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हादसे में बच्ची की मौत: सीएम के आदेश पर भी नहीं भरे गड्ढे, भरवाने पर दिया होता ध्यान तो नहीं जाती मासूम की जान

Sun, 20 Oct 2024 05:19 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 20 Oct 2024 05:19 AM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 सितंबर को 15 दिन में सड़कों को गड्ढा मुक्त किए जाने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों पर हाथरस जिले में अमल तो शुरू हुआ, लेकिन सिर्फ खानापूर्ति हुई।

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Potholes in road took the life of an innocent child
सिकंदराराऊ की सड़क में गड्ढे - फोटो : संवाद

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 15 अक्तूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के आदेशों को अफसरों ने गड्ढे में डाल दिया। यही वजह है कि जिले में कई प्रमुख सड़कों के गड्ढे नहीं भर पाए। अगर एनएचएआई के अफसरों ने सिकंदराराऊ में कासगंज मार्ग के गड्ढे भरवा दिए होती तो शुक्रवार को हुए हादसे में मासूम की जान नहीं जाती।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 सितंबर को 15 दिन में सड़कों को गड्ढा मुक्त किए जाने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों पर हाथरस जिले में अमल तो शुरू हुआ, लेकिन सिर्फ खानापूर्ति हुई। जिले में कई प्रमुख सड़कें ऐसी थीं, जिनके गड्ढे भरवाना जरूरी था, लेकिन कार्यदायी विभागों ने ऐसा नहीं किया। एनएचएआई की लापरवाही से सिकंदराराऊ के कासगंज मार्ग पर सड़क के गड्ढे ने मासूम की जान ले ली।  
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बता दें कि एनएच-530 बी पर कासगंज रोड पर जर्जर सड़क में हो रहे गड्ढे की वजह से ई रिक्शा उछल गया और उसमें सवार मोहल्ला काजियान निवासी मुकीम की पत्नी असराना और उनकी तीन साल की बेटी आरुषि ई-रिक्शा से उछलकर सड़क पर जा गिरीं। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसकी मां का उपचार चल रहा है। दुख की बात तो यह है कि बच्ची के परिवार में शादी समारोह था, लेकिन हादसे के बाद शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। 

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50 फीसदी सड़कों के ही भरे जा सके गड्ढे

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिले में 179 सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के लिए चिह्नित किया गया था। इन सड़कों की लंबाई 1745 किलोमीटर है, लेकिन अफसोस की बात है कि अभी तक इनमें से 50 फीसदी सड़काें के ही गड्ढे भरे जा सके हैं। जिस एनएच 530 बी पर यह हादसा हुआ, उसकी सड़क निर्माणाधीन होने की वजह से जगह-जगह गड्ढे हैं। इन गड्ढों को जिम्मेदार अधिकारियों ने भरवाने की जहमत नहीं उठाई है। 

सड़क में गड्ढा न होता तो नहीं जाती बेटी की जान : मुकीम
आरुषि के पिता मुकीम लोहे की अलमारी बनाने का काम करते हैं। उनके चार बच्चे थे। इनमें तीन बेटियां और एक बेटा है। एक बेटी की मौत हो गई। अब दो बेटी और एक बेटा बचा है। आरुषि की मौत से पूरा परिवार गमजदां हैं। मुकीम के छोटे भाई दानिश की शनिवार को शादी थी, लेकिन हादसे के बाद शादी की खुशियों में खलल पड़ गया। बेहद गमगीन माहौल में दानिश का निकाह पढ़ा गया। मृतका के पिता मुकीम ने कहा कि सरकार को सड़कों के गड्ढे तो समय से भरवाने चाहिए। अगर गड्ढा न होता तो शायद मेरी बेटी की जान न जाती।  

सड़क में गड्ढों को लेकर संबंधित विभाग से जानकारी हासिल की जाएगी और जल्द ही गड्ढों को भरवाया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि इस हादसे के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है। संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा।-राहुल पांडेय, जिलाधिकारी।

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