Hathras News: सिकंदराराऊ के जंगल में बढ़ रहा दुर्लभ हिरनों का कुनबा, तपती गर्मी में प्राणी परेशान
एक दशक पूर्व सिकंदराराऊ के इन जंगलों में हिमालयन सफेद हिरन (मस्क डीयर) भी देखा गया, लेकिन वह कुत्तों का शिकार हो गया। तपती गर्मी में यह खूबसूरत प्राणी पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनके पानी पीने के लिए खोदा गया तालाब आज भी सूखा पड़ा है। नलकूप के बोरिंग से भी पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में यह हिरन चारे और पानी की तलाश में भटक रहे हैं, जिससे इनके शिकार का भी खतरा बढ़ गया है।
विस्तार
हाथरस में सिकंदराराऊ क्षेत्र के कासगंज रोड स्थित गांव ऐंचोला शहादतपुर और टटी डंडिया के जंगलों में विचरण करने वाले हिरनों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। इनमें काला हिरन, चीतल, सांभर, सारंग, कुरग और मृग आदि दुर्लभ प्रजातियों के हिरन शामिल हैं। एक दशक पूर्व इन जंगलों में हिमालयन सफेद हिरन (मस्क डीयर) भी देखा गया, लेकिन वह कुत्तों का शिकार हो गया।
तपती गर्मी में यह खूबसूरत प्राणी पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनके पानी पीने के लिए खोदा गया तालाब आज भी सूखा पड़ा है। नलकूप के बोरिंग से भी पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में यह हिरन चारे और पानी की तलाश में भटक रहे हैं, जिससे इनके शिकार का भी खतरा बढ़ गया है।
चारे के नाम पर यह हिरन मैदान में हरी घास के भरोसे हैं। फिलहाल तो इनकी सुरक्षा का जिम्मा आसपास के किसानों ने संभाल रखा है। वह ही इनको शिकारियों की बुरी नजर से बचाते हैं और इनके चारे-पानी का भी इंतजाम करते हैं। जिला प्रशासन ने इन हिरनों के संरक्षण के लिए इस क्षेत्र को अभ्यारण्य बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन वक्त के साथ यह ठंडे बस्ते में चली गई। अगर अभ्यारण्य बन गया होता तो शायद हिरनों का कुनबा उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गया होता और यहां पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाती, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार और आय के साधन बढ़ सकते थे।
वन कर्मी तो तैनात कर दिए, संसाधन नहीं दिए
हालांकि वन विभाग ने हिरनों की सुरक्षा के लिए यहां कुछ कर्मियों की तैनाती तो की है, लेकिन संसाधनों के अभाव में वह कुछ नहीं कर पाते। प्रदेश की भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में वन राज्य मंत्री अनिल शर्मा ने स्वयं प्रभागीय वनाधिकारी को बुलाकर यहां चारे-पानी की व्यवस्था करने एवं पर्यटन स्थल बनाने के लिए लिये प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सांसद और विधायक निधि से यहां सोलर पंप लगवा दें तो हिरनों के पीने के लिए साफ पानी का इंतजाम हो सकता है।
जिला पंचायत की बैठक में हिरनों के लिए पानी और चारे के प्रबंध के के लिए प्रस्ताव मंजूर कराने का प्रयास करूंगा। हिरनों की सुरक्षा का इंतजाम होना बहुत जरूरी है। यहां अभ्यारण्य बनेगा तो पर्यटन की संभावना भी बढ़ेगी। -पहलवान रामेश्वर यादव, जिला पंचायत सदस्य
यही तो विडंबना है एक तरफ विदेश से वन्य जीव लाए जा रहे हैं, जबकि अपने यहां मौजूद वन्य जीवों की उपेक्षा हो रही है। सुविधाओं के अभाव में यहां हिरनों की अनेक प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं। इन्हें संरक्षण की जरूरत है। -उदय पुंढीर, समाजसेवी
ब्लैक बक (काला हिरन) के संरक्षण के लिए सर्वे कराया गया है। जल्द ही इनके संरक्षण के लिए बेहतर प्रयास किए जाएंगे। लगातार ब्लैक बक की निगरानी की जा रही है। छीतीपुर वेटलैंड को जल्द ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे लेकर कार्ययोजना के सापेक्ष कार्य कराया जा रहा है। -डॉ. सीपी सिंह,प्रभागीय वनाधिकारी