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फसलों में दिख रहा पाकिस्तानी टिड्डियों का असर
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले में पाकिस्तानी टिड्डियों का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पास ही राज्य राजस्थान में टिड्डियां फसल को नुकसान पहुंचाने लगी हैं। तभी तो जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने इसे लेकर एडवाइजरी जारी कर, इससे बचने के उपाय किसानों को बताए हैं।
शासन से आए फरमान के बाद जिला कृषि रक्षा अधिकारी यतेंद्र सिंह ने टिड्डियों के खतरे को लेकर एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्होंने किसान, प्रधान, सेक्रेटरी, लेखपाल, कृषि प्राविधिक सहायक व शिक्षकों को अलर्ट रहने के लिए कहा है। पीपीओ यतेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि निदेशालय द्वारा जारी अलर्ट के अनुसार राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में पाकिस्तानी टिड्डी दल का प्रकोप देखा जा रहा है। इसके चलते इन तीनों राज्यों से सटे जनपदों में टिड्डी के प्रकोप की संभावना है।
इन बातों पर दें ध्यान
-टिड्डियों का उपद्रव आरंभ हो जाने के पश्चात इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।
-सामान्य टिड्डी द्वारा दिन में खाने एवं रात्रि में अंडे देने की प्रवृत्ति होती है।
-किसी क्षेत्र में विशेष रूप से टिड्डी दल रात्रि में रुक जाता है तो सुबह ही उस क्षेत्र की जुताई कर देनी चाहिए।
-टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, ग्राम पंचायत अधिकारी, प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों द्वारा जिला प्रशासन को देनी होगी।
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ऐसे करें टिड्डी से बचाव
टिड्डी के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठे होकर टिन के डिब्बे, थालियां, ढोल, डीजे आदि बजाकर शोर मचाएं।
-शोर से टिड्डी दल आसपास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पाता है।
-टिड्डी के प्रजनन को रोकने के लिए बलुई मिट्टी वाले इलाके को जुतवाकर पानी भरवा दें।
नियंत्रण के लिए यह है उपाय
- टिड्डी पर नियंत्रण पाने के लिए हवाई जहाज से विषैली दवाओं का छिड़काव, विषैला चारा जैसे मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत धूल में भीगी हुई गेंहू की भूसी का फैलाव आदि उपयोगी होता है।
-टिड्डियों को पानी और मिट्टी के तेल से भरी नांद में गिराकर नष्ट किया जा सकता है।
-शाम के समय फसलों के चारों तरफ मशाल जलाकर प्रकाश करें।
नियंत्रण के लिए करें छिड़काव
टिड्डी का प्रकोप दिखने पर मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशल धूल की 25-30 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेअर की दर से बुरकाव करें। या फिर मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी ढाई लीटर का 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।
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जिले में पाकिस्तानी टिड्डियों का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पास ही राज्य राजस्थान में टिड्डियां फसल को नुकसान पहुंचाने लगी हैं। तभी तो जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने इसे लेकर एडवाइजरी जारी कर, इससे बचने के उपाय किसानों को बताए हैं।
शासन से आए फरमान के बाद जिला कृषि रक्षा अधिकारी यतेंद्र सिंह ने टिड्डियों के खतरे को लेकर एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्होंने किसान, प्रधान, सेक्रेटरी, लेखपाल, कृषि प्राविधिक सहायक व शिक्षकों को अलर्ट रहने के लिए कहा है। पीपीओ यतेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि निदेशालय द्वारा जारी अलर्ट के अनुसार राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में पाकिस्तानी टिड्डी दल का प्रकोप देखा जा रहा है। इसके चलते इन तीनों राज्यों से सटे जनपदों में टिड्डी के प्रकोप की संभावना है।
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इन बातों पर दें ध्यान
-टिड्डियों का उपद्रव आरंभ हो जाने के पश्चात इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।
-सामान्य टिड्डी द्वारा दिन में खाने एवं रात्रि में अंडे देने की प्रवृत्ति होती है।
-किसी क्षेत्र में विशेष रूप से टिड्डी दल रात्रि में रुक जाता है तो सुबह ही उस क्षेत्र की जुताई कर देनी चाहिए।
-टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, ग्राम पंचायत अधिकारी, प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों द्वारा जिला प्रशासन को देनी होगी।
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ऐसे करें टिड्डी से बचाव
टिड्डी के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठे होकर टिन के डिब्बे, थालियां, ढोल, डीजे आदि बजाकर शोर मचाएं।
-शोर से टिड्डी दल आसपास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पाता है।
-टिड्डी के प्रजनन को रोकने के लिए बलुई मिट्टी वाले इलाके को जुतवाकर पानी भरवा दें।
नियंत्रण के लिए यह है उपाय
- टिड्डी पर नियंत्रण पाने के लिए हवाई जहाज से विषैली दवाओं का छिड़काव, विषैला चारा जैसे मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत धूल में भीगी हुई गेंहू की भूसी का फैलाव आदि उपयोगी होता है।
-टिड्डियों को पानी और मिट्टी के तेल से भरी नांद में गिराकर नष्ट किया जा सकता है।
-शाम के समय फसलों के चारों तरफ मशाल जलाकर प्रकाश करें।
नियंत्रण के लिए करें छिड़काव
टिड्डी का प्रकोप दिखने पर मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशल धूल की 25-30 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेअर की दर से बुरकाव करें। या फिर मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी ढाई लीटर का 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।