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किले की जमीन पर राजा के प्रपौत्र ने ठोका दावा

Wed, 07 Jun 2017 11:10 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस। Updated Wed, 07 Jun 2017 11:10 PM IST
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Raja's grandson claims on the land of the fort
राजा महेंद्र प्रताप के प्रपौत्र चरत प्रताप सिंह पत्रकार वार्ता करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
हाथरस स्थित राजा महेंद्र प्रताप के किले की जमीन पर उनके प्रपौत्र ने दावा ठोंका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना उनके परिवार की सहमति के किले की जमीन का अधिग्रहण कर लिया। उन्होंने इस संबंध में न्यायालय में जाने की बात कही है।
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खुद को राजा महेंद्र प्रताप का प्रपौत्र बताने वाले चरत प्रताप सिंह ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके दादाजी राजा महेंद्र प्रताप ने अपनी संपत्ति को सरकार अथवा पुरातत्व विभाग को दिए जाने के लिए कोई सहमति नहीं दी। सरकार ने आखिर किस अधिकार से हमारी संपत्ति का अधिग्रहण कर लिया। देश की आजादी के बाद सरकार ने विरासतों की जायदादों का विलय कर लिया था, लेकिन किसी के घर का अधिग्रहण करने का अधिकार कभी भी सरकार के पास नहीं रहा। इतिहास गवाह है कि 1817 में हमारा परिवार इसी किले में निवास करता था।
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इन अंग्रेजों के आक्रमण में जब हमारा किला बर्बाद हो गया तो हमारे पूर्वज यहां से चले गए। 1952 में सरकार ने जमींदारी विनाश उन्मूलन कानून बनाया। इसमें किसी भी राजा का किला अथवा निवास सरकार ने अधिग्रहण नहीं किए थे।
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उन्होेंने कहा कि रही बात किला परिसर में बने मंदिर की, जिसे पुरातत्व विभाग ने हैंडओवर कर लिया है, तो राजा साहब का किला पहले बना था। मंदिर उसके बाद बनाया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मंदिर के साथ हमारी कुछ जमीन ही पुरातत्व विभाग ने टेकओवर की है, पूरी जमीन नहीं।


पुरातत्व विभाग ने जिस जमीन पर बाउंड्री करा रखी है, जमीन उससे कहीं अधिक है, इस पर लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी वह डीएम हाथरस को इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान उनके साथ केशवदेव सहयोगी, जनक सिंह, राजपाल सिंह, आचार कृष्णतीर्थ, आशु कवि अनिल बौहरे आदि प्रमुख थे।
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