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जुलाई का रिटर्न दाखिल करने में देरी पर जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Wed, 18 Oct 2017 11:41 PM IST
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तहत जुलाई महीने का पहला रिटर्न जीएसटीआर वन दाखिल करने से वंचित रहे व्यापारियों पर अब अर्थदंड की मार पड़नी शुरू हो गई है। दरअसल, जीएसटी की शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों और जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में व्यापारी पहला रिटर्न समय पर दाखिल नहीं कर पाए थे। देश भर से उठी व्यापारियों की मांग को देखते हुए जीएसटी काउंसिल ने इस रिटर्न की अवधि 10 अक्तूबर तक बढ़ा दी थी, लेकिन इस अवधि में भी बड़ी संख्या में व्यापारी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। नतीजा, अब वाणिज्य कर विभाग ने इन पर 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है, जिससे व्यापारियों में खलबली मच गई है।
देश भर में जीएसटी की शुुरुआत एक जुलाई से हुई थी। व्यापारियों को जुलाई महीने की खरीद-बिक्री का रिटर्न जीएसटीआर वन जुलाई के आखिर में जमा करना था। चूंकि उस समय इस नए कर कानून की शुरुआत थी और जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न का जो प्रोफॉर्मा दिया गया था, वह तकनीकी रूप से काफी मुश्किल था, इसलिए व्यापारियों ही नहीं, बल्कि उनके कर अधिवक्ताओं को भी रिटर्न दाखिल करने में काफी मुश्किल पेश आईं। यहां तक शुरुआत में जीएसटी पोर्टल का सर्वर भी सही तरह काम नहीं कर पा रहा था, जिससे व्यापारी और उनके वकील चाहते हुए भी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। चूंकि नए कर कानून के तहत यह पहला रिटर्न था, इसलिए देश भर के व्यापारियों ने अपनी मुश्किलें बताते हुए सरकार से इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों को जुलाई का रिटर्न दाखिल करने के लिए 10 अक्तूबर तक की लंबी समय सीमा दे दी।
हालांकि 10 अक्तूबर तक व्यापारियों, उनके वकील और सीए ने रिटर्न दाखिल करने में पूरा जोर लगाया, लेकिन कई व्यापारियों के ऑनलाइन रिटर्न सबमिट होने के बाद फाइल नहीं हो पाए तो कुछ तकनीकी वजहों से इन्हें सबमिट ही नहीं कर सके।
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अब इन व्यापारियों पर वाणिज्य कर विभाग 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लेट फीस निर्धारित कर रहा है, जिससे व्यापारियों में खलबली मच गई है। व्यापारी अपना रिटर्न जल्द से जल्द दाखिल कराने के लिए अपने अधिवक्ता और चार्टड एकाउंटेंट्स के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि व्यापारियों की शिकायत यह है कि वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि शुरुआत में व्यापारियों पर किसी तरह का अर्थदंड नहीं लगाया जाएगा। उसके बावजूद यह दूसरा रिटर्न है, जब उन्हें 200 रुपये प्रतिदिन की पैनाल्टी भुगतनी पड़ रही है। इससे पहले अगस्त का रिटर्न लेट होने पर भी कई व्यापारियों को यह अर्थदंड भुगतना पड़ चुका है। उपायुक्त वाणिज्य कर संजय कुमार का कहना है कि अर्थदंड की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही की जा रही है।
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देश भर में जीएसटी की शुुरुआत एक जुलाई से हुई थी। व्यापारियों को जुलाई महीने की खरीद-बिक्री का रिटर्न जीएसटीआर वन जुलाई के आखिर में जमा करना था। चूंकि उस समय इस नए कर कानून की शुरुआत थी और जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न का जो प्रोफॉर्मा दिया गया था, वह तकनीकी रूप से काफी मुश्किल था, इसलिए व्यापारियों ही नहीं, बल्कि उनके कर अधिवक्ताओं को भी रिटर्न दाखिल करने में काफी मुश्किल पेश आईं। यहां तक शुरुआत में जीएसटी पोर्टल का सर्वर भी सही तरह काम नहीं कर पा रहा था, जिससे व्यापारी और उनके वकील चाहते हुए भी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। चूंकि नए कर कानून के तहत यह पहला रिटर्न था, इसलिए देश भर के व्यापारियों ने अपनी मुश्किलें बताते हुए सरकार से इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों को जुलाई का रिटर्न दाखिल करने के लिए 10 अक्तूबर तक की लंबी समय सीमा दे दी।
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हालांकि 10 अक्तूबर तक व्यापारियों, उनके वकील और सीए ने रिटर्न दाखिल करने में पूरा जोर लगाया, लेकिन कई व्यापारियों के ऑनलाइन रिटर्न सबमिट होने के बाद फाइल नहीं हो पाए तो कुछ तकनीकी वजहों से इन्हें सबमिट ही नहीं कर सके।
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अब इन व्यापारियों पर वाणिज्य कर विभाग 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लेट फीस निर्धारित कर रहा है, जिससे व्यापारियों में खलबली मच गई है। व्यापारी अपना रिटर्न जल्द से जल्द दाखिल कराने के लिए अपने अधिवक्ता और चार्टड एकाउंटेंट्स के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि व्यापारियों की शिकायत यह है कि वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि शुरुआत में व्यापारियों पर किसी तरह का अर्थदंड नहीं लगाया जाएगा। उसके बावजूद यह दूसरा रिटर्न है, जब उन्हें 200 रुपये प्रतिदिन की पैनाल्टी भुगतनी पड़ रही है। इससे पहले अगस्त का रिटर्न लेट होने पर भी कई व्यापारियों को यह अर्थदंड भुगतना पड़ चुका है। उपायुक्त वाणिज्य कर संजय कुमार का कहना है कि अर्थदंड की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही की जा रही है।