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सांसद से उद्घाटन कराने की तैयारी, विधायक को न्योता नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
Updated Sat, 07 Apr 2018 11:58 PM IST
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उद्घ्ााटन
- फोटो : Amar Ujala
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33 केवी लाखनूं बिजलीघर का उद्घाटन समारोह में भाजपा जनप्रतिनिधियों की रस्साकसी में फंस गया। बिजली अधिकारियों ने तो इस बिजलीघर का उद्घाटन सांसद राजेश दिवाकर के हाथों कराने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन विभाग इलाके के विधायक को ही इसका न्योता देना भूल गया। यहां तक कि विधायक का नाम भी उद्घाटन के शिलालेख पर नहीं था।
विधायक तक जब यह खबर पहुंची तो उन्होंने इसकी शिकायत सीधे ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से कर दी। ऊर्जा मंत्री ने जब बिजली अफसरों की क्लास लगाई तो आनन-फानन पूरा कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल पर ताना गया टेंट-तंबू भी उजाड़ दिया गया और उद्घाटन का शिलालेख भी वहां से हटा दिया गया। मामला सियासी हलकों ही नहीं, बल्कि सरकारी गलियारों में भी अच्छी-खासी चर्चा का विषय बन गया। हर कोई इसे जनप्रतिनिधियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर देखने लग गया।
गौरतलब हो कि करीब दो माह पहले लाड़पुर में पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से 10 एमवीए क्षमता के 33 केवी बिजलीघर का निर्माण कराया गया था। इस बिजलीघर से सप्लाई से सुचारू कर दी गई थी, लेकिन इसका उद्घाटन किसी जनप्रतिनिधि द्वारा नहीं कराया गया था, जबकि शासन से आदेश थे कि नव निर्मित बिजलीघरों का उद्घाटन जनप्रतिनिधियों से कराया जाए। इसके बाद विभाग ने इस बिजलीघर के उद्घाटन के लिए सांसद का नाम भी तय कर दिया था और उद्घाटन की तिथि सात अप्रैल भी घोषित कर दी थी। उद्घाटन के लिए कार्यक्रम स्थल पर टेंट-तंबू भी तान दिया गया।
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सांसद के नाम का शिलालेख भी लगवा दिया गया। बताते हैं कि सांसद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले ही थे, उससे पहले ही बिजली अधिकारियों ने उन्हें कार्यक्रम रद होने की सूचना दे दी। सांसद वहां गए ही नहीं। क्षेत्र के विधायक हरीशंकर माहौर भी सत्ताधारी भाजपा के ही हैं, लेकिन बिजली महकमे ने इस कार्यक्रम में उन्हें तवज्जो नहीं दी। समर्थकों से इसकी जानकारी मिलने के बाद विधायक ने पूरी स्थिति की जानकारी ऊर्जा मंत्री को फोन पर दे दी, जिसके बाद बिजली अफसरों में खलबली मच गई।
-शासन स्तर से जारी सूची के आधार पर ही नव निर्मित बिजलीघरों का उद्घाटन होगा। उन्हें तो बिजलीघर उद्घाटन की कोई जानकारी ही नहीं है।
-प्रदीप अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता
-----
2002 में जब भाजपा की सरकार थी, तब मैंने लाड़पुर में प्राथमिक स्वास्थ केंद्र और 33 केवी बिजलीघर की स्वीकृति कराई थी। जगह मिलने पर पीएचसी तो बन गई और इसका उद्घाटन भी कर दिया। उसमें आज भी मेरे नाम का पत्थर लगा हुआ है। बिजलीघर का निर्माण लाखनूं में कराया जा रहा था, लेकिन उस समय इसके लिए जगह नहीं मिली तो यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। अब दोबारा जब भाजपा की सरकार बनी तो बिजलीघर की फाइल निकलवाई। जगह मिलने पर बिजलीघर का निर्माण भी हो गया, लेकिन कुछ लोगों ने गलत मानसिकता का परिचय देते हुए इस पर अपने नाम का पत्थर लगवा दिया। पत्थर पर मेरा नाम भी नहीं था और न हीं मुझे इस कार्यक्रम की सूचना दी। वहां सांसद उद्घाटन करने भी पहुंच गए। जब समर्थकों ने मुझे इसकी जानकारी दी तो उन्होंने इस बारे में ऊर्जा मंत्री से बात की। ऊर्जा मंत्री ने भी इस पर नाराजगी जताई, जिसके बाद यह कार्यक्रम स्थगित किया गया।
-हरीशंकर माहौर, विधायक हाथरस
बिजली विभाग ने उनके द्वारा लाखनूं बिजलीघर का उद्घाटन कराने की तैयारी की थी। यह कार्यक्रम मेरे कहने पर ही रखा गया था, लेकिन जब मुझे पता लगा कि शिलालेख प्रदेश सरकार के निर्धारित प्रारूप के हिसाब से नहीं है और उस पर मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री का नाम नहीं है तो मैं वहां गया ही नहीं। मैं भी विधायक की इस बात से इत्तेफाक रखता हूं कि शिलालेख पर उनका नाम क्यों नहीं लगाया गया। कार्यक्रम का निमंत्रण देने की जिम्मेदारी बिजली अधिकारियों की थी, मेरी नहीं। ये बात बिल्कुल गलत है कि मैंने इस कार्यक्रम में विधायक की अनदेखी कराई।
-राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस
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विधायक तक जब यह खबर पहुंची तो उन्होंने इसकी शिकायत सीधे ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से कर दी। ऊर्जा मंत्री ने जब बिजली अफसरों की क्लास लगाई तो आनन-फानन पूरा कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। यहां तक कि कार्यक्रम स्थल पर ताना गया टेंट-तंबू भी उजाड़ दिया गया और उद्घाटन का शिलालेख भी वहां से हटा दिया गया। मामला सियासी हलकों ही नहीं, बल्कि सरकारी गलियारों में भी अच्छी-खासी चर्चा का विषय बन गया। हर कोई इसे जनप्रतिनिधियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर देखने लग गया।
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गौरतलब हो कि करीब दो माह पहले लाड़पुर में पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से 10 एमवीए क्षमता के 33 केवी बिजलीघर का निर्माण कराया गया था। इस बिजलीघर से सप्लाई से सुचारू कर दी गई थी, लेकिन इसका उद्घाटन किसी जनप्रतिनिधि द्वारा नहीं कराया गया था, जबकि शासन से आदेश थे कि नव निर्मित बिजलीघरों का उद्घाटन जनप्रतिनिधियों से कराया जाए। इसके बाद विभाग ने इस बिजलीघर के उद्घाटन के लिए सांसद का नाम भी तय कर दिया था और उद्घाटन की तिथि सात अप्रैल भी घोषित कर दी थी। उद्घाटन के लिए कार्यक्रम स्थल पर टेंट-तंबू भी तान दिया गया।
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सांसद के नाम का शिलालेख भी लगवा दिया गया। बताते हैं कि सांसद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले ही थे, उससे पहले ही बिजली अधिकारियों ने उन्हें कार्यक्रम रद होने की सूचना दे दी। सांसद वहां गए ही नहीं। क्षेत्र के विधायक हरीशंकर माहौर भी सत्ताधारी भाजपा के ही हैं, लेकिन बिजली महकमे ने इस कार्यक्रम में उन्हें तवज्जो नहीं दी। समर्थकों से इसकी जानकारी मिलने के बाद विधायक ने पूरी स्थिति की जानकारी ऊर्जा मंत्री को फोन पर दे दी, जिसके बाद बिजली अफसरों में खलबली मच गई।
-शासन स्तर से जारी सूची के आधार पर ही नव निर्मित बिजलीघरों का उद्घाटन होगा। उन्हें तो बिजलीघर उद्घाटन की कोई जानकारी ही नहीं है।
-प्रदीप अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता
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2002 में जब भाजपा की सरकार थी, तब मैंने लाड़पुर में प्राथमिक स्वास्थ केंद्र और 33 केवी बिजलीघर की स्वीकृति कराई थी। जगह मिलने पर पीएचसी तो बन गई और इसका उद्घाटन भी कर दिया। उसमें आज भी मेरे नाम का पत्थर लगा हुआ है। बिजलीघर का निर्माण लाखनूं में कराया जा रहा था, लेकिन उस समय इसके लिए जगह नहीं मिली तो यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। अब दोबारा जब भाजपा की सरकार बनी तो बिजलीघर की फाइल निकलवाई। जगह मिलने पर बिजलीघर का निर्माण भी हो गया, लेकिन कुछ लोगों ने गलत मानसिकता का परिचय देते हुए इस पर अपने नाम का पत्थर लगवा दिया। पत्थर पर मेरा नाम भी नहीं था और न हीं मुझे इस कार्यक्रम की सूचना दी। वहां सांसद उद्घाटन करने भी पहुंच गए। जब समर्थकों ने मुझे इसकी जानकारी दी तो उन्होंने इस बारे में ऊर्जा मंत्री से बात की। ऊर्जा मंत्री ने भी इस पर नाराजगी जताई, जिसके बाद यह कार्यक्रम स्थगित किया गया।
-हरीशंकर माहौर, विधायक हाथरस
बिजली विभाग ने उनके द्वारा लाखनूं बिजलीघर का उद्घाटन कराने की तैयारी की थी। यह कार्यक्रम मेरे कहने पर ही रखा गया था, लेकिन जब मुझे पता लगा कि शिलालेख प्रदेश सरकार के निर्धारित प्रारूप के हिसाब से नहीं है और उस पर मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री का नाम नहीं है तो मैं वहां गया ही नहीं। मैं भी विधायक की इस बात से इत्तेफाक रखता हूं कि शिलालेख पर उनका नाम क्यों नहीं लगाया गया। कार्यक्रम का निमंत्रण देने की जिम्मेदारी बिजली अधिकारियों की थी, मेरी नहीं। ये बात बिल्कुल गलत है कि मैंने इस कार्यक्रम में विधायक की अनदेखी कराई।
-राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस