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आलू की फसल पर मंडरा रहा झुलसा का डर
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
पिछले कुछ दिनों से तापमान में भारी गिरावट आई है। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि कोहरे और ठंढ की वजह से आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा रहता है। यह रोग फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। इस लिए अगर इससे पहले से बचाव नहीं किया गया तो आलू के उत्पादन में कमी आ सकती है।
झुलसा रोग से निजात पाने के लिए कुछ किसान कृषि विज्ञान केंद्र पर भी पहुंच रहे हैं। जिन्हें कृषि वैज्ञानिक आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के उपाय बता रहे हैं। इस बार जनपद में आलू की फसल का रकवा 48 हजार हेक्टेयर का आंकड़ा पार कर गया है। वहीं ठंड के उतार-चढ़ाव के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग भी आने लगा है। जिसे लेकर किसानों को कृषि वैज्ञानिक सलाह भी दे रहे हैं। ताकि अगैती व पिछैती आलू की फसल को झुलसा रोग से किसान बचा सकें।
झुलसा से बचाव के लिए ये उपाय करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम पलट ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान वैैज्ञानिक विधि अपनाएं। जिसमें डाइथेन एम-45 (मैकोजेब) तीन ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। या फिर साइमाक्सोमिल प्लस मैकोजेब तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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फेनामिडोन प्लस मैकाजेब तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 लीटर पानी में या फिर डाईमेथोमार्क एक किलोग्राम प्लस मैकोजेब दो किलोग्राम कुल तीन किलोग्राम दवा 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव के 10 से 12 दिन बाद दूसरा छिड़काव करें। डॉ. पलट ने यह भी बताया कि झुलस रोग आलू की फसल में फाइटोफथोरा इफेस्टान नामक फफूंदी के प्रकोप से होता है। इसमें पत्तियां किनारे की तरफ से झुलसती हैं। इसके लक्षण आलू की लताओं पर भी दिखते हैं।
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पिछले कुछ दिनों से तापमान में भारी गिरावट आई है। इसको देखते हुए कृषि विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि कोहरे और ठंढ की वजह से आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा रहता है। यह रोग फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। इस लिए अगर इससे पहले से बचाव नहीं किया गया तो आलू के उत्पादन में कमी आ सकती है।
झुलसा रोग से निजात पाने के लिए कुछ किसान कृषि विज्ञान केंद्र पर भी पहुंच रहे हैं। जिन्हें कृषि वैज्ञानिक आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के उपाय बता रहे हैं। इस बार जनपद में आलू की फसल का रकवा 48 हजार हेक्टेयर का आंकड़ा पार कर गया है। वहीं ठंड के उतार-चढ़ाव के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग भी आने लगा है। जिसे लेकर किसानों को कृषि वैज्ञानिक सलाह भी दे रहे हैं। ताकि अगैती व पिछैती आलू की फसल को झुलसा रोग से किसान बचा सकें।
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झुलसा से बचाव के लिए ये उपाय करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम पलट ने बताया कि आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान वैैज्ञानिक विधि अपनाएं। जिसमें डाइथेन एम-45 (मैकोजेब) तीन ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। या फिर साइमाक्सोमिल प्लस मैकोजेब तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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फेनामिडोन प्लस मैकाजेब तीन किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 लीटर पानी में या फिर डाईमेथोमार्क एक किलोग्राम प्लस मैकोजेब दो किलोग्राम कुल तीन किलोग्राम दवा 800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव के 10 से 12 दिन बाद दूसरा छिड़काव करें। डॉ. पलट ने यह भी बताया कि झुलस रोग आलू की फसल में फाइटोफथोरा इफेस्टान नामक फफूंदी के प्रकोप से होता है। इसमें पत्तियां किनारे की तरफ से झुलसती हैं। इसके लक्षण आलू की लताओं पर भी दिखते हैं।