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सासनी में पेठे की फैक्ट्री सीज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
Updated Tue, 01 May 2018 11:47 PM IST
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पेठा फैक्टरी
- फोटो : Amar Ujala
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प्रभारी मंत्री से की गई शिकायत के बाद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने सासनी में एक पेठा और एक सोडा फैक्ट्री पर छापा मारा। कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाने पर टीम ने पेठा बनाने वाली फैक्ट्री को सीज करा दिया, जबकि सोडा निर्माता कंपनी पर मालिकान के मौजूद नहीं होने के कारण कुल 1,200 बोरे कच्चा माल वहां मौजूद चौकीदार को लिखित रूप से सुपुर्दगी में दे दिया।
प्रभारी मंत्री के निर्देश पर डीएम ने एसडीएम सदर अरुण कुमार, एसडीएम सिकंदराराऊ ज्योत्सना बंधु, क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग के अवर अभियंता दीपक मेहरा, वैज्ञानिक सहायक वीडी शर्मा को तुरंत जांच करने के निर्देश दिए। एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पेठा बनाने वाली फैक्ट्री में केमिकलयुक्त पानी नाले में फेंका जा रहा था। अवैध रूप से इस फैक्ट्री का संचालन हो रहा था।
जब वहां मौजूद लोगों से फैक्ट्री संचालन से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वह कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाए। इस फैक्ट्री को सीज कर दिया गया है। इसके बाद टीम सोडा बनाने वाली फैक्ट्री पर पहुंची। यहां कोई सक्षम व्यक्ति नहीं मिला। फैक्ट्री बंद थी। फैक्ट्री पर चौकीदार मौजूद था। यहां सोडा बनाने के कच्चे माल के 1200 बोरे मिले, जिन्हें वहां मौजूद चौकीदार की लिखित सुपुर्दगी में दिया गया। लिखित निर्देशों में साफ कहा गया है कि जब तक अग्रिम आदेश नहीं हों, तब तक इस माल को खोला नहीं जाए।
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प्रभारी मंत्री के निर्देश पर डीएम ने एसडीएम सदर अरुण कुमार, एसडीएम सिकंदराराऊ ज्योत्सना बंधु, क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग के अवर अभियंता दीपक मेहरा, वैज्ञानिक सहायक वीडी शर्मा को तुरंत जांच करने के निर्देश दिए। एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पेठा बनाने वाली फैक्ट्री में केमिकलयुक्त पानी नाले में फेंका जा रहा था। अवैध रूप से इस फैक्ट्री का संचालन हो रहा था।
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जब वहां मौजूद लोगों से फैक्ट्री संचालन से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वह कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाए। इस फैक्ट्री को सीज कर दिया गया है। इसके बाद टीम सोडा बनाने वाली फैक्ट्री पर पहुंची। यहां कोई सक्षम व्यक्ति नहीं मिला। फैक्ट्री बंद थी। फैक्ट्री पर चौकीदार मौजूद था। यहां सोडा बनाने के कच्चे माल के 1200 बोरे मिले, जिन्हें वहां मौजूद चौकीदार की लिखित सुपुर्दगी में दिया गया। लिखित निर्देशों में साफ कहा गया है कि जब तक अग्रिम आदेश नहीं हों, तब तक इस माल को खोला नहीं जाए।
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