम सामने आने के बाद से विनोद जाट की सरगर्मी से तलाश हो रही थी। इस साहसपूर्ण कार्य के लिए पुलिस अधिकारी 26 जनवरी को लोकेंद्र गौतम को सम्मानित करने की बात कह रहे हैं। पुलिस अधीक्षक घुले सुशील ने रविवार को अपने दफ्तर में प्रेसवार्ता में बताया कि विनोद जाट के पकड़ में आने के बाद लखनऊ और  आगरा की एसटीएफ ने उससे देर तक पूछताछ की। 
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इसके अलावा झांसी, मथुरा और एटा पुलिस ने भी विनोद से पूछताछ की है। मूल रूप से हाथरस के मुरसान थाना क्षेत्र के महामोनी गांव का रहने वाला विनोद जाट उर्फ विनोद चौधरी पुलिस का बर्खास्त सिपाही है। वह अजय जडेजा गैंग का शातिर सदस्य है और यूपी, एमपी और राजस्थान तक इसका नेटवर्क है।  विनोद की तलाश में झांसी पुलिस ने भी हाल ही में कई बार उसके महामोनी स्थित घर पर दबिश दी थी, लेकिन वह हाथ नहीं लग रहा था। पुलिस ने आरोपी के पास से 28 अक्तूबर को वृंदावन से लूटी एक स्कॉर्पियो कार, एक पिस्टल और 60 हजार रुपये बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक विनोद जाट ने ही सादाबाद में चांदी कारोबारी सुखवीर से आठ लाख रुपये की लूट को अंजाम दिया था। एसपी ने बताया कि लूट में शामिल रहे सतीश पुत्र नरायन सिंह निवासी बिसावर, पिंटू जाट निवासी सारस, राया और एक अन्य भाग निकलने में कामयाब हो गए। विनोद जाट को दबोचने वाली टीम में सादाबाद एसओ केपी सिंह, एसओजी प्रभारी महेश यादव और सर्विलांस प्रभारी सुधीर कुमार के अलावा पूरी एसओजी टीम शामिल रही। प्रेसवार्ता में एएसपी डॉ. अरविंद कुमार और सीओ योगेश कुमार भी मौजूद रहे। 
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इस तरह आया पकड़ में
सादाबाद में मई-बिलारा रोड पर एक नवंबर को बाइक सवार कारोबारी को टक्कर मारकर स्कॉर्पियो सवार बदमाशों ने आठ लाख रुपये लूट लिए थे। कारोबारी ने बाइक पर पीछे बैठे रिटायर्ड फौजी लोकेंद्र गौतम पर शक जताया था। इस पर पुलिस लोकेंद्र से पूछताछ में जुटी हुई थी। शनिवार शाम को लोकेंद्र अपने भांजे के साथ हाथरस से मथुरा जा रहा था। तभी उसे हतीसा पुल के नीचे वही स्कॉर्पियो कार खड़ी मिल गई, जो लूट के दौरान इस्तेमाल की गई थी। इस कार पर वही नंबर था, जो लूट में इस्तेमाल कार पर था। दोनों ने कार का पीछा शुरू कर दिया और पुलिस को खबर कर दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार की घेराबंदी करने की कोशिश की, लेकिन कार सवारों को शक हो गया और वह हाईवे से आगरा रोड नहर के रास्ते शहर में अंदर आ गए। वे रुई की मंडी तक पहुंच भी गए। यहां लोकेंद्र ने आगे बाइक लगाकर कार को रोक दिया। लेकिन इस दौरान कार में मौजूद तीन आरोपी भाग निकले। कार में बचे एक बदमाश को फौजी और उसके भांजे ने पकड़ लिया और पुलिस के पहुंचने तक छोड़ा नहीं। पुलिस सूचना मिलने के काफी देर बाद रुई की मंडी पहुंची। तब तक स्थानीय लोगों ने भी फौजी का साथ दिया और आरोपी को भागने नहीं दिया। तब तक किसी को यह नहीं मालूम था कि यह बदमाश कुख्यात विनोद जाट है।
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