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निर्बाध बारिश से टूटा मुसीबतों का पहाड़

Mon, 11 Jul 2016 11:48 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 11 Jul 2016 11:48 PM IST
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Persistent rain fell from the mountain of troubles
मुरसान गेट की सड़क के गड्ढे में फं से वाहन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
हाथरस। मानसून की निर्बाध बारिश ने गर्मी से बेशक राहत दे दी है, लेकिन लोगों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। शहर और ग्रामीण अंचल में बारिश से हालात बाढ़ सरीखे हो गए हैं। गली-मोहल्लों, रास्तों और सड़कों तक पर घुटनों से ऊपर पानी भर गया है। कई जगहों पर दीवारें गिरने से लोग बेघर हो गए हैं। 
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सोमवार की सुबह हुई तेज बारिश से शहर एक बार फिर ताल-तलैया बन गया है। जिस क्षेत्र के नाले-नालियां साफ नहीं हैं, वहां की स्थिति भयावह हो गई है। शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद रविवार की देर शाम तक जलभराव बना हुआ था और सोमवार की बारिश ने स्थिति और बिगाड़ दी। शहर के श्रीनगर, बालापट्टी, खोंडा हजारी, मोहनगंज, गंगाधर गली, लक्ष्मीनगर, लाला का नगला, चामड़ गेट, जलेसर रोड, पंजाबी मार्केट, सरक्यूलर रोड, किला गेट, जामा मस्जिद चौराहा, नगला तुंदला सहित तमाम क्षेत्रों में जलभराव हो गया। जिन दुकानों के आगे बहुत पानी भर गया, उन्होंने सोमवार को अपनी दुकानें भी नहीं खोलीं। नगर पालिका में नाला सफाई के लिए करोड़ों रुपये के प्रस्ताव तो पास हुए, लेकिन अभी तक नालों की सफाई नहीं होने से लोगों में भारी रोष बना हुआ है। चेयरमैन, चेयरमैन प्रतिनिधि और ईओ सहित पालिका के सभी अधिकारी और कर्मचारियों को लोग जी भरकर कोसने पर मजबूर हो गए हैं। जलभराव से लोगों को कब मुक्ति मिलेगी, यह कहा नहीं जा सकता है।
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कोतवाली में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात
हाथरस। सोमवार की तेज बारिश से कोतवाली सदर परिसर और सीओ कार्यालय के अंदर भी पानी भर गया। कोतवाली परिसर में नाले की दीवार टूटने के बाद पुलिस कर्मियों के मकानों में भी गंदा पानी भर गया। पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी जलभराव को देखकर झल्ला उठे और चेयरमैन प्रतिनिधि से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं मिले। बाद में कुछ पुलिस कर्मी चेयरमैन के घर पहुंचे और वहां चेयरमैन प्रतिनिधि की कोतवाल से बात कराई। तब जाकर पानी की निकासी का इंतजाम हो सका।
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इन दफ्तर-स्कूलों के परिसर भी जलमग्न
रेलवे स्टेशन के ट्रैक, महिला थाना, सीएमओ कार्यालय परिसर, रामबाग इंटर कॉलेज, सरस्वती इंटर कॉलेज, महात्मा गांधी, गिजरौली बिजलीघर, ओढ़पुरा बिजलीघर, नाई का नगला सहकारी समिति कार्यालय, केंद्रीय विद्यालय आदि के परिसर भी बारिश से जलमग्न हो गए।


बारिश से खिले किसानों  के चेहरे
हाथरस। लगातार तेज बारिश से किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है। सबसे बड़ा फायदा धान उत्पादक किसानों को होगा। उनकी नर्सरी न केवल बिना पानी के जम जाएगी, बल्कि उसे पनपने के लिए भी भरपूर इस समय जमीन में मौजूद। मतलब, किसान को धान की पौध जमाने के लिए पानी पर फिलहाल तो खर्चा नहीं करना पड़ेगा। किसानों को उम्मीद है कि मानसून की यह मेहरबानी आगे भी बनी रहेगी, जिससे इस बार धान की पैदावार अच्छी हो सकती है। बाजरा, दलहन, ढेंचा, चरी, ग्वार, कपास, मक्का जैसी फसलों के लिए भी अब तक की बारिश अच्छी मानी जा रही है, जिससे इनकी पैदावार भी बेहतर होने की उम्मीद है। 
 
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